अजय विष्नोई को ग्वालियर, कविता पाटीदार को बदनावर का बनाया सह प्रभारी
उपचुनाव को लेकर भाजपा के लिए परेशानी खड़ी करने वाले असंतुश्ट नेताओं को साधने की कवायद अब तेज हो चली है। इसके चलते अब असंतुश्ट नेताओं को ही संगठन रूठे नेताओं को मनाने के काम में लगा रहा है। भाजपा ने लंबे समय से नाराज चल रहे अजय विष्नोई को ग्वालियर अंचल का सह प्रभारी बना का जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सिंधिया से नाराज चल रहे नेताओं को मनाएं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों के भाजपा में ष्षामिल होने के बाद से भाजपा के कई वरिश्ठ नेता और विधायक नाराज चल रहे हैं। संगठन ने कई बार मनाने की कोषिष की, मगर विफल रहा। नाराज नेताओं की नाराजगी बढ़ती गई। यहां तक की पिछले दिनों नाराज चल रहे पूर्व मंत्री दीपक जोषी ने तो अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर नाराजगी जताई और प्रदर्षन तक किया। बाद में मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान की समझाइष पर वे मान गए, हालांकि अब भी वे खुलकर सिंधिया समर्थक भाजपा के प्रत्याषी के पक्ष में मैदान में नजर नहीं आए है। वहीं जोषी समर्थक कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी अभी दूर होती नजर नहीं आ रही है। इसके अलावा ब्यावरा में भी भाजपा को विरोध का सामना करना पड़ा है। वैसे भाजपा को सबसे ज्यादा नाराज नेताओं के कारण ग्वालियर चंबल अंचल में परेषानी हो रही है। इस अंचल की सभी 16 सीटों पर सिंधिया समर्थक नेताओं से भाजपा के नेता और कार्यकर्ता नाराज चल रहे है।
सिंधिया समर्थकों से नाराज चल रहे नेताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए अब भाजपा ने नया तरीका निकाला है। जो वरिश्ठ नेता सिंधिया और उनके समर्थकों से नाराज चल रहे हैं, उन्हें भाजपा उनके क्षेत्रों में जिम्मेदारी दे रही है, ताकि वे संगठन द्वारा दी जिम्मेदारी को नकार न सकें और रूठे नेताओं की नाराजगी को दूर कर सकें। इसके चलते प्रदेष भाजपा अध्यक्ष विश्णुदत्त ष्षर्मा ने वरिष्ठ नेता अजय विश्नोई को ग्वालियर विधानसभा उपचुनाव के लिए सह प्रभारी बनाया गया है जबकि बदनावर सीट के लिए सह प्रभारी का पद कविता पाटीदार को दिया गया है।
गौरतलब है कि मंत्री अजय विश्नोई लगातार पार्टी और सरकार पर हमलावर थे। माना जा रहा था कि शिवराज कैबिनेट में उन्हें जगह मिल सकती है, लेकिन सिंधिया समर्थकों के वर्चस्व के चलते उन्हें कैबिनेट से बाहर होना पड़ा जिसके बाद विश्नोई लगातार पार्टी की कार्यषैली पर प्रश्न खड़ा कर रहे थे। अब विश्नोई को सहप्रभारी का पद देकर उन्हें और उनके जैसे वरिष्ठ एवं नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश की गई है।
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