मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने राजधानी पहुंचे साधु-संतों को पुलिस ने बीच में ही रोक दिया तो वे यादगारे शाहजहानी पार्क में धरने पर बैठ गए. यह धरना गुजरात के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यनंद गिरी के नेतृत्व में दिया जा रहा है.
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संतों को राज्यमंत्री का पद दिया जाना अब महंगा पड़ रहा है. दूसरे संतों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. आज राजधानी में गुजरात के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यनंद गिरी के नेतृत्व में प्रदेशभर के संतों ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव की चेतावनी दी थी. इस चेतावनी के चलते आज सुबह से ही साधु-संतों का भीड़ राजधानी में जुटने लगी थी. संतों की चेतावनी के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ, हालांकि संतों को आज सुबह तक भी मुख्यमंत्री निवास के घेराव की अनुमति नहीं दी गई. इससे खफा संत राजधानी के यादगारे शाहजहांनी पार्क में एकत्रित हुए और वहां पर धरने पर बैठ गए. इस आंदोलन में बड़ी संख्या में नागा साधु और संत भोपाल पहुंचे थे.
वैराग्यानंद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने नर्मदा सेवा यात्रा में हुए घोटाले को उजागर न करने के लिए संतों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया है. मुख्यमंत्री ने इस कृत्य से संत समाज और धर्म का अपमान किया है. उन्होंने कहा कि कई साधु-संतों को पुलिस ने मिसरोद के पीतांबरा आश्रम में रोक लिया. वैराग्यानंद ने कहा कि हमारी मांग है कि नर्मदा यात्रा की सीबीआई जांच की जाए. वैराग्यानंद ने कहा कि पहले कुछ लोग मुख्यमंत्री की यात्रा में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने जा रहे थे, तो शिवराज सिंह चौहान ने कुछ संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर मौन कर दिया. उन्होंने कहा कि संत समाज उनको दिखाएगा कि संन्यासी किसी के दबाव में या फिर पद के लालच में मौन नहीं रहता है.
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संतों को राज्यमंत्री का पद दिया जाना अब महंगा पड़ रहा है. दूसरे संतों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. आज राजधानी में गुजरात के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यनंद गिरी के नेतृत्व में प्रदेशभर के संतों ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव की चेतावनी दी थी. इस चेतावनी के चलते आज सुबह से ही साधु-संतों का भीड़ राजधानी में जुटने लगी थी. संतों की चेतावनी के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ, हालांकि संतों को आज सुबह तक भी मुख्यमंत्री निवास के घेराव की अनुमति नहीं दी गई. इससे खफा संत राजधानी के यादगारे शाहजहांनी पार्क में एकत्रित हुए और वहां पर धरने पर बैठ गए. इस आंदोलन में बड़ी संख्या में नागा साधु और संत भोपाल पहुंचे थे.
वैराग्यानंद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने नर्मदा सेवा यात्रा में हुए घोटाले को उजागर न करने के लिए संतों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया है. मुख्यमंत्री ने इस कृत्य से संत समाज और धर्म का अपमान किया है. उन्होंने कहा कि कई साधु-संतों को पुलिस ने मिसरोद के पीतांबरा आश्रम में रोक लिया. वैराग्यानंद ने कहा कि हमारी मांग है कि नर्मदा यात्रा की सीबीआई जांच की जाए. वैराग्यानंद ने कहा कि पहले कुछ लोग मुख्यमंत्री की यात्रा में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने जा रहे थे, तो शिवराज सिंह चौहान ने कुछ संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर मौन कर दिया. उन्होंने कहा कि संत समाज उनको दिखाएगा कि संन्यासी किसी के दबाव में या फिर पद के लालच में मौन नहीं रहता है.

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