बुधवार, 18 अप्रैल 2018

समयानुकूल शिक्षा-शिक्षण के लिए शोध कार्य जरुरी


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संस्कारवान और समयानुकूल शिक्षा-शिक्षण के लिए शोध कार्य आवश्यक है. शिक्षा के उद्देश्यों, ज्ञान, कौशल और नागरिक संस्कार देने के लिए निरंतर अनुसंधान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक शिक्षा के साथ व्यवहारिक शिक्षा भी जरूरी है. आजीविका को भी शिक्षा से जोड़ने के प्रयास समय की जरूरत है. चौहान आज विद्या भारती मध्यक्षेत्र के प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान और आजीविका का माध्यम नहीं है. संस्कारवान नागरिक तैयार करना भी शिक्षा की जिम्मेदारी है. अपने लिए नहीं, देश के लिए जीने वाले संस्कारयुक्त नागरिकों को तैयार करने में विद्या भारती के प्रयासों का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में भी विद्या भारती के संस्थान अच्छी शिक्षा देते हैं. संस्थान के विद्यालयों, शिक्षा की गुणवत्ता की सराहना करते हुए  चौहान ने कहा कि विद्या भारती, समाज धारित और पोषित संस्थान है. सहयोग में मात्रा नहीं, श्रद्धा और सहयोग भाव महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने रामचरित्र मानस के प्रसंग के उल्लेख में बताया कि सेतु बांध के निर्माण में महावीर वानरों के साथ ही रेत के कुछ कण लाने वाली गिलहरी के सहयोग को भी भगवान श्रीराम ने बहुत महत्वपूर्ण बताया है.
राष्ट्रीय अध्यक्ष, विद्या भारती शिक्षा संस्थान गोविंद शर्मा ने कहा कि विद्या भारती हर क्षेत्र के पहुंच और साधन विहीन क्षेत्रों में उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा देने का कार्य कर रही है. अगले शिक्षा सत्र से महाविद्यालयीन शिक्षा का कार्य भी संस्थान द्वारा प्रारंभ किया जाएगा. राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में विद्या भारती संस्थान के खिलाड़ी विद्यार्थियों ने 50 स्वर्ण पदक सहित 150 पदक जीते हैं. विद्या भारती को सर्वाधिक अनुशासित टीम का पदक भी प्राप्त हुआ है. कार्यक्रम में बताया गया कि शोध केन्द्र के निर्माण पर 3.5 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है. कुल 24 हजार वर्ग फिट में बनने वाले इस बहुमंजिला भवन में 12 आवासीय-कक्ष, 2 सभा-कक्ष, भोजन-कक्ष, पुस्तकालय सहित शिक्षण-प्रशिक्षण केन्द्र की सभी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी.

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