मध्यप्रदेश राजधानी भोपाल के अंडरग्राउंड वाटर में यूनियन कार्बाइड से निकले जहर के घुल जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि भोपाल के 22 प्रदूषित मौहल्लों के अलावा भूजल का प्रदूषण 20 और मोहल्लों में फैल गया है.
यह जानकारी भोपाल गैस पीड़ित संगठनों ने आज सोमवार को एक पत्रकार वार्ता के दौरान दी. भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले दिनों दिए गए आदेशों के मुताबिक इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ टॉक्सीकॉलिजिकल रिसर्च लखनऊ कल मंगलवार को शहर के 20 अतिरिक्त मौहल्लों के भूजल के नमूने इकट्ठे करने आ रही है. उन्होंने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को निर्देशित किया है कि वह इन 20 में से पांच मौहल्ले में इसी महीने के आखिर तक पाइपलाइन द्वारा साफ पानी पहुंचाए.
रशीदा बी ने आरोप लगाया है कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें जहर को पूरे शहर में फैल जाने का इंतजार कर रहीं है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पिछले 14 सालों में प्रदूषित मौहल्लों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है. लेकिन सरकारें मस्तिष्क, फेंफड़े, गुर्दे और लीवर को नुकसान पहुंचाने वाले तथा कैंसर और जन्मजात विकृति पैदा करने वाले जहरीले रसायनों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है. भोपाल ग्रुप फॉर इनफॉर्मेशन एंड एक्शन के सतीनाथ षडंगी ने आरोप लगाया कि यूनियन कार्बाइड के प्रबंधकों द्वारा कारखाने के जहरीले कचरे को असुरक्षित तरीके से जमीन में गाड़ने से ही भूजल में जहर मिलने की शुरूआत हुई है. षडंगी ने आरोप लगाया कि भोपाल गैस हादसे के लिए केंद्र सरकार डाव कैमिकल को कानूनी रुप से जिम्मेदार मानती हैं. मगर सरकार कोशिश कर रही है कि कंपनी को प्रदूषित इलाके की सफाई की जिम्मेदारी से बचाया जा सके.

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