भाजपा ने कहा आदिवासी समाज का अपमान, लक्ष्मण सिंह ने फिर घेरा सरकार कोमध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा क प्रश्न पत्र में भील जनजाति को लेकर पूछे गए सवालों के बाद राज्य में बवाल मच गया है. भाजपा ने इसे आदिवासी समाज का अपमान बताया है, तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई विधायक लक्ष्मण सिंह ने फिर सरकार को घेरते हुए मांग की है कि इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को माफी मांगनी चाहिए.
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के प्रश्न पत्र में पूछे गए सवाल को लेकर घमासान मच गया है. पेपल में भील जनजाति को लेकर पूछे गए सवाल को भाजपा ने आपत्तिजनक माना और इसे आदिवासी समाज का अपमान बताया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई विधायक लक्ष्मण सिंह एक बार फिर सरकार के खिलाफ मुखर हुए हैं. उन्होंने टष्ट्वीट कर मुख्यमंत्री कमलनाथ को माफी मांगने की बात कही है. लक्ष्मण सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ‘भील समाज पर प्रदेश शासन के प्रकाशन की अशोभनीय टिप्पणी से आहत हूं. अधिकारी को तो सजा मिलना ही चाहि, परंतु मुख्यमंत्री को भी सदन में खेद व्यक्त करना चाहिए. आखिर वह प्रदेश के मुख्यमंत्री है, इससे अच्छा संदेश जाएगा’. यह कोई पहला अवसर नहीं है, जब लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही सरकार को घेरा है. इसके पहले भी वे कई मुद्दों पर सरकार को घेरते नजर आए हैं.
भील जनजाति को लेकर दिया गया था गद्यांश
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भील जनजाति को लेकर एक गद्यांश दिया गया था इसके आधार पर कई सवाल पूछे गए थे. गद्यांश के आधार पर प्रश्न पूछा गया और बताया गया कि भील जनजाति शराब के अथाह सागर में डूबती जा रही है. समाज के लोग गैर वैधानिक और अनैतिक कामों में संलिप्त हो जाते हैं. भीलों की आपराधिक प्रवृत्ति का कारण देनदारियों को पूरा न करना है. भील की आर्थिक विपन्नता का कारण आय से अधिक खर्च करना है.
भाजपा विधायक ने कहा दर्ज करें मुकदमा
भाजपा के विधायक राम दांगोरे ने इसे समुदाय का अपमान बताते हुए पेपर तैयार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. साथ ही कहा है कि पेपर तैयार करने वाले को बर्खाश्त किया जाए. इसके अलावा उनके खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार क्या करने की कोशिश कर रही है? दांगोरे भील जनजाति से आते हैं और वह परीक्षा में उम्मीदवार भी थे. एमपीपीएससी परीक्षा पूरे राज्यभर में 12 जनवरी को हुई थी. खंडवा केंद्र में परीक्षा में शामिल हुए राम दांगोरे ने बताया, कि प्रश्नपत्र में एक अनसीन पैसेज (अपठित गद्यांश) आया था, जिसमें भील जनजाति को आपराधिक और शराबी बताया गया. इस पर दांगोरे ने आपत्ति जताई है. वहीं आरटीआई एक्टिविस्ट डा. आनंद राय ने ट्वीट कर कहा कि एट्रोसिटी एक्ट के तहत लोक सेवा आयोग की सचिव रेणु पंत और लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के वि रुद्ध नामजद एफआईआर की जाए,इन मनुवादियो को तत्काल बर्खास्त किया जाए. इन दोनों मनुवादियो की नियुक्ति भाजपा, आरएसएस द्वारा की गई थी.
आदिवासी समाज का अपमान
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने ट्वीट कर कहा कि आदिवासियों का देश की आजादी के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान है. ये हमारी संस्कृति के रक्षक हैं. मध्यप्रदेश पीएससी की परीक्षत्त के प्रश्नपत्र में भोले-भाले भीलों को आपराधिक प्रवृत्ति का बताया जाना शर्मनाक और आदिवासी समाज का अपमान है.
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