बोली की जगह गोली की नीति कांग्रेस को मंजूर नहीं है. दलितों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए.
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह एस.सी.एस.सी एक्ट में छेड़छाड़ की गई. कांग्रेस एस.एस.सी एक्ट को लेकर आए फैसले को लेकर जो आंदोलन किया जा रहा है, उससे हमारी अपील है कि शांति बनाए रखे और बातचीत का रास्ता अख्तियार करें. वंचित तबके में असुरक्षा की भावना स्वभाविक है. आपने कहा कि बंद के दौरान भिंड़ और मुरैना जैसे इलाकों अशांति की आशंका के बाद भी वहां सुरक्षा के प्रबंध वहीं किए गए. भाजपा और उसकी सरकारों में आंदोलनकारियों से संवाद में कोई रूचि नही है. इस कारण हिंसा भड़ की है. लोकतंत्र में हम हिंसा का समर्थन नहीं करते. लेकिन सरकार को भी अपनी जवाबदारी समझना चाहिए.
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहाकि हाल ही में सी बी एस सी समेत उच्च परीक्षाओं के पर्चे लीक होंने न सरकार की विफलता को साबित किया है. यह पर्चे व्यापम कांड़ की तरह ही हैं. प्रियंका ने कहाकि महाराष्ट् में पुना के पास भीमा कोरेगांव की घटना के उपरांत हम सब जानते हैं कि संवेदनशील मसलों पर किस तरह से सामाजिक रोष उत्पन्न होता है. वंचित तबके में असुरक्षा की भावना स्वाभाविक है और यह सब जानते हुए भी पुन: राष्ट्व्यापी बंद के दौरान समुचित तैयारी का अभाव,दलित संगठनों का निरंतर अपमान कर उनसे संवाद स्थापित करने में भारतीय जनता पार्टी की निरंतर अरूचि और एससीएसटी एक्ट में बदलाव के लिए भारतीय जनता पार्टी का परोक्ष समर्थन इस हिंसा के लिए उत्तरदायी है. वास्तव में सात दशकों से चले आ रहे सामाजिक सदभाव को भारतीय जनताह पार्टी की केंद्र सरकार की दुर्भाग्यपूर्ण भूििमका के कारण धक्का लगा है. आपने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है. जिस तरह से सार्वजनिक संपत्ति और आम लोगों की जान-माल का नुकसान किसी भी आंदोलन में नही होना चाहिए उसी तरह से दलित वर्ग की आंकाक्षाओं को कुचलना और उनकी वाजिब मांगों का जवाब डंडे और गोली से देना भी नितांत अलोकतांत्रिक है. कांग्रेस पार्टी सरकार से आंदोलनकारियों की पीड़ा को समझने आंदोलन दबाने के लिए डंडे और गोली की नीति छोड़ ने और सत्ता का अहंकार छोड़ कर वार्ता के माध्यम से दलित संगठनों का विश्वास अर्जित करने का अनुरोध करती है.
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह एस.सी.एस.सी एक्ट में छेड़छाड़ की गई. कांग्रेस एस.एस.सी एक्ट को लेकर आए फैसले को लेकर जो आंदोलन किया जा रहा है, उससे हमारी अपील है कि शांति बनाए रखे और बातचीत का रास्ता अख्तियार करें. वंचित तबके में असुरक्षा की भावना स्वभाविक है. आपने कहा कि बंद के दौरान भिंड़ और मुरैना जैसे इलाकों अशांति की आशंका के बाद भी वहां सुरक्षा के प्रबंध वहीं किए गए. भाजपा और उसकी सरकारों में आंदोलनकारियों से संवाद में कोई रूचि नही है. इस कारण हिंसा भड़ की है. लोकतंत्र में हम हिंसा का समर्थन नहीं करते. लेकिन सरकार को भी अपनी जवाबदारी समझना चाहिए.
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहाकि हाल ही में सी बी एस सी समेत उच्च परीक्षाओं के पर्चे लीक होंने न सरकार की विफलता को साबित किया है. यह पर्चे व्यापम कांड़ की तरह ही हैं. प्रियंका ने कहाकि महाराष्ट् में पुना के पास भीमा कोरेगांव की घटना के उपरांत हम सब जानते हैं कि संवेदनशील मसलों पर किस तरह से सामाजिक रोष उत्पन्न होता है. वंचित तबके में असुरक्षा की भावना स्वाभाविक है और यह सब जानते हुए भी पुन: राष्ट्व्यापी बंद के दौरान समुचित तैयारी का अभाव,दलित संगठनों का निरंतर अपमान कर उनसे संवाद स्थापित करने में भारतीय जनता पार्टी की निरंतर अरूचि और एससीएसटी एक्ट में बदलाव के लिए भारतीय जनता पार्टी का परोक्ष समर्थन इस हिंसा के लिए उत्तरदायी है. वास्तव में सात दशकों से चले आ रहे सामाजिक सदभाव को भारतीय जनताह पार्टी की केंद्र सरकार की दुर्भाग्यपूर्ण भूििमका के कारण धक्का लगा है. आपने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है. जिस तरह से सार्वजनिक संपत्ति और आम लोगों की जान-माल का नुकसान किसी भी आंदोलन में नही होना चाहिए उसी तरह से दलित वर्ग की आंकाक्षाओं को कुचलना और उनकी वाजिब मांगों का जवाब डंडे और गोली से देना भी नितांत अलोकतांत्रिक है. कांग्रेस पार्टी सरकार से आंदोलनकारियों की पीड़ा को समझने आंदोलन दबाने के लिए डंडे और गोली की नीति छोड़ ने और सत्ता का अहंकार छोड़ कर वार्ता के माध्यम से दलित संगठनों का विश्वास अर्जित करने का अनुरोध करती है.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें