शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

अब 55 साल तक का बन सकेगा जिला अध्यक्ष

 विवाद के चलते भाजपा ने बढ़ाई उम्र सीमा, आज होंगे चुनाव
मध्यप्रदेश भाजपा ने जिला अध्यक्षों की उम्र की सीमा 5 साल बढ़ा दी है. अब 50 के स्थान पर 55 साल की उम्र तक के कार्यकर्ता को जिला अध्यक्ष की कमान सौंपी जाएगी. जिला अध्यक्षों के चुनाव कल 30 नवंबर को होने हैं.
मध्यप्रदेश भाजपा में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. इस प्रक्रिया के तहत उम्र की सीमा को लेकर विवाद शुरु से रहा. मंडल अध्यक्ष के चुनाव में भी संगठन ने 35 से 40 साल तक के युवा की उम्र सीमा तय की थी. इसमें भी काफी विवाद हुआ, इसके बाद अब जब कल 30 नवंबर को जिला अध्यक्षों के चुनाव होने हैं, जिसमें  उम्र को लेकर विवाद उठा था. इस विवाद के चलते आज पार्टी पदाधिकारियों की बैठक हुई. इस बैठक में फैसला लिया गया कि उम्र की सीमा बढ़ाई जाए. बैठक में भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, प्रदेश चुनाव अधिकारी हेमंत खंडेलवाल, सह चुनाव अधिकारी विजेश लुणावत उपस्थित रहे. बैठक में तय किया गया कि 50 के स्थान पर जिला अध्यक्ष की उम्र 55 कर दी जाए. संगठन के इस फैसले से लंबे समय से कार्य करने वाले कार्यकर्ता को जिला अध्यक्ष बनने का मौका मिलेगा.
विवाद के चलते रोके थे 2 सौ से ज्यादा मंडल अध्यक्षों के नाम
दरअसल भाजपा आलाकमान ने इस बार जिला अध्यक्षों के चुनाव में 50 का फार्मूला लागू किया था. इस नियम के तहत उन्हें कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष बनाया जाना था, जिनकी उम्र 50 वर्ष या उससे कम हो, लेकिन इसे लेकर कार्यकर्ताओं में विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी. वहीं मंडल अध्यक्ष के लिए यह तय किया गया था कि 35 से 40 की उम्र वाले कार्यकर्ता को ही मंडल अध्यक्ष की कमान सौंपी जाए. इसे लेकर उठे विवाद के चलते प्रदेश भाजपा प्रबंधन ने 200 से अधिक मंडल अध्यक्षों का नाम पर रोक लगा दी थी. 

