माइक्रो फाइनेंसिंग से गरीबों को हुए फायदे का सर्वे कर आकलन किया जाना चाहिये. माइक्रो फाइनेंस की ब्याज दर को भी कम किये जाने की जरूरत है. सहकारिता राज्यमंत्री विश्वास सारंग ने भोपाल में मध्यप्रदेश वित्तीय समावेश सम्मेलन-2018 में यह बात कही. नॉन बैंकिंग फायनेंशियल कम्पनीज और माइक्रो फाइनेंस इंस्टी्ट्यूट एसोसिएशन द्वारा होटल मेरियट में सम्मेलन के उदघाटन सत्र में राज्य मंत्री श्री सारंग मुख्य अतिथि थे. प्रमुख सचिव वित्त मनोज गोविल, पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच और एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश शर्मा भी मौजूद थे.
राज्यमंत्री सारंग ने कहा कि देश और दुनिया में फायनेंशियल इन्क्लूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जन-धन योजना को लागू करने के बाद तेजी से बढ़ा है. योजना के लागू होने के पहले पूरी दुनिया में वयस्क व्यक्तियों के 60 प्रतिशत बैंक खाते थे, जो योजना के लागू होने के बाद 69 प्रतिशत हो गये. भारत में बैंक खातों की संख्या 53 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई. राज्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार स्व-सहायता समूहों को 3 लाख तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज का अनुदान दे रही है. सारंग ने कहा कि माइक्रो फाइनेंस का महत्वपूर्ण रोल है. गरीब वर्ग के लिये बिना सिक्यूरिटी और औपचारिकता के 10 लाख तक का ऋण माइक्रो फाइनेंस के तहत दिया जा रहा है. प्रदेश में 3 हजार करोड़ का ऋण एनबीएफसी द्वारा दिया गया है. पचास हजार रुपये तक, 50 हजार से 5 लाख रुपये तक और 5 लाख से 10 लाख रुपये तक 3 केटेगरी में एनबीएफसी द्वारा ऋण दिया जाता है. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में चर्चा से महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकलेंगे जो फायनेंशियल इन्क्लूजन और माइक्रो फाइनेंसिंग को बढ़ाने में मददगार होंगे.
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