शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

इमरती देवी की राह में बसपा बन सकती है रोड़ा

बना त्रिकोणीय मुकाबला, पहले की अपेक्षा ज्यादा करनी पड़ रही मेहनत


राज्य सभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक और डबरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याषी मंत्री इमरती देवी के लिए इस बार जीत की राह आसान नजर नहीं आ रही है। उनके लिए बसपा ने मुसीबत खड़ी कर दी है। बसपा ने यहां पर प्रत्याषी मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
तीन बार से लगातार विधायक बनती आ रही महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी के लिए उपचुनाव में राह आसान नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस ने यहां पर कांग्रेस नेता अषोक सिंह को कांग्रेस प्रत्याषी की जीत की जिम्मेदारी सौंपी है। अषोक सिंह, दिग्विजय सिंह समर्थक माने जाते हैं और उन्हीं के कहने पर प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने यहां पर कांग्रेस प्रत्याषी के रूप में सुरेष राजे को मैदान में उतारा है। सुरेष राजे वैसे भी इमरती देवी के समधी हैं, और बीते चुनाव में इमरती देवी के लिए उन्होंने खासा मेहनत की थी। हालांकि 2013 का चुनाव इमरती देवी  भाजपा प्रत्याशी सुरेश राजे के खिलाफ लड़ चुकी हैं। तब उन्होंने राजे को 33 हजार से अधिक वोटों के फासले से हरा दिया था। इस चुनाव तक सुरेष राजे, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खास समर्थक माने जाते थे।
मगर इस बार उपचुनाव में तस्वीर बदली नजर आ रही है।  कांग्रेस ने सिंधिया परिवार के विरोध की राजनीति करने वाले अशोक सिंह को राजे के जिताने की जिम्मेदारी सौंप रखी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि इमरती देवी के जाने से वोट ट्रांसफर नहीं होंगे और पार्टी प्रत्याशी एक बार फिर यहां से जीत दर्ज करेगा। जबकि इमरती देवी को राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का समर्थन मिलने से जीत की उम्मीद है। नरोत्तम मिश्रा डबरा से ही पहले चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं। डबरा सीट आरक्षित होने के कारण उन्होंने दतिया की ओर कूच किया था।
बसपा ने यहां पर संतोश गौड़ को प्रत्याषी को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। बसपा उम्मीदवार के मैदान में आने से इमरती देवी की चिंता बढ़ी है। कांग्रेस इस बात से खुष है कि वह अपना वोट बैंक बचाने के साथ साथ इमरती देवी की नाराजगी का फायदा उठा सकती है।

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