बुधवार, 15 जनवरी 2020

कांग्रेसी सोच के कारण महान विभूतियों का अपमान कर रहे कमलनाथ

शिवराज सिंह चौहान 

मध्यप्रदेश में रतलाम जिले के एक शासकीय स्कूल में वीर सावरकर की पुस्तक वितरित करने के मामले में प्राचार्य को निलंबित किए जाने की कार्रवाई को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेसी सोच के कारण महान विभूतियों का अपमान कर रहे हैं.
राज्य में एक बार फिर वीर सावरकर को लेकर भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला है. हाल ही में सेवादल के प्रशिक्षण शिविर के दौरान कांग्रेस सेवादल द्वारा प्रकाशित कर वितरित कराई किताब पर विवाद छिÞडा था, अब रतलाम जिले के एक शासकीय स्कूल में स्वयं सेवी संगठन द्वारा वीर सावरकर पर केन्द्रीत सामग्री वितरित किए जाने का मामला सामने आने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ट्वीट कर कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को संबोधित करते हुए लिखा कि आपको वीर सावरकर से इतनी घृणा है कि आपको उसने पूरी तरह से अंधा बना दिया है. कांग्रेसी सोच के कारण ही आप अपने ही देश की महान विभूतियों का अपमान कर रहे हैं. आपके इस कृत्य से प्रदेश शर्मसार हुआ है. उन्होंने लिखा कि यदि आपने देश की इस महान विभूति, स्वतंत्रता सेनानी, वीर सावरकर के बारे में पढ़ लिया होता तो आप ऐसा निकृष्टतम कृत्य ना करते. मैं वीर सावरकर जनहितार्थ समिति से आग्रह करता हूं कि एक कापी आपको भी भेजें, ताकि आप इस महान विभूति द्वारा राष्ट्र के लिए किये योगदान को जान सकें.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित और शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले प्राचार्य को निलंबित करने का समाचार सुनकर मन विचलित है. यह बेहद दुखद और निंदनीय भी है. उन्होंने कहा कि इस ओछी राजनीति की मैं कड़ी निंदा करता हूं और तत्काल प्राचार्य को बहाल करने की मांग करता हूं.
यह है मामला
रतलाम जिले के  मलवासा गांव के हाई स्कूल के छात्रों को एक एनजीओ के जरीए कापियां बांटी गई थी, जिस पर वीर सावरकर की फोटो और जीवन परिचय छपा हुआ था. इस मामले की शिकायत होने के बाद उज्जैन संभागायुक्त अजीत कुमार ने संस्था के प्राचार्य आर.एन.के. रावत को निलंबित कर दिया है. वहीं आरएनके रावत को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा देने के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिला हैं. प्राचार्य के निलंबन की कार्रवाई के बाद कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है. कर्मचारी संगठन लामबंद हो गए हैं और प्राचार्य का निलंबन बहाल न किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं.

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