बुधवार, 11 दिसंबर 2019

केन्द्र ने यूरिया का कोटा किया कम: कमलनाथ



प्रदेश में यूरिया की भारी किल्लत के बीच राजनीति गरमाने लगी है. जहां एक तरफ यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री  कमलनाथ ने यूरिया की कमी के लिए केंद्र सरकार को निशाना बनाया है. उन्होंने कहा कि केन्द्र ने यूरिया के प्रदेश के कोटे में कमी कर दी है.
गौरतलब है कि प्रदेश अभी यूरिया की भारी कमी झेल रहा है.  सुबह से शाम तक किसान लाइनों में लगकर यूरिया प्राप्त कर रहे हैं.  वहीं कई ऐसे भी किसान हैं, जिन्हें लाइन में  लगने के बाद भी खाद नहीं मिल पा रहा है जिससे किसानों में  आक्रोश है.  इसी वजह से कई जगह कल चक्काजाम के साथ यूरिया के लूट की खबर भी सामने आयी थी.  प्रदेश में निर्मित हुए इन हालातों के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. अपने ट्वीट में  उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा यूरिया के कोटे में  कमी कर दी गयी है,  जिसके कारण आपूर्ति में  दिक्कत आ रही है.  साथ ही उन्होंने यह  भी कहा है कि हमनें रबी मौसम देखते हुए केंद्र  सरकार से 18 लाख मिट्रिक टन यूरिया की मांग की थी परंतु केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त यूरिया नहीं दिया गया.  उन्होंने कहा कि यूरिया की आपूर्ति को लेकर सरकार  प्रयासरत है.
ट्वीट में उन्होंने कहा कि मांग की बढ़त और केंद्र द्वारा खाद के कोटे की कमी से हमारे किसान भाइयों को दिक्कत का सामना करना पड़  रहा है लेकिन हम केंद्र सरकार से यूरिया का कोटा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा अगर किसानों की सच्ची हितैषी है तो केंद्र सरकार पर दबाव बनाये और प्रदेश की मांग अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करवाए.
खाद वितरण के कार्य को प्राथमिकता से लें अधिकारी
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जनअधिकार कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिलों के कलेक्टर और शिकायतकर्ताओं की शिकायतों को बगैर निराकरण किए हुए बंद करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान की जवाबदेही निचले स्तर से नहीं बल्कि उच्च स्तर पर तय की जाए. उन्होंने जिला कलेक्टरों से कहा कि खाद वितरण के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता पर ले. पर्याप्त उपलब्धता पर ध्यान रखें और इसकी कालाबाजारी न हो यह सुनिश्चित करें.मुख्यमंत्री ने निजी खाद विक्रेताओं द्वारा किसानों को महंगी दर पर खाद विक्रय न कर इसकी भी निगरानी की जाए. उन्होंने कहा कि मिलावटी खाद बाजार में नहीं बिकना चाहिए. यह सुनिश्चित करें कि खाद को लेकर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो.

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