मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के सुदूर अंचल के आदिवासी बहुल ग्राम पड़मनिया, बड़ी तुम्मी एवं सरई में विपरीत परिस्थितियों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने जिला प्रशासन के नवाचार को पुस्तक 'न्यू पाथवेज'' में स्थान मिला है.पुस्तक का विमोचन गत दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है.
आर्थिक रूप से साध्य नहीं होने के कारण पहाड़ी क्षेत्र में बसे इन ग्रामों में किसी दूरसंचार कम्पनी ने मोबाइल सेवा नहीं उपलब्ध करवायी.जिला प्रशासन ने शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने और डिजिटल इण्डिया के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से विकल्प तलाशना शुरू किया.जहाँ चाह-वहां राह की कहावत चरितार्थ हुई और डिजिटल इण्डिया की पहल प्रोजेक्ट 'सुगम'' के माध्यम से तथा रेलवे अधिकारियों के सहयोग से एक विशेष टॉवर का चयन किया गया.इस टॉवर में रेडियो फ्रिक्वेंसी का उपयोग कर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था थी.इस टॉवर का सोर्स शहडोल में उपस्थित मुख्य टॉवर है.बिजली की लगातार निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये सोलर पैनल का उपयोग किया गया है.
अपने आप में बिलकुल नया यह प्रयोग भारत सरकार की डिजिटल इण्डिया की अवधारणा के क्रियान्वयन का उपयुक्त उदाहरण है.आज इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पुष्पराजगढ़ की ग्राम पंचायतों पड़मनिया, बड़ी तुम्मी एवं सरई के आसपास के ग्रामों में लगभग 3000 निवासियों को मोबाइल एवं इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है.आज यहाँ के निवासियों को आधार एवं अन्य आॅनलाइन शासकीय सुविधाओं के लिये भटकना नहीं पड़ता, ये सब सुविधाएँ अब उनके क्षेत्र में ही उपलब्ध हैं.ई-कियोस्क के माध्यम से बैंकिंग सुविधाएँ भी क्षेत्र के निवासियों को प्राप्त हो रही हैं.आज वहाँ के नागरिकों को शासन की उपलब्धता महसूस हो रही है.कलेक्टर अजय शर्मा ने कहा है कि इस सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसकी पुनरावृत्ति 10 अन्य ग्राम पंचायतों में भी संचार सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए की जाएगी.
आर्थिक रूप से साध्य नहीं होने के कारण पहाड़ी क्षेत्र में बसे इन ग्रामों में किसी दूरसंचार कम्पनी ने मोबाइल सेवा नहीं उपलब्ध करवायी.जिला प्रशासन ने शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने और डिजिटल इण्डिया के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से विकल्प तलाशना शुरू किया.जहाँ चाह-वहां राह की कहावत चरितार्थ हुई और डिजिटल इण्डिया की पहल प्रोजेक्ट 'सुगम'' के माध्यम से तथा रेलवे अधिकारियों के सहयोग से एक विशेष टॉवर का चयन किया गया.इस टॉवर में रेडियो फ्रिक्वेंसी का उपयोग कर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था थी.इस टॉवर का सोर्स शहडोल में उपस्थित मुख्य टॉवर है.बिजली की लगातार निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये सोलर पैनल का उपयोग किया गया है.
अपने आप में बिलकुल नया यह प्रयोग भारत सरकार की डिजिटल इण्डिया की अवधारणा के क्रियान्वयन का उपयुक्त उदाहरण है.आज इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पुष्पराजगढ़ की ग्राम पंचायतों पड़मनिया, बड़ी तुम्मी एवं सरई के आसपास के ग्रामों में लगभग 3000 निवासियों को मोबाइल एवं इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है.आज यहाँ के निवासियों को आधार एवं अन्य आॅनलाइन शासकीय सुविधाओं के लिये भटकना नहीं पड़ता, ये सब सुविधाएँ अब उनके क्षेत्र में ही उपलब्ध हैं.ई-कियोस्क के माध्यम से बैंकिंग सुविधाएँ भी क्षेत्र के निवासियों को प्राप्त हो रही हैं.आज वहाँ के नागरिकों को शासन की उपलब्धता महसूस हो रही है.कलेक्टर अजय शर्मा ने कहा है कि इस सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसकी पुनरावृत्ति 10 अन्य ग्राम पंचायतों में भी संचार सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए की जाएगी.

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