
राजधानी भोपाल के यादगार ए शाहजहांनी पार्क में नियमितीकरण की मांग को लेकर पिछले एक महीने से धरना दे रहे अतिथि विद्वानों के पंडाल पर अज्ञात लोगों ने आग लगाने की कोशिश की, गनीमत ये रही कि आग ज्यादा फैलने से पहले ही उसे बुझा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. घटना के वक्त पंडाल में 100 से अधिक अतिथि विद्वान सो रहे थे.
मध्यप्रदेश के अतिथि विद्वानों द्वारा एक माह से ज्यादा समय से राजधानी भोपाल में नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर धरना दिया जा रहा है. रविवार देर रात धरना स्थल पर लगे उनके पंडाल में अज्ञात लोगों ने आग लगा दी. बताया जा रहा है कि आग कैरोसिन डालकर लगाई गई, इससे आग तेजी से भड़की और देखते ही देखते पंडाल का एक हिस्सा पूरी तरह से जल गया. घटना के वक्त पंडाल के अंदर 100 से अधिक अतिथि विद्वान सो रहे थे. विद्वानों ने समय रहते इसे देख लिया और सबने मशक्कत कर आग पर जल्दी ही काबू पा लिया.
अतिथि विद्वानों ने घटना को लेकर पुसिल में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. अतिथि विद्वानों का आरोप है कि सरकार इससे पहले हमें पिटवाने का काम कर रही थी, लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि पंडाल में पेट्रोल छिड़ककर मारने की साजिश रची जा रही है, जिसका हम विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि इस पंडाल में इतनी रात को सभी अतिथि विद्वान और उनका परिवार सो रहा था, अगर यह आग तेजी से पंडाल में भड़क जाती, तो लोगों की जान भी जा सकती थी. घटना की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.
भाजपा ने सरकार पर बोला हमला
अतिथि विद्वानों के पंडाल पर आग लगाए जाने की घटना को लेकर भाजपा ने सरकार पर हमाला बोला है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि रविवार देर रात धरना स्थल पर लगे उनके पंडाल में अज्ञात लोगों ने आग लगा दी. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर भोपाल में पिछले 35 दिनों से इस सर्द मौसम में धरने पर बैठे अतिथि विद्वान के पंडाल में आग लगा दी गयी, ताकि इनकी आवाज को दबाया जा सके. प्रदेश में जायज मांगो ओर हक के लिए लड़ना भी अब शायद अपराध है. उन्होंने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच करवाएं. पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने कहा जब सभी कोशिशों के बाद भी अतिथि शिक्षक नहीं हटे तो आग लगाकर जिंदा जलाने का प्रयास किया गया. इस पूरे मामले में पूर्व मंत्री ने उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है. उन्होंने कहा कि जब तक अतिथि विद्वान धरने पर बैठे हैं उन्हें राज्य सरकार मजबूत सुरक्षा दें.
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