बुधवार, 8 जनवरी 2020

संघ, भाजपा मुक्त भारत की कल्पना कांग्रेसजनों में नहीं

 लोकतांत्रिक व्यवस्था में होना चाहिए आस्था

राजधानी के उपनगर बैरागढ़ के आकाश पिकनिक हाट में अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय विशारद प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेसजनों की सोच में आरएसएस और भाजपा मुक्त भारत की कल्पना नहीं, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था होना चाहिए.
कांग्रेस सेवादल के प्रशिक्षण शिविर में सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई ने समानता की पे्रक्टिकल क्लास में बताया कि हमें लिंग, वेश, धर्म, जाति, सम्प्रदाय आदि असमानता को दूर करके सम्पूर्ण राष्ट्र में समतामूलक समाज के द्वारा विकास कैसे संभव है. उन्होंने अमित-मोदी भाई भाई, सारे देश में आग लगाई जैसे नारों से शिविरार्थियों में जोश भरा. शिविरार्थियों  को संबोधित करते हुए डा. सुरेश शर्मा ने बताया कि कांग्रेस के लिए भारत माता से आशय पेड़, पहाड़, नदियोंं के साथ-साथ पूरे भारत में निवास करने वाले हर धर्म जाति सम्प्रदाय के निवासी भी भारतमाता है. यहां पर हर व्यक्ति को सामाजिक रूप  से न्याय के रूप में एक जैसा स्वरूप की अनुभूति होती है यही कांग्रेस का धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत है.
शिविर में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेसजन अपनी विचाराधारा को पहचाने. कांग्रेसजनों की सोच में आरएसएस और भाजपा मुक्त भारत की कल्पना नहीं, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था होना चाहिए. हमारी आईडोलाजी में समाजवाद, गांधीवाद नेहरूवाद विचारधारा का समावेश होना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ही आज तक महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए है, राजीव गांधी ने ही महिलाओं को पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण प्रदान किया जिस कारण पंचायतों में करीब 14 लाख महिलाएं चुनकर अपना योगदान दे रही  है.
शिविर में वैज्ञानिक गौहर राजा ने शिविरार्थियों को संबोधित हुए वैज्ञानिक तरीके से सृष्टि विकास से अपनी बात प्रारंभ कर, पूरे तारामंडल ब्रम्हाण्ड का बिंब बनाते हुए शिविरार्थियों को मानव विकास प्रक्रिया का सिद्वांत समझाया. उन्होंने कहा कि यह समाज जाति धर्म लिंग अनुपात से लेकर सबको समान देखता है और हमने देश की आजादी के पहले एक सपना देखा था कि हमारा देश एक ऐसा देश हो जो धर्मनिरपेक्ष हो जिसमें सबको समान अधिकार हो, जिसमें अमीर गरीब का कोई भेदभाव न हो. गांधी और नेहरू का जो पूर्ण स्वराज का सपना था उसमें एक ऐसा स्वराज जो आर्थिक रूप से स्वाभिमानी हो वैसा ही दुनिया का सबसे खूबसूरत संविधान बाबा साहब आंबेडकर के नेतृत्व में बना और उस पर 6 सौ लोगों ने हस्ताक्षर किए. उस समय भी और आजादी के पूर्व भी ऐसी ताकते इस देश में मौजूद थी जो ऐसा समाज नहीं चाहती थी. उनकी सोच एक पूूंजीवादी समाज की रही जो देश को बांटना चाहती थी और देश के संविधान से इत्तेफाक नहीं रखते थे. अब ऐसा संविधान कभी नहीं बन सकता. आरएसएस का इतिहास है कि उसने इस देश के संविधान को जलाया और इस देश के झण्डे को भी जलाया. आज मोदी और अमित शाह की जोड़ी इस पुराने संविधान को बदलकर उसे तोड़ना चाहती है.

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