सोमवार, 27 जनवरी 2020

सांकेतिक रूप से फांसी के फंदे पर लटके अतिथि विद्वान

 कांग्रेस नेताओं ने किया मांगों का समर्थन

नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों ने  सांकेतिक रुप से फांसी के फंदे पर लटक कर विरोध प्रदर्शन किया. अतिथि विद्वानों के धरना प्रदर्शन पर पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने उनकी मांग का समर्थन किया और मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा करने का आश्वासन दिया.
राजधानी भोपाल स्थित यादगार ए शाहजहांनी पार्क में अपनी मांगों को लेकर अतिथि विद्वानों का धरना जारी है. अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी डा. जेपीएस चौहान एवं डा. आशीष पांडेय के अनुसार जहां 26 जनवरी राष्ट्रीय पर्व में सुअवसर पर सरकार कैदियों से भी अच्छा व्यवहार करके उनकी सजा कम करती है, किन्तु इस सरकार ने अतिथि विद्वानों के साथ अपराधियों से भी बदतर सलूक किया है. जो सजा कांग्रेस की सरकार ने अतिथि विद्वानों को दी है वह अमानवीय एवं असहनीय है. हम लगातार  इस पार्क में खुले आसमान तले समय काट रहे है, किन्तु अब तक मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं मंत्री जीतू पटवारी को हमारी दुर्दशा पर तरस नही आया है. लगता है नेता अतिथि विद्वानों की मृत्यु की प्रतीक्षा में है.  गणतंत्र दिवस की पावन बेला पर कई कांग्रेस नेता अतिथि विद्वानों के पंडाल में पहुंच कर अतिथि विद्वानों की मांगों का समर्थं किया. कांग्रेस नेताओं में प्रमुख रूप से फूल सिंह बरैया के अलावा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव जसवीर गुर्जर तथा सिद्धार्थ मोरे शामिल हैं.
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डा. सुरजीत भदौरिया ने बताया कि गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर शाहजहानी पार्क में अतिथि विद्वानों के पंडाल में  एनजीओ गांधीआलय विचार सेवा संघ के अध्यक्ष व समाजसेवी चंद्रशेखर सिंह राणा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया इसके पश्चात राष्ट्रगान व संविधान की उद्देशिका का वाचन किया गया. इस अवसर पर संघ के पदाधिकारी व लगभग 2 हजार  अतिथि विद्वानों ने उक्त कार्यक्रम में हिस्सा लिया.
शाहीन बाग की चर्चा लेकिन शाहजहांनी पार्क को भूली कांग्रेस
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता डा. मंसूर अली के अनुसार कांग्रेस पार्टी की ये अस्पष्ट नीति का ही परिणाम है कि आज देश मे शाहीन बाग के साथ-साथ मध्यप्रदेश के शाहजहानी पार्क की चर्चा है. कांग्रेस पार्टी को शाहीन बाग के लिए समय है, लेकिन शाहजहांनी पार्क को कांग्रेस पार्टी द्वारा भुला दिया गया है. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि संविधान रक्षा का नारा देने वाली पार्टी आज स्वयं अतिथि विद्वानों के अधिकारों और अपने कर्तव्यों को नजरअंदाज कर रही है. जबकि स्पष्ट रूप से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अतिथि विद्वानों को नियमित करने का वचन विधानसभा चुनाव पूर्व कांग्रेस के वचनपत्र में दिया था.

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