बुधवार, 25 अप्रैल 2018

महिला आरक्षण के लिए कोई संजीदा नहीं


सेंट्रल फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक  डा. रंजना कुमारी ने आज यहां आरोप लगाया कि लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण के लिए कोई भी दल संजीदा नहीं है. महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए राज्य सभा में काफी समय पहले ही बिल पास हो गया पर उसे लोकसभा में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है.
सेंट्रल फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी ने आज यहां संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, लोकसभा अध्यक्ष बनने के पूर्व उनके साथ महिला आरक्षण विधेयक की मांग को लेकर प्रदर्शन में शरीक हुई थीं, लेकिन वे भी अब कुछ नहीं कर पा रही हैं. आपने कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराए जाने को लेकर इस विधेयक की पक्षधर महिलाएं प्रधानमत्री से मिलने के लिए पिछले 4 सालों से लगातार कोशिशें कर रही हैं पर मुलाकात नहीं हो पा रही है. ऐसे में नहीं लगता है कि अब बचे हुए कार्यकाल में मोदी सरकार इस बारे में कुछ करेगी. आपने कहा कि यह स्थिति तब है जब कि भाजपा ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में महिला आरक्षण का वादा किया था. आपने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने से प्रजातंत्र की सबसे बड़ी संस्थाओं लोकसभाओं और विधानसभाओं में महिलाओं को समुचित हक नहीं मिल पा रहा है. विभिन्न दलों के लोग एक राजनीतिक संप्रदाय के तौर पर एकजुट होकर महिलाओं को आरक्षण के माध्यम से समुचित भागीदारी ही नहीं देना चाहते हैं.  आपने कहा कि जब नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में वहां की लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है वहीं हमारे यहां 11-12 फीसदी महिलाएं ही लोकसभा और विधानसभाओं के लिए चुनी जा पाती हैं.
रंजना कुमारी के साथ ही काम करने वाली अर्चना ने बताया कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण न मिलने के कारण पिछले 20 सालों में 1 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. अगर 33 फीसदी महिलाएं लोकसभा और विधानसभाओं में पहुंचती तो वेतनभत्तों के तौर पर उन्हें इतना पैसा मिल जाता है. अर्चना ने बताया कि राजनीतिक दल जिन महिलाओं को टिकट भी देते हैं तो उन्हें समुचित पैसा चुनाव लड़ने के लिए नहीं देते हैं. राजनीतिक दलों का व्यवहार और महिला और पुरुष प्रत्याशियों के मामले में अलग-अलग होता है. इस मौके पर राज्य की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच भी मौजूद थीं. उन्होंने बताया कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में समुचित प्रतिनिधित्व 33 फीसदी आरक्षण के जरिए मिल सकता है. महिलाओं की समुचित भागीदारी से प्रजातंत्र की जड़ें मजबूत होंगी.

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