मध्यप्रदेश में पिछले तीन सालों से बुंदेलखंड क्षेत्र सूखे की मार झेल रहा है. यहां पर कई किलोमीटर तक धरती खाली और वीरान खेत नजर आते हैं, मगर टीकमगढ़ जिले के नादिया गांव में अमरचंद प्रजापति के खेतों में ऐसी तपती गर्मी में हरियाली नजर आती है. यह ऐसे किसान हैं जो एक एकड़ में पपीता और अन्य मौसमी सब्जियां उगाकर हर साल पांच लाख रुपये से ज्यादा कमाई कर रहे हैं.
अमरचंद प्रजापति और नाथूराम कुशवाहा मिलकर एक एकड़ जमीन पर पपीता, मिर्ची, टमाटर, बैगन वगैरह की खेती कर जिले में विकसित किसान की मिसाल बन गए हैं. ये किसान बहुत कम पानी का उपयोग कर अपनी आजीविका चलाने में कामयाब हुए हैं. अमरचंद बताते हैं कि उन्होंने एक एकड़ क्षेत्र में 20 से ज्यादा कतारों में पपीता लगाए हैं, वहीं बीच के हिस्से में मिर्ची, टमाटर और बैगन को उगाया है. इससे उन्हें सालाना पांच लाख रूपये से ज्यादा की आमदनी हो जाती है. इतना ही नहीं, वे यह सारी फसल बहुत कम पानी का उपयोग कर उगाते हैं.
एक कतार में निकलता है 50 हजार का पपीता
नाथूराम का कहना है कि पपीते की अच्छी पैदावार हो तो एक कतार से ही 50 हजार रुपये का पपीता सालभर में निकल आता है. एक एकड़ में बीस कतार हैं, इस तरह अच्छी पैदावार होने पर सिर्फ पपीता से ही 10 लाख रुपये कमाए जा सकते हैं. इसके अलावा अन्य सब्जियों से होने वाली आय अलग है.
एक दिन में लगता है सिर्फ 8 सौ लीटर पानी
नाथूराम के अनुसार वे दिनभर में इन फसलों की मुश्किल से आठ सौ लीटर पानी से सिंचाई करते हैं. उनके ट्यूबवेल में पानी बहुत कम है, इसके बावजूद ड्रिप सिंचाई का उन्हें भरपूर लाभ मिल रहा है. कम पानी में भी वे अच्छी फसल ले रहे हैं. अमरचंद के खेत में पहुंचकर दूर से पपीते के पेड़ नजर आने लगते हैं और जमीन में काली पॉलीथिन बिछी नजर आती है. पॉलीथिन के नीचे मिट्टी की क्यारी बनाई गई हैं और उस पर ट्यूब बिछी हुई है. इस ट्यूब से हर पेड़ के करीब पानी का रिसाव होता है. जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और ऊपर पॉलीथिन होने के कारण पानी वाष्पीकृत होकर उड़ नहीं पाता. लिहाजा कम पानी में ही पेड़ों की जरूरत पूरी हो जाती है.
पीएम के संदेश को जिले में सफल बनाएंगे
नादिया गांव के अमरचंद और नाथूराम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वन ड्रॉप मोर क्रॉप के संदेश को सफल बनाने में लगे हैं. उनका कहना है कि अगर किसान ड्रिप एरीगेशन को अपनाएं तो सूखे बुंदेलखंड को भी हरा-भरा बनाया जा सकता है. इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस तरह की फसलों में किसान अधिक से अधिक जैविक खाद का उपयोग करें तो काफी फायदा मिलता है. जैविक खाद को किसान अपने खेत पर ही तैयार कर सकता है.
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