रविवार, 22 अप्रैल 2018

एक हेक्टयेर में 103 क्विंटल गेहूं की उपज की महिला कृषक ने


मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले की अरुणा जोशी ने एक हैक्टयेर खेती में 103 क्विंटल गेहूं का उत्पादन कर दिखाया. उनके इस कीर्तिमान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उन्हें पूसा इंस्टीट्यूट नईदिल्ली में  कृषि कर्मण अवार्ड से नवाजा.
जब कोई महिला यह ठान लेती है कि वह कोई भी काम करेगी तो उसे बेहतर से बेहतर ढंग से करेगी. इसी संकल्प को अपने मन में बैठाकर महिलाएं जो भी काम अपने हाथ में लेती हैं उसे अपनी मेहनत और जज्बे से उस कार्य को सफल कर के ही दम लेती हैं. महिलाएं जो कार्य हाथ में लेती है उसे श्रेष्ठ कर ही मानती हैं. इसी जज्बे को अपने मन में जगाकर होशंगाबाद जिले के पिपरिया विकासखंड के ग्राम पनारी की उन्नतशील महिला कृषक अरूणा जोशी ने उन्नत खेती कर और व्यक्तिगत तौर पर अपने एक हेक्टेयर खेत से अधिकतम 103 क्विंटल गेहूं उत्पादन कर दिखाया. कृषि के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान बनाने वाली अरूणा जोशी प्रदेश की एक मात्र ऐसी महिला है जिन्हें अपने व्यक्तिगत रिकार्ड गेहूं उत्पादन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूसा इंस्टीट्यूट नईदिल्ली में  कृषि कर्मण अवार्ड से नवाजा है. अरूणा जोशी प्रदेश की प्रथम ऐसी महिला है जिन्होंने अपनी जमीन पर औसतन क्राफ्ट कटिंग के आधार पर 103 क्विंटल गेहूं उत्पादन कर दिखाया. 
    अरूणा जोशी एक उन्नतशील महिला कृषक हैं जो अपने खेतो पर स्वयं खेती करती हैं. वे सहयोग के लिए  किसी पर भी आश्रित नही है. उन्होंने अपने 18.49 एकड़ जमीन पर 4 से 5 वेरायटी के गेहूं लगाए थे. उन्होंने 10-10 डिसमिल में अलग-अलग वेरायटी के बीज लगाए थे. क्राफ्ट कटिंग के आधार पर उनका औसतन उत्पादन प्रति हैक्टेयर 103 क्विंटल गेहूं आया. श्रीमती जोशी बताती हैं कि उन्हें शुरू से ही खेती में रूचि है इससे पहले वे गुड़ एवं रेशम का व्यवसाय कर चुकी हैं किन्तु उनकी रूचि हमेशा से ही कृषि में थी. उन्हें बागवानी का भी शोक है. पनारी में उन्होंने आम एवं अमरूद के बगीचे भी लगाएं हैं. अरूणा जोशी के व्यक्तिगत गेहूं उत्पादन के रिकार्ड के आधार पर वर्ष 2015-16 के लिए उन्हें प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने गत 17 मार्च को कृषि कर्मण अवार्ड प्रदान किया. यह अवार्ड उन्हें व्यक्तिगत उत्पादन की श्रेणी में मिला. अवार्ड के रूप में श्रीमती जोशी को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रमाण पत्र, 2 लाख का चेक एवं एक ट्राफी दी.  जोशी बताती हैं कि वे तो हमेशा से ही खेती करती रही हैं, उन्होंने कभी भी रिकार्ड के बारे में नही सोचा जब उन्होंने पुरस्कार मिलने की घोषणा की खबर सुनी  तो उन्हें विश्वास ही नही हुआ कि एक महिला को भी कृषि के क्षेत्र में अवार्ड मिल सकता है. वे बताती हैं कि पुरस्कार मिलने की उन्हें व्यक्तिगत तौर पर बहुत खुशी हुई अन्यथा वे तो भूल ही चुकी थी कि उनके खेतो में रिकार्ड गेहूं का उत्पादन हुआ है. वे भारत सरकार एवं कृषि विभाग को धन्यवाद देती है कि जिन्होंने एक महिला कृषक को अवार्ड प्रदान कर उन्हें और भी बेहतर कृषि के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रेरित किया.  अरूणा जोशी को पुरस्कार मिलने पर उनके ग्राम पनारी के बहुत से कृषक खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए प्रेरित हुए. अनेक युवाओं ने  जोशी से खेती करने के तरीके की जानकारी ली. विशेष तौर पर महिलाएं भी उनकी इस उपलब्धि से प्रेरित हुई है. आज भी अरूणा जोशी सभी लोगो को खेती करने के गुर की समझाईश देती हैं. श्रीमती अरूणा जोशी ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में गेहूं किस्म 322 का बीज डाला था जिससे बम्पर उत्पादन हुआ. वे कहती हैं कि उन्होंने अलग-अलग वेरायटी के बीज लगाए थे किन्तु 322 से सर्वाधिक उत्पादन हुआ. वे युवाओं को खेती की ओर लोटने का आव्हान करती है और कहती है कि यदि सही तरीके से खेती की जाए तो खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि उनसे जो भी किसान संपर्क करते हैं वे उन्हें खेती के टिप्स जरूर देती हैं. श्रीमती जोशी समाजसेवा एवं राजनीति में भी सक्रिय हैं. वे बताती हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा अवार्ड के रूप में जो दो लाख रूपए की राशि दी गई है उसमें से कुछ राशि वे मटकुली के आदिवासी छात्रावास एवं स्कूल में दान करेगी.

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