मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की विधायक राम बाई पर बसपा द्वारा की गई निलंबन की कार्रवाई के बाद भाजपा रामबाई के समर्थन में उतर आई है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बसपा द्वारा की गई कार्रवाई को अनुचित बताया और कहा कि रामबाई ने संविधान का समर्थन किया है.
मध्यप्रदेश में पथरिया से बसपा की विधायक रामबाई के निलंबन के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. बसपा की प्रदेश इकाई तो मौन है और इसे बसपा प्रमुख मायावती द्वारा की गई कार्रवाई बताते हुए कहा रही है कि जो कार्रवाई की गई वह उचित है. विधायक ने पार्टी लाईन का उल्लंघन किया है. वहीं रामबाई के समर्थन में भाजपा मैदान में उतर आई है. भाजपा के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि बसपा ने जो कार्रवाई की है, वह अनुचित है. उन्होंने कहा कि विधायक रामबाई ने संविधान का समर्थन किया है. मिश्रा ने कहा कि सीएए कानून जो आज कानून का दर्जा प्राप्त कर चुका है, ऐसे कानून का रामबाई ने समर्थन किया है. उनके द्वारा समर्थन किए जाने की उन्हें बसपा द्वारा यह सजा मिली है. मिश्रा ने कहा कि यह कार्रवाई अनुचित है. मिश्रा ने कहा कि मुझे तो ऐसी पार्टी और पार्टी की विचारधारा पर तरस आ रहा है. मैं मानता हूं पार्टी से ऊपर देश होता है और राष्ट्र होता है.
वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि बसपा प्रमुख मायावती द्वारा विधायक रामबाई पर की गई निलंबन की कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि मायावती के इस कदम की जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है. शर्मा ने कहा कि इस कानून को लेकर जैसे-जैसे लोगों और नेताओं में सार्थक उद्देश्य समझ आ रहा है, वे इसके समर्थन में आ रहे हैं.
विधायकी पर उठने लगे सवाल
निलंबन की कार्रवाई के बाद रामबाई की विधायकी पर सवाल उठने लगे हैं. वैसे जानकारों का कहना है कि इस मामले को लेकर रामबाई के सामने विधायकी को लेकर संकट नहीं है. वे विधानसभा में असंबद्ध सदस्य कहलाएंगी.इसके पीछे जानकारों का तर्क है कि जिस मामले को लेकर उन पर निलंबन की कार्रवाई हुई है, वह विधानसभा के भीतर का मामला नहीं है और न ही उन्होंने पार्टी व्हीप का उल्लंघन किया है. इस वजह से उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं है.
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