कांग्रेस विधायक ने कहा पुतला तो क्या वे आर्इं तो उन्हें जला देंगे

प्रज्ञा सिंह ठाकुर 
वायरल हुए वीडियो के बाद विधायक ने मांगी माफी

भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा संसद में नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताकर माफी मांग ली गई, लेकिन उनके इस बयान को लेकर गर्मायी सियासत थम नहीं रही है. कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी ने तो उन्हें धमकी तक दे डाली है. दांगी ने कहा कि पुतला तो क्या वे (प्रज्ञा सिंह) आर्इं तो उन्हें भी जला देंगे. बाद में विधायक का वीडियो वायरल हुआ और विवाद बढ़ा तो उन्होंने इसे लेकर माफी मांग ली.
गोवर्धन दांगी 
बयानों को लेकर विवादों से घिरी रहने वाली भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर अब अपने संसद में दिए बयान को लेकर घिर गई है. भाजपा नेतृत्व के दबाव में उन्होंने सदन में माफी तो मांग ली, मगर इससे कांग्रेस नेताओं की नाराजगी दूर होती नजर नहीं आ रही है. प्रदेश में कांग्रेस नेताओं द्वारा उन्हें लगातार घेरा जा रहा है. इस क्रम में राजगढ़ जिले के ब्यावरा से कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी ने तो उन्हें खुली चेतावनी तक दे डाली है. दांगी के विवादित बयान के बाद कांग्रेस के आला नेता तो मौन हैं, मगर नेताओं द्वारा किया जा रहा विरोध थम नहीं रहा है. 
दरअसल विधायक गोवर्धन दांगी के नेतृत्व में ब्यावरा में प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा गोडसे को देशभक्त बताए जाने के बयान के विरोध में पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया था. कांग्रेस द्वारा इस तरह का विरोध कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में कर रहे हैं. ब्यावरा में पुतला दहन कार्यक्रम में मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक दांगी इतने उग्र हो गए कि वे खुद विवादों में आ गए.     विधायक गोवर्धन दांगी ने कहा कि 'महात्मा गांधी राष्ट्रपिता हैं. उनके हत्यारे को देशभक्त कहने वाली सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर का पुतला क्या वो खुद यहां आई तो उसे भी पुतले के साथ-साथ जला देंगे. 
हालांकि जब विधायक का धमकी वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उन्होंने इस मामले को लेकर माफी मांग ली. विधायक ने माफी मांगते हुए कहा कि मैंने यह बयान आवेश में आकर अचानक दे दिया था.मेरे बोलने में कुछ गलतियां हो गई थी, जिसे लेकर मैं माफी मांगता हूं. दांगी ने कहा कि मेरे कहने का यह आशय था कि राजगढ़ आने पर यहां के लोग उनका (प्रज्ञा सिंह) बहिष्कार करेंगे. उन्होंने कहा कि हम महात्मा गांधी के अनुयायी हैं और सत्य, अहिंसा के जो महान आदर्श उन्होंने कायम किए हैं, हम उन पर विश्वास करते हैं.
मंत्री ने कहा क्यों चुप हैं मोदी
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने भी सांसद प्रज्ञा के बयान का विरोध किया. वे राजधानी में आई जय जगत 2020 पद यात्रा के  कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस कार्यक्रम में गांधीवादी विचारक राजगोपालाचार्य भी उपस्थित थे. कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  ने प्रज्ञा ठाकुर पर जमकर निशाना साधा और कहा कि उनके बयान से उन्हें बेहद दुख पहुंचा है साथ ही कहा कि महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी ने लंबा-चौड़ा भाषण दिया था और अब उन्हीं की सांसद गांधी को मारनेवाले का महिमामंडन कर रही हैं. इस पर  प्रधानमंत्री मोदी ने चुप्पी क्यों साध रखी है. साथ ही उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों को कोई मार नहीं सकता. जब महात्मा के विचारों की बुराई करने वाले जनता के सामने जाते हैं तो उन्हीं के विचारों के साथ चलते हैं.
शिवराज ने कहा सत्ता के नशे में चूर होना ठीक नहीं
प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान के बाद मचे सियासी घमासान के बीच जब कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी धमकी सामने आई तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी इस धमकी का विरोध जताया. उन्होंने कहा कि वे जनप्रतिनिधि हैं, उन्हेंं ऐसी धमकी नहीं देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, ऐसी मानसिकता के लोग सभ्य समाज में हमारे बीच रहे हैं. एक जनप्रतिनिधि होकर एक महिला के लिए ऐसी टिप्पणी करने वाले की जितनी भी निंदा की जाए, उतनी कम है. चौहान ने कहा कि सत्ता के नशे में इतना चूर होना ठीक नहीं है. वहीं कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने भी दांगी द्वारा दगी गई धमकी का विरोध किया. उन्होंने कहा कि विधायक को इस तरह का बयान  नहीं देना चाहिए था.

दिग्विजय के भाई ने कमलनाथ सरकार के फैसले पर जताई आपत्ति



मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह एक बार फिर सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करते नजर आ रहे हैं. उन्होंने राज्य की कमलनाथ सरकार के आदिवासियों की भूमि का विक्रय बिना अनुमति के हो सकता है का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि इस कानून को बदलना होगा, आदिवासियों के हक में यह कानून इंदिराजी ने बनाया था.  
कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने अपने ट्विटर एकाउंट से ट्वीट कर आदिवासियों के लिए वर्तमान में लाई जा रही योजनाओं को लागू नहीं करने की बात कही है. उन्होंने साफ कर दिया है कि इंदिरा गांधी ने आदिवासियों के हक के लिए इस कानून को बनाया था और इस कानून को बदलने का प्रयास ना करें. गौरतलब है कि हाल ही में कमलनाथ सरकार ने कैबिनेट बैठक में आदिवासी विकासखंडों में लोगों को बेहतर चिकित्सा और डॉक्टरों की सुविधा मिल सके, इसके लिए कई अहम निर्णय लिया गया था. इस निर्णय से इसका लाभ आदिवासी बहुल 20 जिलों के लोगों को मिलेगा. वहीं कैबिनेट के दौरान भू राजस्व संहिता में संशोधन किया गया था.
वहीं आदिवासी अधिसूचित क्षेत्र में गैर आदिवासी व्यक्ति कलेक्टर की मंजूरी के बिना गैर आदिवासी से जमीन खरीद-बेच सकता है. जमीन का लैंड यूज भी तुरंत बदल सकेगा. जुर्माने के प्रावधान को भी सरकार ने हटा दिया है. लक्ष्मण सिंह ने भी इस नए लैंड डायवर्शन को लेकर कैबिनेट के द्वारा लिए गए निर्णय पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस विधायक  ने एक अन्य ट्वीट करते हुए कहा है कि भोपाल में नवीन विधायक विश्राम गृह बनाने के लिए सैकड़ों पेड़ काटे जा रहे हैं, इसका वे वह स्वयं विधायक होते भी विरोध करते हैं. 
बदला ट्वीटर पर स्टेटस
पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद लक्ष्मण सिंंह ने भी अपना ट्वीटर स्टेटस बदल लिया है. उनके बदले स्टेटस पर राजनीति गर्मा गई है. लक्ष्मण सिंह ने अब अपने ट्वीटर हैंडल पर खुद को विधायक, कृषक और गायक बताया है. 

