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| उमंग सिंगार |
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षा में भील जाति को लेकर पूछे गए प्रश्न पर राज्य के वन मंत्री उमंग सिंगार ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने इस मामले में एससी/ एसटी एक्ट के तहत मुकादमा दर्ज करने की मांग की है.
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भील जाति को लेकर पूछे गए सवाल का विवाद बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह, भाजपा विधायक राम दांगोरे द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब राज्य के वन मंत्री उमंग सिंगार ने इस मामले में सवाल खड़े करते हुए मांग की है कि इस पूरे मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत दोषियों पर मुकादम दर्ज किया जाना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर ट्वीट कर कहा की लोक सेवा द्वारा भील समुदाय को अपराधी बताना गलत है, जिस समुदाय से टंटया भील जैसे वीर आते हैं, उस समुदाय के लिए इस तरह की टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक है. सिंघार ने कहा की मैंने जीवन भर आदिवासी समुदाय, भील जनजाति व सभी जनजातियों का बेहद सम्मान किया है, आदर किया है. मैंने इस वर्ग के उत्थान व हित के लिए जीवन पर्यन्त कई कार्य किये हैं. मेरी सरकार भी इस वर्ग के उत्थान व भलाई के लिए निरंतर कार्य कर रही है व करती रहेगा.
गौरतलब है कि लोक सेवा आयोग द्वारे रविवार को ली गई परीक्षा में पूछे गए एक सवाल में भील समुदाय को शराब में डूबी हुई जनजाति भी बताया है, जिसे लेकर भाजपा नेताओं ने सरकार को घेरा है. मामले ने जब तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं. साथ ही उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही है.
प्रश्न सामने आने पर ही पता चलती है गलती
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| जीतू पटवारी |
पीएससी के प्रश्नपत्र में भील समाज को अपराधी बताने पर जीतू पटवारी का कहना है कि जो प्रश्न सामने आया उसे लेकर एग्जाम कंट्रोलर को एडवाइजरी जारी की है और एडवाइजरी में प्रश्न बनाने वालों से अनुरोध किया गया है कि भारतीय संस्कृति का ख्याल रखें. पेपर बनाने वाले विद्वान होते हैं, अगर इस तरह के सवाल पूछे जाएंगे, तो विद्वानों पर सवाल उठेगा. वहीं उन्होंने कहा कि जब प्रश्नपत्र बनते हैं, तो ये पूरी तरह से गोपनीय होता है, इसलिए सवाल सामने आने के बाद ही गलतियां पता चलती है. इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई करने की बात भी कही है.


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