शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

सिंधिया को नहीं मिली कमान, भाजपा में खुशी

भाजपा नेता इस बात को लेकर खुश हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस की कमान नहीं मिली, जबकि कमलनाथ पर कांग्रेस ने भरोसा जताया. भाजपा नेताओं की मानें तो उपचुनाव हराकर सिंधिया कांग्रेस के एक बड़े नेता के रूप में उभरे थे, यदि उन्हें सामने रखकर कांग्रेस चुनाव लड़ती तो भाजपा को ज्यादा मुश्किल होती. भाजपा की मानें तो कमलनाथ और सिंधिया को अलग-अलग जिम्मेदारी देने से साफ है कि पार्टी में गुटबाजी का अंत नहीं हुआ है. भाजपा नेताओं ने कमलनाथ की ताजपोशी के साथ राहत की सांस ली है. राहत की वजह साफ है कि वे कमलनाथ को बाहरी बताकर घेराबंदी में सफल रहेंगे. पार्टी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस का फैसला न तो सामाजिक कारणों को ध्यान में रखकर लिया गया है न ही राजनीतिक. वे कहते हैं कि कमजोर माली हालत के चलते कांग्रेस का यह मजबूरी में लिया गया फैसला है. उनके मुताबिक कमलनाथ जननेता नहीं हैं और स्थानीय भी नहीं हैं, इसलिए पार्टी देसी बनाम बाहरी का मुद्दा उठाएगी और सरल, सहज नेता शिवराज सिंह से तुलना कर कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी करेगी.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने मप्र कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाने पर कमलनाथ को बधाई दी है. इसके साथ ही चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा चारों कार्यकारी अध्यक्षों को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं. वहीं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद प्रभात झा ने कहा है कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमान सौंपकर कांग्रेस एक बार फिर अमीरों के हाथ में खेल गई. प्रदेश में किसान के विरुद्ध कापोर्रेट घराने की चुनावी लड़ाई होगी. गरीब को हटाने के लिए अमीरों को कांग्रेस की कमान सौंपे जाने को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी.

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