गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

त्रिकोणीय समीकरण फायदा पहुंचा सकता है भाजपा को

बसपा प्रत्याषी कांग्रेस को पहुंचाएंगे नुकसान


मध्यप्रदेष में 28 सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव मंे ग्वालियर चंबल अंचल की 16 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जातीय समीकरण बैठाकर रणनीति बना रहे हैं। वहीं बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याषी मैदान में उतारने से भाजपा इसमें अपना फायदा देख रही है। वहीं कांग्रेस को नुकसान होने की बात भाजपा नेता कह रहे हैं। वहीं बसपा नेताओं का मानना है कि राजस्थान का बदला बसपा सुप्रीमों मायावती की नाराजगी भी कांग्रेस को भारी पड़ेगी। बसपा को ग्वालियर चंबल अंचल में लेना हैं।
उपचुनाव में 28 सीटों में से ग्वालियर चंबल की 16 सीटें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल महत्वपूर्ण मानकर चुनावी रणनीति बना रहे हैं। कांग्रेस इन सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने की तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है, तो सिंधिया की प्रतिश्ठा भी इन सीटों पर दांव पर लगी हुई है। सिंधिया के साथ पूरी भाजपा इस अंचल में पूरी ताकत के साथ लगी हुई है। हालांकि कई स्थानों पर सिंधिया समर्थकों को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। मगर मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर नाराज नेताओं को मनाने का काम कर रहे हैं।
 वहीं बहुजन समाज पार्टी ने  भी अंचल की सभी 16 सीटों पर प्रत्याषी मैदान में उतारने का फैसला कर कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। बसपा ने 8 सीटों पर तो प्रत्याषियों की घोशणा भी कर दी है। साथ ही कांग्रेस के वरिश्ठ नेता और पूर्व मंत्री महेन्द्र बौद्ध ने भी बसपा का दामन थाम लिया है। उन्हें भी बसपा अपना प्रत्याषी बनाएगी। बसपा इस अंचल की सभी सीटों पर पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर चुकी है। बसपा नेताओं का मानना है कि 10 सीटों पर उसके ऐसे प्रत्याषी होंगे जो मुकाबले को त्रिकोणीय बनाएंगे। इन सीटों पर कांग्रेस को नुकसान होगा। बसपा नेताओं का कहना है कि बसपा सुप्रीमो राजस्थान में उनके विधायकों को तोड़ने से कांग्रेस से नाराज चल रही हैं जिसके चलते वे विषेश रूप से उपचुनाव में रूची ले रही हैं।
बसपा के मैदान में होने से भाजपा नेता खुष
बसपा प्रत्याषियों के मैदान में होने से भाजपा नेता खुष नजर आ रहे है। विधानसभा चुनाव में इस अंचल में भाजपा को खासा नुकसान हुआ था, इसे देखते हुए भाजपा जातीय समीकरण बैठाकर चल रही है। वहीं स्थानीय अजा वर्ग के नेताओं को साध कर आगे बढ़ रही है। इसके चलते भाजपा को अब इस अंचल में कांग्रेस से ज्यादा सीटों पर जीत की उम्मीद है। वहीं कांग्रेस भी जातीय समीकरण बैठाकर ही रणनीति बना रही है, मगर उसके सामने अपने नेताओं की नाराजगी भी संकट बन रही है। 

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