पोषण आहार पर भी डाका डाल रही कांग्रेस सरकार

नेता प्रतिपक्ष ने कहा लूट खसोट में लगी है प्रदेश सरकार 

कमलनाथ सरकार गरीब परिवारों के मासूम बच्चों से पेट का निवाला छीनकर माफियाओं को सुपुर्द कर पोषण आहार में भ्रष्टाचार कर रही है. इससे ज्यादा शर्मनाक और निंदनीय कुछ हो नहीं सकता. 
यह बात नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने प्रदेश सरकार द्वारा कैबिनेट में पोषण आहार के 7 प्लांट की जिम्मेदारी बदलने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही.  भार्गव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सर्वाधिक कुपोषित बच्चों और महिलाओं का प्रदेश है. कुपोषण को दूर करने के लिए 2 वर्ष पूर्व मेरे पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहते हुए हमारी सरकार ने पोषण आहार के इस कार्य को महिलाओं के स्व सहायता समूह के जिम्मे करने का निर्णय लिया था, ताकि बच्चों तक सुव्यवस्थित आहार पहुंचे और महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर हो. 
उन्होंने कहा कि पोषण आहार का यह कार्य आजीविका मिशन के माध्यम से किया जाना था, जिसके साथ पोषण आहार के नए प्लांट बनकर भी तैयार भी हो गए थे. सुप्रीम कोर्ट और इंदौर हाइकोर्ट ने भी इस बारे में निर्देश दिए थे. लेकिन कमलनाथ सरकार ने बुधवार को कैबिनेट में सुप्रीम कोर्ट और इंदौर हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना ओर तत्कालीन भाजपा सरकार के आदेश को भी पलटकर इसे पुन: एमपी एग्रो के माध्यम से दलालों को सौपने का निर्णय लिया. जो कि निंदनीय है. 
भार्गव ने कहा कि एग्रो के माध्यम से पोषण आहार माफिया अब लगातार अपना लूट का कारोबार चलाएंगे. इस कारोबार से पोषण आहार माफियां की काली कमाई कम से कम 2 हजार करोड़ ( 20 अरब) रुपए प्रति वर्ष होगी. कांग्रेस सरकार गरीब परिवारो के मासूम बच्चों के पेट का निवाला छीनकर माफियाओं को सुपुर्द कर रही है, इससे बड़ा पाप का दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता.  उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में नेता-अधिकारी लगातार भ्रष्टाचार कर रहे हैं ऐसा कोई विभाग नहीं बचा जहां भ्रष्टाचार नहीं हो रहा हो. लेकिन कम से कम कुपोषित बच्चे और उनकी माताओं को मिलने वाले पोषण आहार को बक्श दे. 
 भार्गव ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग ने पोषण आहार माफियाओं को सौपने की यह दलील दी कि वह उसे नहीं चला पाएंगे यह ठेकेदारों और विभाग की मिली जुली साजिश है. 
कांग्रेस और कालाबाजारी एक सिक्के के दो पहलू
 नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आज आरोप लगाया कि प्रदेश में किसान यूरिया को लेकर परेशान हो रहे हैं. भार्गव ने अपने ट्वीट में कहा कांग्रेस और कालाबाजारी एक सिक्के के दो पहलू है. कांग्रेस के राज में फिर से प्रदेश में यूरिया की कालाबाजारी शुरू हो गयी है. प्रदेश में बंटाधार युग की वापसी हो चुकी है. यूरिया के लिए किसानों को पुलिस के डंडे खाना पड़ रहे हैं.  जिलों में यूरिया के लिए झड़प की घटनाएं सामने आ रही है. एक अन्य ट्वीट में कहा कि किसानों को यूरिया प्रबंधन करने के बजाए सरकार का तंत्र कालाबाजारी के प्रबंधन में लगा है. भाजपा की सरकार में किसानों को कभी भी खाद बीज और यूरिया के लिए असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन कांग्रेस सरकार में यूरिया की कालाबाजारी और खाद के बदले किसानों को लाठी मिलना आम बात है.

