आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कमलनाथ के परिवार की कंपनी के साथ शिवराज सरकार ने गैर कानूनी समझौता किया है. इस समझौते के चलते तीन सालों में प्रदेश की जनता का 585 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.अग्रवाल ने यह आरोप आज आम आदमी पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए लगाया. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के अनूपपुर में बन रहे एमबी पावर लिमिटेड कंपनी की परियोजना के साथ शिवराज सरकार ने गैर कानूनी समझौता किया है. अग्रवाल ने बताया कि इस कंपनी से प्रदेश सरकार का 5 जनवरी 2011 को समझौता हुआ. केन्द्र सरकार की 6 जनव२ारी 2006 की टैरिफ पालिसी के अनुसार कोई भी समझौता केवल प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से ही हो सकता था, परंतु राज्य सरकार ने इस नियम को उल्लंघन कर एमबी पावर लिमिटेड के साथ सीधा समझौता किया. उन्होंने कहा कि 5 जनवरी 2011 को समझौता करने वाले मुख्य अभियंता गजरा मेहता उक्त दिनांक को इस पद पर पदस्थ ही नहीं थे. दस्तावेजों से साफ है कि उनकी उक्त पद पर पदस्थापना 31 जनवरी 2011 को हुई. अत: यह समझौता गैर कानूनी था और इसके कारण 2015 से 2018 के बीच इस परियोजना की बिजली महंगी होने के कारण प्रदेश की जनता को 585 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. अग्रवाल ने कहा कि हमारी मांग हे कि मध्यप्रदेश में निजी बिजली कंपनियों की जो लूट के कारण बिजली के दाम पहले से ज्यादा हो गए हैं, इन्हें तत्काल प्रभााव से आधा किया जाना चाहिए और इस गैर कानूनी समझौते को रद्द किया जाना चाहिए.
कैसे हैं कमलनाथ के संबंध
अग्रवाल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एमबी पॉवर कंपनी, मोजरबियर कंपनी द्वारा विशेष रुप से बनाई गई कंपनी है. मोजरबियर कंपनी में कमलनाथ के जीजा दीपक पुरी चैयरमैन हैं और उनकी बहन नीता पुरी और उनके भांजे रातुल पुरी भी कंपनी में शामिल हैं. साथ ही कमलनाथ के भांजे रातुल पुरी एमबी पावर के डायरेक्टर हैं. मोजरबियर कंपनी में कमलनाथ खुद शेयरधारक हैं. अग्रवाल ने कहा कि कमलनाथ ने चुनाव आयोग में वर्ष 2014 में दिए शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख है. उन्होंने बताया कि कंपनी में उनका 6450 शेयर है. अत: यह स्पष्ट है कि कमलनाथ के परिवार का एमबी पावर से सीधा संबंध हैं और यही कारण है कि पिछले 7 सालों में कभी भी इस गैर कानूनी और प्रदेश की जनता को लूटने वाले समझौता का किसी ने विरोध नहीं किया.
आम आदमी पार्टी ने पूछे सवाल
* क्या शिवराजसिंह चौहान इस बात जवाब देंगे कि यह कैसे हो गया कि अधिकारी गजरा मेहता संबंधित पद पर थे ही नहीं, फिर कैसे उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर किए?
* क्या कमलनाथ जवाब देंगे की यह कैसे हो गया कि इस गैर कानूनी और जनविरोधी समझौते का उन्होंने यह कांग्रेस ने विरोध क्यों नहीं किया?
* क्या इस कंपनी के बारे में इतना खुलासा होने के बाद कमलनाथ इस कंपनी के साथ हुए समझौते को रद्द करने की मांग करेंगे?
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