बुधवार, 25 अप्रैल 2018

अदालत की समझाइश, पति-पत्नी फिर हुए एक

 जल्दबाजी में लिए गए फैसले कभी-कभी पूरे जीवन पर प्रभाव डालते हैं. इसमें दो पक्ष अपने अहंकार को बचाने के लिए लड़ते हैं और इस लड़ाई में कुछ पाने के चक्कर में सब कुछ खो देते हैं. यदि समय रहते मामले को समझे और अहंकार छोड़ दें तो सुखमय जीवन गुजार सकते हैं. ऐसे ही एक मामला देखने को मिला. यहां पति-पत्नी ने अहंकार को छोड़कर एक दूसरे के साथ फिर से जीवन गुजारने पर अपनी सहमति दी. जिले की सिराली तहसील के ग्राम दीपगांव में रहने वाले शेख समीर का विवाह खंडवा जिले के खालवा तहसील में रहने वाली शाइन से मई 2014 में हुआ था. शेख समीर ने बताया कि विवाह के बाद शाइन एक वर्ष तक अपनी ससुराल में रही. इसके बाद शाइन गृहस्थी का काम नहीं करती थी और सास, ससुर से लड़ाई-झगड़ा करती थीं. ससुराल में विवाद होने लगा था, तो शाइन अपने मायके में आ गई. जिसे वापस लाने के लिए शेख ने मामला न्यायालय में लगाया था. जबकि शाइन का कहना है, कि ससुराल में कोई घटना नहीं हुई थी. बल्कि उसके पति व सास, ससूर उसे प्रताड़ित करते थे और मारपीट करते थे. खाने पीने को नहीं देते थे. इसलिए वह मायके में आ गई थी. रविवार को नेशनल लोक अदालत में दोनों पति-पत्नी के बीच न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय प्रकाश चंद्रा, सामाजिक सदस्य आभा तिवारी द्वारा समझाइश के बाद राजीनामा हो गया. अब दोनों साथ में रहेंगे. इसी प्रकार नाजमा बी ने अपने पति मुस्तुफा खान से भरण पोषण राशि प्राप्त करने के लिये प्रकरण प्रस्तुत किया था। इसमें न्यायालय द्वारा समझाइश दिए जाने पर दोनों फिर से एक साथ रहने के लिए तैयार हो गए.

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