श्रीरामराजा सरकार की निकलेगी बारात



श्रीरामराजा सरकार की एक दिसंबर को निकलने वाली बारात की तैयारियों को लेकर तैयारियों तेज हो गई हैं.  प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे रूट का निरीक्षण किया. प्रशासनिक अमले ने हर प्रमुख जगह पर जाकर व्यवस्थाएं देखी और संबंधित अधिकारियों को समय से सारी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिये. श्रीरामराजा सरकार के विवाह कार्यक्रम कल 30 नवंबर से शुरु होंगे.
मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले के ओरछा में विराजे श्रीरामराजा सरकार के विवाह महोत्सव को लेकर प्रशासन व्यापक तैयारियों में लगा हुआ है. विदित हो कि 30 नवंबर को मंडप से यहां पर विवाह के कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा. इस आयोजन के लिये जहां मंदिर की साज-सज्जा शुरू कर दी गई है, वहीं पंगत के लिए रसोईयों ने भी काम शुरू कर दिया है. इसके साथ ही एसडीएम वंदना राजपूत, एसडीओपी अशोक घनघोरिया, तहसीलदार रोहित वर्मा, टीआई नरेन्द्र त्रिपाठी के साथ ही नगर परिशद, पीडब्ल्यूडी शिक्षा विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारियों ने पूरे रूट का जायजा लिया. निरीक्षण में अधिकारियों ने बारात जाने वाले रूट पर सड़क, अतिक्रमण, बिजली सहित तमाम व्यवस्थायें देखीं. वहीं प्रमुख स्थानों की जा रही व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया. यहां पर अधिकारियों ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये कि बारात के समय पर किसी प्रकार का व्यवधान नहीं हो. इसका विशेष ध्यान रखा जाये. पीडब्ल्यूडी एवं नगर परिषद को सड़कों को पूरी तरह से दुरूस्त रखने एवं साफ-सफाई रखने के निर्देश दिये गये.
यहां से निकलेगी बारात
शाम की आरती के बाद श्रीरामराजा मंदिर से भगवान को पालकी में विराजमान किया जाएगा. इसके बाद वह मंदिर के बाहर आयेंगे. यहां पर सबसे पहले उन्हें गार्ड आॅफ आॅनर दिया जाएगा. मंदिर से शुरू होकर बारात नजाई मोहल्ला, पावर हाउस, शास्त्री नगर, गणेश दरवाजा, से मुख्य मार्ग होते हुए जानकी मंदिर पहुंचेगी. प्रशासनिक अमले ने इस पूरे रूट का जायजा लिया.

बुधवार, 27 नवंबर 2019

एक साल गांवों में करना होगी डाक्टरी




मध्यप्रदेश सरकार ने आज फैसला लिया है कि राज्य में एमबीबीएस कर रहे डाक्टरों को एक साल गांवों में रहकर डाक्टरी करना होगा.वहीं राज्य योजना आयोग का नाम बदलकर स्टेट प्लानिंग करने का निर्णय लिया है.
राज्य मंत्रिमंडल की आज हुई बैठक में ये फैसले लिए गए.  बैठक में   मध्यप्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र निवेश प्रोत्साहन नीति 2019 को मंजूरी दी गई है. इस नवीन योजना में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अस्पताल में बिस्तरों की संख्या को न्यूनतम 100 से कम करके 30 किया गया है. प्रति हजार जनसंख्या पर अस्पताल के कुल बिस्तरों की संख्या को आधार मानते हुए जिलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है. ऐसे जिले, जहां अस्पताल बिस्तरों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है, में स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश के लिए अधिक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे छोटे निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके. इसके अलावा राज्य योजना आयोग का नाम बदलकर स्टेट प्लानिंग करने का निर्णय लिया है.
मुख्यमंत्री सुषेण चिकित्सक प्रोत्साहन योजना
बैठक में प्रदेश के आदिवासी विकासखण्डों में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 'मुख्यमंत्री सुषेण चिकित्सक प्रोत्साहन योजना' लागू करने का निर्णय लिया है.    इस योजना के तहत डाक्टरों को एक साल तक गांवों में सेवाएं देना होगा. योजना में अति पिछड़े 21 विकासखण्डों में संविदा चिकित्सक को कुल मानदेय 1 लाख से 2 लाख रुपए तक तथा शेष पिछड़े विकासखण्डों में 90 हजार से 1 लाख 85 हजार रुपए तक देय होगा. नियमित चिकित्सकों को इस योजना में कुल वेतन अति पिछड़े 21 विकासखण्डों में 96 हजार 100 रुपए से 1 लाख 42 हजार 700 रुपए तक तथा शेष पिछड़े विकासखण्डों में 86 हजार 100 रुपए से 1 लाख 27 हजार 700 रुपए तक देय होगा. इसके अलावा, पदस्थ किए जाने वाले चिकित्सकों को विकासखंड स्तर पर आवास समूह और विकासखण्ड आवास समूह से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में कर्तव्य स्थल पर उपस्थित होने के लिए विभागीय पूल वाहन के माध्यम से परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी.

