पेड़ से वर्षा, वर्षा से जल और जल से जीवन का संरक्षण होता है. प्रकृति के संसाधनों के शोषण की जगह दोहन लाजिमी है पर हम सबका कर्त्तव्य भी है कि हम जीवनदायी संसाधनों यथा नदियों, तालाबों, जल स्त्रोतों का संरक्षण एवं संवर्द्धन करें. आने वाली पीढ़ी के लिये जल को सहेजें, जिससे सुखद भविष्य का निर्माण हो सके. उक्ताशय के विचार प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल से कोलास नदी विकास खण्ड फंदा से नदी एवं जल संरक्षण अभियान के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुये व्यक्त किये. शहडोल जिले में भी नगर पालिका स्थित मानस भवन में जिला प्रशासन एवं जनअभियान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में जलसंसद का आयोजन कर लोगों को बढ़ती जल समस्या के प्रति आगाह करने के साथ ही प्रदेश के इस महाभियान में सहभागी बनने का आव्हान किया गया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि नदियां जीवन का आधार रही हैं, संसार के समस्त सभ्यताएं इन्हीं नदियों के किनारे पली-बढ़ी हैं. आज प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पूरी दुनिया में मौसम को लेकर विषम परिस्थितियां पनप रही हैं. कहीं अल्प वर्षा तो कहीं भारी बारिश, कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा. इन समस्याओं का निदान भी हम सबको मिलकर खोजना होगा. हम हाथ में हाथ रखकर बैठ नहीं सकते. इसके लिये प्रदेश सरकार ने वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, धरती के संरक्षण, नदी-तालाब एवं जल स्त्रोतों के संरक्षण का बीड़ा उठाया है. इस कार्य में समाज एवं समाज में रहने वाला हर व्यक्ति आगे रहे, सरकार उनके सहयोग के लिये सदैव रहेगी.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गये उद्बोधन को आम जनता को सुनाया गया तथा उपस्थित लोगों ने प्रदेश के इस महा अभियान में हाथ उठाकर अपना सहयोग देने का संकल्प लिया. जलसंसद कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ चंद्रेश द्विवेदी ने जलसंरक्षण एवं स्वच्छता कार्यक्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला. नरेंद्र दुबे ने कहा कि शहडोल का नाम ही सहस्त्र डोल अर्थात सैकड़ों तालाबों की भूमि से पड़ा है. हमें इस बात का गर्व है कि तालाबों की धरती में हम सभी ने जन्म लिया है उसका संरक्षण भी हम सब मिलकर करेंगें. रक्षित निरीक्षक सत्यप्रकाश मिश्रा ने अपने बचपन को याद करते हुये संस्मरण सुनाये तथा जलसंरक्षण एवं अन्य प्राकृतिक साधनों की सुरक्षा में खुले मन से आने का आमंत्रण दिया. कार्यक्रम में सामाजिक कल्याण विभाग के कलाकारों द्वारा जल एवं पर्यावरण संरक्षण पर आधारित मनमोहक गीतों की प्रस्तुति दी गई. आभार एसडीएम श्री रमेश सिंह ने व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन जनअभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री विवेक पाण्डेय ने किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि नदियां जीवन का आधार रही हैं, संसार के समस्त सभ्यताएं इन्हीं नदियों के किनारे पली-बढ़ी हैं. आज प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पूरी दुनिया में मौसम को लेकर विषम परिस्थितियां पनप रही हैं. कहीं अल्प वर्षा तो कहीं भारी बारिश, कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा. इन समस्याओं का निदान भी हम सबको मिलकर खोजना होगा. हम हाथ में हाथ रखकर बैठ नहीं सकते. इसके लिये प्रदेश सरकार ने वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, धरती के संरक्षण, नदी-तालाब एवं जल स्त्रोतों के संरक्षण का बीड़ा उठाया है. इस कार्य में समाज एवं समाज में रहने वाला हर व्यक्ति आगे रहे, सरकार उनके सहयोग के लिये सदैव रहेगी.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गये उद्बोधन को आम जनता को सुनाया गया तथा उपस्थित लोगों ने प्रदेश के इस महा अभियान में हाथ उठाकर अपना सहयोग देने का संकल्प लिया. जलसंसद कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ चंद्रेश द्विवेदी ने जलसंरक्षण एवं स्वच्छता कार्यक्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला. नरेंद्र दुबे ने कहा कि शहडोल का नाम ही सहस्त्र डोल अर्थात सैकड़ों तालाबों की भूमि से पड़ा है. हमें इस बात का गर्व है कि तालाबों की धरती में हम सभी ने जन्म लिया है उसका संरक्षण भी हम सब मिलकर करेंगें. रक्षित निरीक्षक सत्यप्रकाश मिश्रा ने अपने बचपन को याद करते हुये संस्मरण सुनाये तथा जलसंरक्षण एवं अन्य प्राकृतिक साधनों की सुरक्षा में खुले मन से आने का आमंत्रण दिया. कार्यक्रम में सामाजिक कल्याण विभाग के कलाकारों द्वारा जल एवं पर्यावरण संरक्षण पर आधारित मनमोहक गीतों की प्रस्तुति दी गई. आभार एसडीएम श्री रमेश सिंह ने व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन जनअभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री विवेक पाण्डेय ने किया.

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