सोमवार, 20 जनवरी 2020

अंग्रेजी शासन की याद दिलाती है राजगढ़ कलेक्टर की मनमानी

भाजपा ने कहा लोकतंत्र पर प्राणघातक हमला, हटाएं कलेक्टर को

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने राजगढ़ में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ हुई मारपीट की घटना को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को प्रदेश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या प्रशासन उन्हीं के इशारे पर ऐसी बर्बरता दिखा रहा है? अगर ऐसा नहीं है, मुख्यमंत्री तत्काल लोकतंत्र पर प्राणघातक हमला करने वाली कलेक्टर को हटाएं.
प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार और उसका प्रशासन जिस तरह से प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या पर आमादा है, वही कांग्रेस का असली स्वभाव है, जिसकी झलक देश की जनता आपातकाल के दौरान देख चुकी है. राजगढ़ की घटना से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार कांग्रेस को हमेशा चुभते रहे हैं और वह सिर्फ उन्हीं लोगों के प्रजातांत्रिक अधिकारों को मान्यता देती है, जो उसके वोटबैंक के दायरे में आते हैं. हैरानी की बात है कि इस प्रदेश में सीएए के विरोध में प्रदर्शन के लिए तो सरकार और उसका प्रशासन पूरा सहयोग करता है, उनके सारे गुनाह, पुलिस पर पथराव और तोड़फोड़ सब माफ. लेकिन अगर इस कानून के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना है, तो सरकार इसकी अनुमति नहीं देती. समर्थन में रैली निकालने वालों से दंगे पर उतारू भीड़ की तरह निपटा जाता है. लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जाता है.
भारत माता की जय का नारा कब से गुनाह हो गया?
प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने कहा कि आज देश और प्रदेश मुख्यमंत्री कमलनाथ से यह जानना चाहता है कि भारतमाता की जय बोलना क्या इतना बड़ा गुनाह हो गया है कि उसके लिए कार्यकर्ताओं को पीटा जाए? कानून और प्रशासन की किस किताब में ऐसा लिखा है? अधिकारियों को कहां इस तरह का प्रशिक्षण मिलता है?  सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्थिति पूरी तरह अराजक हो चुकी है और कमलनाथ सरकार अराजकता की सरकार बन कर रह गई है. प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन के अधिकारियों ने अपनी मर्जी से यह गुंडागर्दी और हिंसात्मक कार्रवाई की है, तो मुख्यमंत्री उनके खिलाफ तत्काल एकशन लें, कलेक्टर के खिलाफ एफआई दर्ज की जाए. अगर ऐसा नहीं होता है तो भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की जनता के साथ मिलकर अहिंसा की उस शक्ति के प्रदर्शन के लिए तैयार है, जिसने देश से अंग्रेजी सत्ता को उखाड़ फेंका था. सिंह ने कहा कि हम 24 जनवरी को होने वाले प्रदेशव्यापी आंदोलन में भी इस मुद्दे को शामिल करेंगे. 
सरकार दबा रही सीएए के समर्थन की आवाज
 नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में प्रदेश की जनता अलग-अलग जिलों में समर्थन रैलियां आयोजित कर रही है, लेकिन प्रशासन सरकार के दबाव में अनुमति न देकर भाजपा जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों पर लाठीचार्ज कर सीएए के समर्थन की आवाज को दबाने का काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि सीएए अब कानून के रूप में संविधान का अंग बन चुका है. सरकार इसको मध्यप्रदेश में लागू न करने की बात कर संविधान का अपमान कर रही है. 
शिवराज ने की निंदा
 पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जाहिर करते हुए एक ट्वीट में कहा था कि आज का दिन लोकतंत्र के सबसे काले दिनों में गिना जाएगा. आज राजगढ़ में डिप्टी कलेक्टर साहिबा ने जिस बेशर्मी से सीएए के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को लताड़ा, घसीटा और चांटे मारे, उसकी निंदा मैं शब्दों में नहीं कर सकता. क्या उन्हें प्रदर्शनकारियों को पीटने का आदेश मिला था? यही नहीं शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि'हम डेप्युटी कलेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे। यदि एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.'
दिग्विजय उतरे समर्थन में
कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश के राजगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की गुंडागर्दी सामने आ गई. महिला जिला कलेक्टर और महिला एसडीएम अधिकारियों को पीटा गया, बाल खींचे गए. महिला अधिकारियों की बहादुरी पर हमें गर्व है.  
सीमा लांघ गए नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा दिए बयान को लेकर कांग्रेस की मीडिया सेल की अध्यक्ष शोभा ओझा ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को डराने और धमकाने की अपनी निंदनीय कोशिश में भार्गव राजनीतिक व सामाजिक शुचिता और गरिमा की सभी सीमाएं लांघ गए हैं. नेता प्रतिपक्ष के इस अमर्यादित आचरण के पीछे सच्चाई तो यह है कि पिछले 15 सालों तक प्रदेश को लूटने के बाद, जब से सत्ता छिन गई है, भाजपा नेता बौखला गए हैं और वे इस बात को हजम नहीं कर पा रहे हैं कि व्यापमं, डंपर, मध्याह्न भोजन, सिंहस्थ, पौधारोपण, अवैध उत्खनन, ई-टेंडरिंग जैसे महाघोटालों का युग समाप्त हो गया है और अब विकास का एक नया दौर प्रारंभ हो चुका है.

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