ट्वीटर पर मिली शिकायत, कर दी कार्रवाई

व्हाटस  अप पर बुलवाए कागजात, फिर दर्ज किया प्रकरण

मध्यप्रदेश के सूचना आयुक्त राहुल सिंह इन दिनों ट्वीटर और व्हाटस अप के साथ फोन पर सुनवाई करके मामलों को सुलझा रहे हैं. इस दौरान वे अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी भी व्हाटस अप के द्वारा बुला रहे हैं.
रीवा जल संसाधन विभाग का यह मामला है, जहां पर अपीलकर्ता ने सूचना आयुक्त को ट्वीटर पर शिकायत की. इसके बाद सूचना आयोग कार्यालय ने शिकायत दर्ज कर प्रकरण भी ट्वीटर पर ही निपटाया. आयोग से मिली जानकारी के अनुसार सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने ट्विटर पर रीवा जिले के जल संसाधन विभाग से जुड़ी शिकायत मिली.
 शिकायत में अपीलकर्ता मनोज कुमार दुबे ने यह शिकायत की थी. दुबे ने प्रकरण में गोविंदगढ़ रीवा मेंं जल संसाधन विभाग से जुड़ी हुई जानकारी मांगी थी. उनकी अपील को मुख्य  अभियंता  के कार्यालय ने कार्यपालन यंत्री  के कार्यालय में ट्रांसफर कर दी थी. अपीलकर्ता दुबे जब भी कार्यालय जाते वहां उनको प्रकरण की कोई  जानकारी नही दी जाती. बाद में मुश्किल से बाबू मिले तो  बाबू ने जानकारी की प्रतिलिपि के लिए 2 रुपए का चालान एसबीआई बैंक के माध्यम से जमा करने को कहा. अपीलकर्ता ने विरोध करते हुए कहा कि नगद में पैसे जमा करवा लें, 2 रुपए का बैंक से चालान बनाने वे कहा जाएंगे. मनोज ने उस वक़्त अपने  मोबाइल कैमरे से  अधिकारी का वीडियो भी बना लिया जिसमें अधिकारी कह रहे हैं कि उनको आरटीआई के कानून से कुछ लेना-देना नहीं है. यह वीडियो और अपनी पूरी शिकायत उन्होंने ट्वीट के माध्यम से राज्य सूचना आयुक्त के ट्विटर हैंडल पर पोस्ट कर दी.
 सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने शिकायत को संज्ञान लेते हुए  प्रकरण पंजीबद्ध करने के निर्देश दे दिए. सूचना आयुक्त के निर्देश पर उनके कार्यालय ने तत्काल व्हाट्सएप के माध्यम से अपीलकर्ता से धारा 18 के तहत शिकायत का आवेदन भी प्राप्त किया. अपीलकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि किस तरह से उनको सरकारी कार्यालय में जानकारी देने के नाम पर भटकाया जा रहा है. 
सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर ही रीवा के अधिवक्ता मनोज कुमार दुबे से मिली शिकायत पर कड़ी कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के रीवा संभाग के मुख्य अभियंता एवं कार्यपालन यंत्री के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई एवं 7500- 7500  रुपए जुर्माने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. साथ ही विभाग के एक अन्य अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन तलब किया है. मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग को अपीलकर्ता को 2 हजार रुपए का मुआवजा देने के आदेश भी सूचना आयुक्त ने जारी किए है. 

