फेसबुक पर दोस्ती की फिर 80 बार लिए रुपए
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के एक एनजीओ संचालक ने दिल्ली की ला कालेज की छात्रा से फेसबुक पर दोस्ती कर खुद को एम्स का डाक्टर बताकर दोस्ती कर उससे 30 लाख रुपए एेंठ लिए. एनजीओ संचालक ने कभी पिताजी के तो कभी बहन के इलाज के लिए 80 बार में यह रुपए ऐंठे.
दिल्ली के ला कालेज की छात्रा से अजय गालर नामक युवक ने 2012 में फेसबुक के जरिए दोस्ती की. इसके बाद वे लगातार चैटिंग करते रहे. कुछ समय बाद चैटिंग बंद कर दी. बाद में 2017 में फिर अजय ने छात्रा के साथ चैटिंग शुरु की. इस दौरान उसने छात्रा से इस बात का जिक्र किया कि उसके पिताजी को ट्यूमर है और वह लंदन में भर्ती हैं. यह बात कर उसने छात्रा से कुछ रुपयों की मांग की. इसी तरह अजय ने कभी पिताजी और कभी बहन की बीमारी की बात बताकर छात्रा से 80 बार रुपए मांगे. छात्रा से वह करीब 30 लाख रुपए ऐंठ चुका था. इसके बाद उसने छात्रा से दूरी बनानी शुरु कर दी थी. इसके बाद छात्रा डिप्रेशन में चली गई. परिजनों ने जब उससे पूछताछ की तो उसने सारी घटना की जानकारी परिवार वालों को दी. बाद में उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत की.
दूसरे युवक की फोटो लगा रखी थी प्रोफाइल पर
छात्रा ने कभी भी अजय की तस्वीर नहीं देखी थी. अजय अपनी पहचान छीपाता था. अजय ने अपनी फेसबुक प्रोफ्राइल पर भी दूसरे युवक की फोटो लगाए रखी थी. अजय कभी भी छात्रा को वीडियो काल भी नहीं करता था, ताकि उसकी पहचान उजागर न हो. उसने अपने फोन में वायस चेंजर एप्लीकेशन डाउनलोड की थी, ताकि उसकी आवाज भी लोगों के पहचान में न आए.
इस तरह पकड़ा अजय को
छात्रा को कुछ समय बाद जब अजय पर आशंका हुई तो उसने फेसबुक प्रोफाइल पर जिस युवक को फोटो लगा था, उसकी तलाश शुरु की. बाद में उसे वह युवक मिल गया. छात्रा ने युवक से संपर्क किया तो उसने अजय के बारे में बताया. इसके बाद छात्रा ने अपने पिता और एक शिक्षक को अजय के घर भेजा, परंतु वहां जाकर उन्हें जो दिखा उससे वे परेशान हो गए. जो अजय एम्स का डाक्टर होने की बात कह रहा था, वह एक कच्चे मकान में रहता है. उसके पिताजी इटारसी में रहते हैं वह किसान है. अजय ने आरकेडीएफ कालेज से इंजीनियरिंग की डिग्री ली है ओर वह राजधानी में श्री हरी वेलफेयर सोसाइटी के नाम पर एक एनजीओ का संचालन करता है. यह जानकारी जब छात्रा को लगी तो उसने अजय को रंगे हाथों पकड़वाने का विचार किया. इसके बाद छात्रा भोपाल आई और उसने महाराणा प्रताप नगर क्षेत्र स्थित डीबी माल में अजय को बुलाया. अजय वहां जैसे ही पहुंचा छात्रा ने क्राइम ब्रांच को सूचना दी, जिन्होंने आकर अजय को गिरफ्तार कर लिया.
क्राइम ब्रांच ने जब अजय को गिरफ्तार किया तो वह पहले तो पुलिस को यह बोल कर धमकाने का प्रयास करता रहा कि यह आपसी लेनदेन का मामला है, आप तो मेरे खिलाफ कुछ नहीं कर सकते. इतना ही नही उसने कहा कि छात्रा ने जो रुपए दिए हैं, वे मेरे एनजीओ को दान के रुप में दिए हैं. पुलिस अजय से यह जानकारी हासिल करना चाह रही है कि कहीं उसने और भी लड़कियों को इस तरह फंसाया तो नहीं है.
