मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

डा शैजवार के मौन ने प्रभुराम की बढ़ाई मुसीबत

सांची में भाजपा कार्यकर्ता नहीं निकल रहे घरों से


मध्यप्रदेष के सांची विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार प्रभुराम चैधरी के लिए पूर्व मंत्री डा गौरीषंकर शैजवार का मौन परेषानी बन गया है।  डा ष्षैजवार के मौन के चलते भाजपा के कार्यकर्ता भी घरों से बाहर नहीं निकल  रहे हैं, जो निकले भी हैं, वे खुलकर प्रभुराम का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं।
मध्यप्रदेष में 28 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं, इनमें रायसेन जिले की सांची विधानसभा क्षेत्र भी ष्षामिल है। इस सीट पर भाजपा सिंधिया समर्थक डा प्रभुराम चैधरी को मैदान में उतारने का फैसला कर चुकी है। डा प्रभुराम पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में भी है, मगर उन्हें भाजपा का समर्थन नहीं मिल रहा है, वहीं कांग्रेस में उनके समर्थक रहे नेता और कार्यकर्ता बिकाउ कहकर नकार रहे हैं। इसके अलावा उनके सामने इस सीट पर बड़ी चुनौती है पूर्व मंत्री डा गौरीषंकर ष्षैजवार को मनाने की। वे चाहकर भी अब तक डा ष्षैजवार को नहीं मना पाए हैं, इस वजह से क्षेत्र में ष्षैजवार समर्थक कार्यकर्ता और नेता अपने घरों से प्रभुराम के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए नहीं निकले हैं।
 हालांकि भाजपा ने इस विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री रामपाल सिंह और सुरेन्द्र पटवा को जिम्मेदारी दी है। दोनों ही नेता लगातार प्रयास कर रहे हैं, मगर उन्हें भी सफलता नहंी मिली है। ये दोनों नेता अब तक डा गौरीषंकर षैजवार को नहीं मना पाए है। इसके चलते भाजपा की चिंता बढ़ गई है। भाजपा को अब इस बात की चिंता है कि समय रहते अगर डा ष्षैजवार नहीं माने और उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई तो पार्टी के लिए वे और उनके समर्थक मुसीबत बन सकते हैं।
गौरतलब है कि सांची विधानसभा क्षेत्र से डा गौरीषंकर बिसेन चुनाव लड़ते आए है। पिछल विधानसभा चुनाव में उन्होंने यहां से अपने बेटे मुदित ष्षैजवार को मैदान में उतारकर अपने विरासत सौंपने का प्रयास किया था। मगर मुदित को डा प्रभुराम चैधरी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि अब डा ष्षैजवार प्रभुराम चैधरी का साथ नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा उन्हें इस बात की चिंता है कि अगर एक बार प्रभुराम जीते तो उनका और उनके बेटे का राजनीतिक भविश्य चैपट हो जाएगा।
बेटों को खरी खरी सुना रहे ग्रामीण
डा प्रभुराम चैधरी के बेटों पर्व और रौनक ने पिता के लिए चुनाव की कमान संभाल रखी है। वे गांव गांव जाकर पिता के लिए वोट मांग रहे हैं, मगर उन्हें ग्रामीणों की नाराजगी का सामना भी करना पड़ रहा है। गांव में जाकर उनके बेटे लोगोंसे प्रभुराम को वोट देने की बात कहते हैं, तो ग्रामीण उनसे सवाल कर रहे हंै, आखिर ऐसी कौन सी मुसीबत आन पड़ी थी कि प्रभुराम ने पाला बदला और सरकार गिराने में सहायता की। यहां तक की उनके बेटे पर्व को एक ग्रामीण ने तो इतना तक कह दिया कि हम आपकों क्यों वोट दें, आपने पार्टी बदलकर ठीक नहीं किया। ग्रामीण और प्रभुराम के बेटे के बीच हुए इस संवाद का वीडियो भी क्षेत्र में खूब वायरल हो रहा है, जिसके चलते भाजपा के अलावा खुद डा प्रभुराम चौधरी की चिंता बढ़ गई है।

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