शनिवार, 28 अप्रैल 2018

राज्यपाल संविधान के पालन की चिंता करें भाजपा या मोदी की नहीं


नेता प्रतिपक्ष  अजय सिंह ने राज्यपाल  आनंदी बेन पटैल के द्वारा दल विशेष को मजबूत बनाने और वोट लेने के तरीके बताने पर कहा है कि यह संविधान के प्रति ली गई शपथ का उल्लंघन है.
 सिंह ने कहा कि हमारी लोकतात्रिंक व्यवस्था में राज्यपाल किसी प्रदेश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है. इस पद पर बैठा व्यक्ति निरपेक्ष होता और दलीय भावना से ऊपर होता है.  पटैल ने सार्वजनिक रूप से राजनीतिक दल भाजपा के वोट बढ़ाने के लिए जो नसीहत भाजपा के कार्यकर्ताओं को दी है वह घोर आपत्तिजनक है. उन्होंने कहा कि श्रीमती पटैल को प्रदेश में संविधान और न्याय व्यवस्था को तहस-नहस करने के लिए भाजपा सरकार द्वारा जो प्रयास किए जा रहे है उसके प्रति चिंता व्यक्त करना चाहिए. लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के चुनाव जीतने हारने की चिंता हो रही है जो निश्चित ही लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है.
        नेता प्रतिपक्ष  सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में यह परंपरा रही है कि राज्यपाल दल विशेष के पक्ष में नहीं होता बल्कि वह राज्य सरकार को संविधान के अनुसार अपने दायित्व का निर्वाह न करने पर चेताता है. जैसे कि स्व. श्री रामेश्वर ठाकुर ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने की घोषणा को लेकर आगाह किया था और राज्यपाल की सलाह पर उन्होंने उसे स्थगित किया था. उन्होंने कहा संविधान की रक्षा करने वाला व्यक्ति ही अगर खुलेआम संविधान का, अपने पद की शपथ का उल्लंघन करे, उससे प्रदेश की जनता क्या उम्मीद रखेगी.
        नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा राज्यपाल आनंदी बैन पटैल ने सतना में दिए निर्देश से इस प्रदेश की जनता का विश्वास खो दिया. उन्होंने कहा इस संबंध में राज्यपाल को तुरंत सफाई देना चाहिए कि वे इस प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता की राज्यपाल हैं या सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की. 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें