शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

आप के मध्यप्रदेश संयोजक भी स्वाति के साथ बैठे अनशन पर

आम आदमी पार्टी के मध्य प्रदेश संयोजक और राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल शुक्रवार को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल के अनशन में शामिल हुए. स्वाति मालीवाल महिला हिंसा के खिलाफ अनशन कर रही हैं. इस मौके पर मालीवाल का समर्थन करते हुए  अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं के प्रति हिंसा और बलात्कार की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसका साफ संदेश है कि अपराधियों के बीच कानून व्यवस्था का डर नहीं रह गया है. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि वर्तमान भाजपा सरकार महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की इन घटनाओं को खुद बढ़ावा देना चाहती है. इसीलिए उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार उन्नाव के बलात्कार मामले में भाजपा विधायक को बचाने में जुटी थी. इसी तरह जम्मू कश्मीर के आसिफा कांड में बलात्कारियों के समर्थन में दो दो मंत्री खड़े हुए थे. 
उन्होंने मध्य प्रदेश में महिला हिंसा को लेकर आगामी कार्यक्रमों का ऐलान करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की टीम अगले दो दिन में दिल्ली आएगी और साथ ही सोमवार से भोपाल में धरना दिया जाएगा. इसके बाद प्रदेश के हर जिले में हर रोज एक धरना होगा. यह धरना कार्यक्रम तब तक जारी रहेगा, जब तक कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कानून नहीं बन जाता है. उन्होंने मंत्री रामपाल सिंह की बहु की आत्महत्या प्रकरण की चर्चा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में 16 मार्च को एक महिला ने आत्महत्या की लेकिन आज तक उस मामले में कोई एफआईआर नहीं हुई है और मंत्री और उनके बेटे आराम से घूम रहे हैं. 
उन्होंने कहा कि भाजपा धर्म की बात करती है, तो यह बताए कि धर्म में लिखा है कि महिलाओं से बलात्कार किया जाए और बलात्कारियों को बचाया जाए. जिस हिंदू धर्म की बात भाजपा करती है, उसमें महिलाओं की पूजा होती है, लेकिन भाजपा के लिए धर्म बस इस्तेमाल की चीज है. उन्होंने कहा कि देश में अगर सबसे बड़ी अधर्मी पार्टी है, जो सबसे अधर्म का काम कर रही है वो भाजपा है. 
उन्होंने कहा कि आज यह धरना महिला अधिकार की लड़ाई के लिए है. युगों-युगों से पुरुष प्रधान समाज में लगातार महिलाओं को दबाकर रखा गया है. आज भी यह कोशिश जारी है, लेकिन अब महिलाएं उठ खड़ी हुई हैं, और यह अत्याचार ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा. महिलाओं की इसी ताकत से भाजपा-कांग्रेस जैसे दल घबरा रहे हैं. उन्होंने कहा कि संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक पिछले 30 साल से अटका पड़ा हुआ है. ये पार्टियां 50 प्रतिशत जनसंख्या को 33 प्रतिशत आरक्षण देने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा, कांग्रेस, सपा बसपा जैसी सभी पार्टियों महिलाओं को उनका स्थान नहीं देना चाहती. 
उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया है कि 12 साल से छोटी बच्ची के साथ बलात्कार के दोषी को वह मृत्युदंड के पक्ष में है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसा कब होगा? हमारी न्याय व्यवस्था में एक केस चलता है तो 25-30 साल लग जाते हैं. इस बीच आधे गवाहों का फाइनल हियरिंग तक आते आते निधन हो जाता है, तो आधे गवाह घटना को ही भूल जाते हैं. नतीजतन आरोपी रिहा हो जाते हैं. उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि मोदी जी फास्ट ट्रैक से क्यों घबराते हैं. वे क्यों 6 महीने की सीमा लगाते हैं कि इस दौरान सजा मिल जानी चाहिए और अंतिम फैसला आ जाए. अगर यह सीमा लगा दी तो आधे भाजपाई जेल चले जाएंगे और आधे फांसी के फंदे से लटक जाएंगे. उन्होंने कहा कि मुझे याद है निर्भया कांड के समय कई अदालतों ने 1-1 महीने में फैसला दिया था. ऐसा लगातार होना चाहिए और अधिकतम 6 महीने में फैसला आ जाना चाहिए. 

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