मंगलवार, 24 अप्रैल 2018

संस्थान कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान दें


पूर्व भारतीय प्रशासनिक अधिकारी डॉ. ज्ञानेन्द्र बड़गैया ने कहा है कि संस्थानों को कर्मचारी अथवा स्टॉफ के प्रशिक्षण पर ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि कर्मचारी संस्थान की रीढ़ है, वरिष्ठ अधिकारी के अलावा कर्मचारियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाना जरूरी है. उनके कमजोर रहने से ऊँचाइयों पर नहीं पहुँचा जा सकता. डॉ. बड़गैया ने यह बात 'राज्य-स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों के लिये मानक बेंच-मार्क का निर्धारण'' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के शुभारंभ पर कही.
डॉ. बड़गैया ने कहा कि नये दौर में ग्लोबल प्रशिक्षण की आवश्यकता है. इस नवाचारी युग में वेबसाइट प्रशिक्षण का एक अच्छा मंच हो सकता है. उन्होंने कहा कि इसके लिये हाई स्पीड इंटरनेट एक बड़ा स्रोत है. संस्थान दिखने में भले ही अच्छा न हो, लेकिन उसमें इंटरनेट की हाई स्पीड लाइन आज की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हमें लकीर का फकीर भी नहीं होना चाहिये. नये विचारों पर काम कर आगे बढ़ना होगा. इसके लिये संस्थानों में काम करने का वातावरण भी बदलना होगा. डॉ. बड़गैया ने कहा कि कार्यशाला की तैयारियाँ तो बहुत जोर-शोर से होती है, लेकिन यह देखने की आवश्यकता है कि प्रशिक्षण के जरिये प्रतिभागियों ने क्या सीखा? उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण विषय को लक्ष्य के रूप में रखकर दिया जाना चाहिये. साथ ही, जरूरतमंद व्यक्ति को ही प्रशिक्षण देना चाहिये. समय की आवश्यकता को देखकर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिये.
सचिव राज्य आनंद संस्थान श्री मनोहर दुबे ने कहा कि शिक्षण और प्रशिक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं. शिक्षण के अनुसार ही प्रशिक्षण होना चाहिये. प्रतिभागियों के लिये प्रशिक्षण उपयोगी साबित होना चाहिये. व्यक्ति के लिये प्रशिक्षण का त्वरित उपयोग होना चाहिये. व्यक्ति से संबंधित विषय पर प्रशिक्षण प्रतिभागियों के लिये रुचिपूर्ण रहेगा और वह लगाव से प्रशिक्षण हासिल करेगा. उन्होंने कहा कि अलग-अलग विषय की विधाओं के अनुसार बेंच-मार्क होने चाहिये. समय और साधन सीमित हैं, इसलिये प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा और छोटे-छोटे कदम से आगे बढ़ना होगा.
पश्चिम बंगाल की उपभोक्ता मामले की सचिव नीलम मीना ने कहा कि देश और समाज को आगे ले जाने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है. साथ ही, समय के साथ नये परिवर्तन के बेंच-मार्क बनाने होंगे. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षणार्थी के हिसाब से प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये. प्रशिक्षण के दौरान कोई व्यवधान या समस्या पैदा नहीं होना चाहिये, जिससे प्रतिभागी मन लगाकर प्रशिक्षण हासिल कर सके. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को एक-दूसरे से फीडबेक लेकर अच्छे प्रशिक्षक की ओर ध्यान देना चाहिये.
नेशनल एक्रेडेशन बोर्ड फॉर एजुकेशन एण्ड ट्रेनिंग के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी श्री मनीष कुमार जिन्दल ने कहा कि सभी को प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ती है, चाहे वो व्यक्ति हो या संस्थान. तकनीकी युग में हर दिन नये परिर्वतन आते रहते हैं, इसलिए हर छ: माह में नयी आवश्यकताओं को लेकर प्रशिक्षण होना चाहिए. लोग अगर तकनीकी युग से परिचित नहीं होंगे, तो पिछड़ जायेंगे. उन्होंने प्रेजेंटेशन के जरिए आई.एस.ओ. के मापदंड भी बताये. उन्होंने कहा कि सेवा और विश्वास के जरिये संस्था एवं व्यक्ति अपनी अलग पहचान बना सकते हैं.

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