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के एक एनजीओ संचालक ने दिल्ली की ला कालेज की छात्रा से फेसबुक पर दोस्ती कर खुद को एम्स का डाक्टर बताकर दोस्ती कर उससे 30 लाख रुपए एेंठ लिए. एनजीओ संचालक ने कभी पिताजी के तो कभी बहन के इलाज के लिए 80 बार में यह रुपए ऐंठे.
दिल्ली के ला कालेज की छात्रा से अजय गालर नामक युवक ने 2012 में फेसबुक के जरिए दोस्ती की. इसके बाद वे लगातार चैटिंग करते रहे. कुछ समय बाद चैटिंग बंद कर दी. बाद में 2017 में फिर अजय ने छात्रा के साथ चैटिंग शुरु की. इस दौरान उसने छात्रा से इस बात का जिक्र किया कि उसके पिताजी को ट्यूमर है और वह लंदन में भर्ती हैं. यह बात कर उसने छात्रा से कुछ रुपयों की मांग की. इसी तरह अजय ने कभी पिताजी और कभी बहन की बीमारी की बात बताकर छात्रा से 80 बार रुपए मांगे. छात्रा से वह करीब 30 लाख रुपए ऐंठ चुका था. इसके बाद उसने छात्रा से दूरी बनानी शुरु कर दी थी. इसके बाद छात्रा डिप्रेशन में चली गई. परिजनों ने जब उससे पूछताछ की तो उसने सारी घटना की जानकारी परिवार वालों को दी. बाद में उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत की.
दूसरे युवक की फोटो लगा रखी थी प्रोफाइल पर
छात्रा ने कभी भी अजय की तस्वीर नहीं देखी थी. अजय अपनी पहचान छीपाता था. अजय ने अपनी फेसबुक प्रोफ्राइल पर भी दूसरे युवक की फोटो लगाए रखी थी. अजय कभी भी छात्रा को वीडियो काल भी नहीं करता था, ताकि उसकी पहचान उजागर न हो. उसने अपने फोन में वायस चेंजर एप्लीकेशन डाउनलोड की थी, ताकि उसकी आवाज भी लोगों के पहचान में न आए.
इस तरह पकड़ा अजय को
छात्रा को कुछ समय बाद जब अजय पर आशंका हुई तो उसने फेसबुक प्रोफाइल पर जिस युवक को फोटो लगा था, उसकी तलाश शुरु की. बाद में उसे वह युवक मिल गया. छात्रा ने युवक से संपर्क किया तो उसने अजय के बारे में बताया. इसके बाद छात्रा ने अपने पिता और एक शिक्षक को अजय के घर भेजा, परंतु वहां जाकर उन्हें जो दिखा उससे वे परेशान हो गए. जो अजय एम्स का डाक्टर होने की बात कह रहा था, वह एक कच्चे मकान में रहता है. उसके पिताजी इटारसी में रहते हैं वह किसान है. अजय ने आरकेडीएफ कालेज से इंजीनियरिंग की डिग्री ली है ओर वह राजधानी में श्री हरी वेलफेयर सोसाइटी के नाम पर एक एनजीओ का संचालन करता है. यह जानकारी जब छात्रा को लगी तो उसने अजय को रंगे हाथों पकड़वाने का विचार किया. इसके बाद छात्रा भोपाल आई और उसने महाराणा प्रताप नगर क्षेत्र स्थित डीबी माल में अजय को बुलाया. अजय वहां जैसे ही पहुंचा छात्रा ने क्राइम ब्रांच को सूचना दी, जिन्होंने आकर अजय को गिरफ्तार कर लिया.
क्राइम ब्रांच ने जब अजय को गिरफ्तार किया तो वह पहले तो पुलिस को यह बोल कर धमकाने का प्रयास करता रहा कि यह आपसी लेनदेन का मामला है, आप तो मेरे खिलाफ कुछ नहीं कर सकते. इतना ही नही उसने कहा कि छात्रा ने जो रुपए दिए हैं, वे मेरे एनजीओ को दान के रुप में दिए हैं. पुलिस अजय से यह जानकारी हासिल करना चाह रही है कि कहीं उसने और भी लड़कियों को इस तरह फंसाया तो नहीं है.
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