क्या बदहाल योजनाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ेगी सरकार
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में 6 बच्चों की मौत पर राजनीति तेज हो गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बच्चों की मौत के आंगड़े गिना कर एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस ने भाजपा पर संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. वहीं भाजपा ने स्वास्थ्य योजनाओं की बदहाली को लेकर योजनाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ने की बात कही है.
शहडोल में बीते दिनों शासकीय अस्पताल में 6 बच्चों की मौत हो गई. इस घटना को लेकर सरकार ने गंभीरता भी दिखाई और सीएमएसओ एवं सिविल सर्जन को हटाने के निर्देश भी दिए हैं. वहीं घटना को लेकर राजनीति भी तेज हो चली है. कांग्रेस-भाजपा दोनों ही एक दूसरे पर आरोप लगाने से नहीं बच रह हैं. कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने इसे लेकर भाजपा पर संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.
सलूजा ने कहा कि घटना को लेकर सरकार गंभीर है. भाजपा निरंतर इस पर राजनीति कर रही है, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से लेकर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव इस मुद्दे पर बयानबाजी कर सरकार को कोस रहे हैं तो उन्हें पहले अपनी सरकार के समय की ऐसी घटनाओं के आंकड़े देख लेना चाहिए फिर ऐसे मुद्दों पर राजनीति करना चाहिए. सलूजा ने बताया कि शिवराज सरकार के समय उस समय की प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने खुद तत्कालीन विधायक रामनिवास रावत के एक प्रश्न के जवाब में स्वीकारा था कि मध्यप्रदेश में हर दिन 74.45 बच्चों की मौत होती है, प्रति घंटा 3 से ज्यादा बच्चों की मौत कुपोषण व बीमारियों के चलते होती है. 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2017 के 396 दिनों में 29410 बच्चों की मौत हुई थी, यह खुद महिला बाल विकास मंत्री ने विधानसभा में स्वीकारा था. एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने यह भी स्वीकारा था कि मध्य प्रदेश की राजधानी में इन 396 दिनों में 1704 बच्चों की मौत हुई थी.
कमलनाथ सरकार में राजधानी में हुई 79 नवजातों की मौत
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने घटना को दुखद बताया और कहा कि प्रदेश की राजधानी के हमीदिया और जेपी अस्पताल में 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2019 के बीच में 952 नवजात की मौतें हुई हैं, जिसमें दिसंबर माह में ही 79 मौतें हुई है. सिंह ने कहा की मुख्यमंत्री कमलनाथ क्या प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के खिलाफ भी युद्ध छेड़ेंगे, जो अब जानलेवा बनती जा रही है? क्या वे ऐसा ही युद्ध अपने असंवेदनशील डाक्टरों, अफसरों और मंत्रियों के खिलाफ भी छेड़ेंगे? उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस को एक साल से ज्यादा सत्ता में आए हुए हो गए, परंतु प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर हो गई हैं. ना तो प्रदेश के गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ और ना ही सरकारी अस्पतालों में उनके उपचार की पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं. कहीं दवाएं नहीं हैं, कहीं डाक्टर नहीं है, तो कहीं डाक्टरों एवं स्टाफ की लापरवाही जानलेवा हो रही है.
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में 6 बच्चों की मौत पर राजनीति तेज हो गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बच्चों की मौत के आंगड़े गिना कर एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस ने भाजपा पर संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. वहीं भाजपा ने स्वास्थ्य योजनाओं की बदहाली को लेकर योजनाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ने की बात कही है.
शहडोल में बीते दिनों शासकीय अस्पताल में 6 बच्चों की मौत हो गई. इस घटना को लेकर सरकार ने गंभीरता भी दिखाई और सीएमएसओ एवं सिविल सर्जन को हटाने के निर्देश भी दिए हैं. वहीं घटना को लेकर राजनीति भी तेज हो चली है. कांग्रेस-भाजपा दोनों ही एक दूसरे पर आरोप लगाने से नहीं बच रह हैं. कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने इसे लेकर भाजपा पर संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.
सलूजा ने कहा कि घटना को लेकर सरकार गंभीर है. भाजपा निरंतर इस पर राजनीति कर रही है, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से लेकर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव इस मुद्दे पर बयानबाजी कर सरकार को कोस रहे हैं तो उन्हें पहले अपनी सरकार के समय की ऐसी घटनाओं के आंकड़े देख लेना चाहिए फिर ऐसे मुद्दों पर राजनीति करना चाहिए. सलूजा ने बताया कि शिवराज सरकार के समय उस समय की प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने खुद तत्कालीन विधायक रामनिवास रावत के एक प्रश्न के जवाब में स्वीकारा था कि मध्यप्रदेश में हर दिन 74.45 बच्चों की मौत होती है, प्रति घंटा 3 से ज्यादा बच्चों की मौत कुपोषण व बीमारियों के चलते होती है. 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2017 के 396 दिनों में 29410 बच्चों की मौत हुई थी, यह खुद महिला बाल विकास मंत्री ने विधानसभा में स्वीकारा था. एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने यह भी स्वीकारा था कि मध्य प्रदेश की राजधानी में इन 396 दिनों में 1704 बच्चों की मौत हुई थी.
कमलनाथ सरकार में राजधानी में हुई 79 नवजातों की मौत
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| राकेश सिंह |
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने घटना को दुखद बताया और कहा कि प्रदेश की राजधानी के हमीदिया और जेपी अस्पताल में 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2019 के बीच में 952 नवजात की मौतें हुई हैं, जिसमें दिसंबर माह में ही 79 मौतें हुई है. सिंह ने कहा की मुख्यमंत्री कमलनाथ क्या प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के खिलाफ भी युद्ध छेड़ेंगे, जो अब जानलेवा बनती जा रही है? क्या वे ऐसा ही युद्ध अपने असंवेदनशील डाक्टरों, अफसरों और मंत्रियों के खिलाफ भी छेड़ेंगे? उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस को एक साल से ज्यादा सत्ता में आए हुए हो गए, परंतु प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर हो गई हैं. ना तो प्रदेश के गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ और ना ही सरकारी अस्पतालों में उनके उपचार की पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं. कहीं दवाएं नहीं हैं, कहीं डाक्टर नहीं है, तो कहीं डाक्टरों एवं स्टाफ की लापरवाही जानलेवा हो रही है.

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