सोमवार, 13 जनवरी 2020

कुर्सी पाने के लिए नेता अपनाते हैं कूटनीति: सिंधिया


कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कुर्सी पाने के लिए नेता कूटनीति अपनाते हैं, कुर्सी को ठुकराना बेहद मुश्किल होता है, सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. उन्होंने कहा कि मैं कभी भी कुर्सी के लिए पीछे नहीं भागा और ना ही वे ऐसा करेंगे.
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान के  कई सियासी मायने निकाले जा रहे है. सेवादल के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के समापन कार्यक्रम में पहुंचे सिंधिया ने कहा कि वो कुर्सी के पीछे ना तो कभी भागे है ना भागेंगे. सिंधिया ने कहा कि वो युवा है, लेकिन बुजर्गों जैसी बात कर रहे है. कुछ  देर बाद ही उन्होंने कहा कि वो बुजुर्ग हो चुके है, लेकिन ये कहने से नहीं चूके दो तरह के लोग होते है जो राजनीति करते है, कुछ जनसेवा को माध्यम बनाते है मगर कुछ लोगों के लिए राजनीति माध्यम होता है जनसेवा करने के लिए कुर्सी को ठुकराना बेहद मुश्किल होता है. उन्होंने कहा कि जनसेवा के रास्ते पर चलते हुए उन्हें 18 साल हो चुके हैं. आज कुर्सी पाने के लिए नेता कूटनीति अपनाते हैं, कुर्सी को ठुकराना बेहद मुश्किल है. सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. उन्होंने कहा कि मुझे कुर्सी का लालच नहीं रहा. राज्यसभा जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे किसी कुर्सी के लिए राजनीति नहीं करते हैं. सिंधिया ने दीपिका पादुकोण को बधाई देते हुए कहा है कि उन्होंने सत्य का साथ दिया है. इस माहौल में अपनी आवाज उठाना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि वे फिल्म छपाक देखेंगे.
गौरतलब है कि कांग्रेस कमेटी का प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा सस्पेंस बरकरार है. पिछले लंबे समय से  ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रबल दावेदार कहा जा रहा है उनके समर्थक भी उन्हें पीसीसी चीफ के लिए लॉबिंग करते नजर आते है. इन्हीं सब सियासी उठापटक के बीच सिंधिया के बयान के  सियासी मायने निकाले जा रहे है. हालांकि सिंधिया से पूछा तो उन्होंने कहा कि ना तो वो राज्यसभा जा रहे है और ना ही वो किसी और पद के इच्छुक है

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