हाशिए पर जा चुके नेताओं की होगी एंट्रीमध्यप्रदेश कांग्रेस में निजाम बदलते ही हाशिए पर पहुंचे नेताओं ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है. कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही इन नेताओं को अपना भविष्य दिखाई देने लगा है, तो कई नेता नाराज भी हैं. नाराज नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से फिलहाल दूरी बना रखी है. इन नेताओं की भूमिका अब 1 मई को कमलनाथ द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद ही दिखाई देगी. फिलहाल नाथ समर्थकों के अलावा दिग्जिवयसिंह के समर्थक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सक्रिय नजर आ रहे हैं.
राज्य में विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस में हुए बदलाव के बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सन्नाटा सा पसर गया है. इन दिनों यहां पर नेताओं का एक तरह से टोटा हो गया है, लेकिन लंबे समय से हाशिए पर चले आ रहे नेताओं की सक्रियता भी यहां पर दिखाई दे रही है. खासकर दिग्विजयसिंह समर्थक नेता कांग्रेस कार्यालय में कमलनाथ समर्थकों के साथ नजर आ रहे हैं. हालांकि दिग्विजयसिंह के भाई लक्ष्मण सिंह खुद इस नियुक्ति को लेकर खफा दिखाई दिए. उन्होंने कमलनाथ का सीधा विरोध तो नहीं किया, मगर चार प्रभारी अध्यक्षों की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं. लक्ष्मण सिंह के अलावा सुरेश पचौरी, अरुण यादव और कांतिलाल भूरिया समर्थक नेता भी पीसीसी से दूरी बनाए हुए हैं. इन नेताओं की नाराजगी इस बात का संकेत दे रही है कि कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर सड़क पर नजर आ रही है.
प्रदेश कांग्रेस में हुए इस बदलाव के बाद जब मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंचा तो उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत को जिम्मेदारी सौंपकर सभी को एकजुट होने को कहा.गहलोत ने नाराज नेताओं से चर्चा कर सीधे तौर पर एआईसीसी के संदेश को बताया और 1 मई को कमलनाथ के होने पर पदभार ग्रहण समारोह में उपस्थित रहने को कहा. इसके बाद यह संदेश प्रदेश के नेताओं तक पहुंच गया. दूसरी ओर अरुण यादव के अलाव कांतिलाल भूरिया और सुरेश पचौरी के कार्यकाल से हाशिए पर चल रहे नेताओं की सक्रियता भी इन दिनों दिखाई दे रही है. कुछ राजधानी भोपाल में तो कुछ ने दिल्ली में सक्रियता दिखाई है.इन नेताओं को अब कांग्रेस में अपना भविष्य दिखाई दे रहा है और उम्मीद है कि वे फिर से पद पा सकेंगे. हालांकि इस बात का फैसला 1 मई को कमलनाथ के पदभार ग्रहण के बाद ही होगी कि किसे क्या मिलेगा, मगर पुराने नेता अब इस बात का दावा भी करने लगे हैं कि कांग्रेस में नई ऊर्जा का संचार होगा.
सिंधिया समर्थक पसोपेश में
कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की चुप्पी को लेकर कांग्रेस में तरह-तरह की चर्चा होने लगी है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा सिंधिया को मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष और कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सिंधिया का कोई बयान न आना चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को धन्यवाद और कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त होने पर बधाई संबंधी ट्वीट नहीं किया है. सिंधिया के इस रवैये से उनके समर्थकों में पसोपेश की स्थिति है.
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