रविवार, 29 अप्रैल 2018

श्रमिकों और पिछड़ों के कल्याण के बिना देश प्रगति नहीं कर सकेगा: कोविंद

 गुना जिले के बमोरी में 127 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण

राष्ट्रपति  रामनाथ कोविंद ने कहा कि यह एक सच्चाई है कि गरीबों, श्रमिकों और पिछड़ों के कल्याण के बिना कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता है, उनके कार्य में भी कौशल की जरूरत होती है. इसी प्रकार से तेंदूपत्ता संग्रहण करने का काम भी कुशलता का काम है. तेंदूपत्ता संग्रहक और उनके परिवार इस कार्य को अपने पारंपरिक ज्ञान से ही अच्छी तरह पूरा कर पाते है. इस कार्य से उनकी आजीविका चलने के साथ वनों का विनाश भी रुका है. 
राष्ट्रपति  कोविंद आज गुना जिले के सुदूर अंचल बमोरी में असंगठित मजदूर एवं तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. राष्ट्रपति  कोविंद ने ग्राम बमोरी में 127 करोड़ रुपए की लागत के विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण किया. राष्ट्रपति ने 10 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस के रूप में एक करोड़ रुपए की राशि प्रदाय की. राष्ट्रपति ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वनों का संरक्षण और वनों से प्राप्त होने वाली उपज का सदुपयोग करके ही हम आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रख सकते हैं. वनों को आदिवासी एवं वनवासी से बेहतर कोई नहीं जान सकता है, जंगल ही उनका रक्षक और पालक है. वे दोनों एक-दूसरे की रक्षा करते है, ऐसे में तेदूपत्ता संग्राहकों के कल्याण की जिम्मेदारी समाज और राज्य सरकार की है.
बांस से बनने वाले उत्पादों के लिए मिशन मोड योजना
राष्ट्रपति ने कहा कि यह खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश में लघु वनोपज संघ द्वारा मुख्यमंत्री तेंदूपत्ता संग्राहक कल्याण सहायता योजना शुरू की गई है. संघ के माध्यम से संग्राहकों के बच्चों की शिक्षा के लिए एकलव्य छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जा रही है.  कोविंद ने कहा कि वनोपज का उचित मूल्य प्राप्त हो, आजीविका के लिए वनों पर आश्रित लोगों के जीवन में सुधार हो, इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा 24 लघु वनोपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना लागू की गई है. योजना से वनवासी भाई-बहनों को वनोपज का उचित मूल्य प्राप्त होगा, वहीं बांस और उससे बनने वाले उत्पादों के संबंध में भी भारत सरकार ने मिशन मोड योजना शुरू की है. लघु वनोपज संघ द्वारा भी लघु वनोपज पर आधारित प्र-संस्करण केन्द्र संचालित किए जा रहे है.
राष्ट्रपति  कोविंद ने कहा कि भारत में श्रम क्षेत्र में असंगठित क्षेत्रों का हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है, जिसमें मुख्य रूप से ज्यादातर श्रमिक कृषि एवं निर्माण क्षेत्रों से जुड़े हुए है. असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की भारी जरूरत है. इनके बीमार होने, अपंग हो जाने पर या वृद्धावस्था में किसी प्रकार की परेशानी खड़ी न हो, इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता बनाई जा रही है. उन्होंने इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पहले से ही इस दिशा में कार्य कर रही है. प्रदेश में लघु एवं कुटीर उद्योगों पर राज्य सरकार ने विशेष ध्यान दिया है. इसी का परिणाम है कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में लघु उद्योग इकाईयों के माध्यम से लगभग 6 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है. उन्होंने मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में श्रमिकों के कल्याण के लिए शुरू की गई योजनाओं से श्रमिकों के जीवन-स्तर में आए सुधार का उल्लेख भी किया.

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