कर्मचारियों की समस्याओं को सुनेगा कर्मचारी आयोग


मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया फैसला, कोका कोला को ब्याज में 90 लाख की छूट

मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के लिए एक चार सदस्यीय आयोग बनाने का फैसला लिया है. यह आयोग कर्मचारियों की समस्याओं को सुनेगा और जो निर्णय देगा उसे सरकार लागू करेगी.
यह फैसला आज राज्य मंत्रिमंडल की हुई बैठक में लिया गया. बैठक में बाद राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट और राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी. मंत्रियों ने बताया कि राज्य के सभी विभागों के कर्मचारियों के लिए एक आयोग बनाने का फैसला आज बैठक में लिया गया. आयोग के चार सदस्य होंगे, यहां कर्मचारियों की समस्याओं को सुना जाएगा. कर्मचारियों के मुद्दों पर आयोग जो निर्णय लेगा उस निर्णय को सरकार लागू करेगी. कैबिनेट बैठक में राज्य के   होशंगाबाद में कोको कोला को बड़ी राहत देते हुए कमलनाथ सरकार ने कोका कोला की ब्याज राशि पर फाइन किया खत्म करने का फैसला लिया है. कोका कोला को ब्याज से करीब 90 लाख रुपए की छूट दी जाएगी. 
मंत्रियों ने जानकारी दी कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आजीविका मिशन के तहत काम करने वाली महिलाएं, स्व सहायता समूह के महासंघ द्वारा संचालित पूरक पोषण आहार के संयंत्रों का संचालन का जिम्मा एमपी एग्रो को सौंपने का फैसला भी आज बैठक में लिया गया. इसके अलावा 123 आवासीय स्कूलों का संचालन की सोसायटी का गठन किया गया है, जिसमें आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए एकलव्य शालाएं हैं. यह राज्य सरकार की सोसायटी होगी. इसका प्रबंधन एक अनुदान प्राप्त संस्था के रूप में होगा. इसके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में सामान्य वर्ग के व्यक्ति को अपनी जमीन का डायवर्सन करने का अधिकार अब मिल जाएगा. अभी 10 साल पहले वह डायवर्शन नहीं करा पाता था, इसकी वजह से विकास कार्य भी प्रभावित होते थे. राजस्व विभाग ने इस निर्णय के लिए भू राजस्व संहिता की दो धाराओं में संशोधन कर दिया है.
कैबिनेट के अन्य फैसले
* राजधानी भोपाल में केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड को जमीन आवंटित करने का भी फैसला लिया गया. 
* राज्य लोकसेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्तियों को छोड़कर शेष पदों के लिए परिवीक्षा अवधि 2 से बढाकर 3 साल कर दी है, इसके मुताबिक पहले साल 70 फीसदी और दूसरे साल 80 और तीसरे साल 90 फीसदी वेतन मिलेगा.
* कैबिनेट बैठक में नैसकाम से आईटी विभाग एमओयू साइन करने का निर्णय भी हुआ है. आईटी से जुड़े विभागों के काम किए जाएंगे. आईटी के अलग-अलग विभागों के काम किए जाएंगे.

मंगलवार, 26 नवंबर 2019

हनीट्रेप, हसीनाओं की विदेश यात्रा की जानकारी मांगी ईडी ने

मध्य प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप मामले में रोजाना बड़े खुलासे हो रहे हैं. अब ईडी (केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय)ने भी इस मामले में दखल दे दी है. आरोपियों के विदेश यात्राओं के बारे में ईडी ने जानकारी मांगी है. आरोपियों के एनजीओ को दिए काम का ब्योरा मांगा गया है. ईडी को संदेह है कि केंद्र से मिलने वाली राशि का प्रदेश के नेताओं ने हनी ट्रैप के आरोपियों के साथ बंदरबाट की है.
 प्रदेश के हनीट्रैप मामले में अब अब ईडी (केन्दीय प्रवर्तन निदेशालय)  ने  हनीट्रैप में शामिल महिलाओं की विदेश यात्राओं और केंद्र की योजनाओं की राशि दुरुपयोग करने के पूरी जानकारी मांगी है. साथ ही ईडी ने एफआईआर और पूरी जानकारी मांगी है. बताया जा रहा है कि मामले से जुड़े अहम सबूत केंद्र सरकार तक पहुंच चुके हैं. एसआईटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है. अब ईडी ने भी मामले से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है. ईडी भारतीय मुद्रा का विदेश यात्राओं के दौरान दुरुपयोग और विदेशी मुद्रा रखने की मामलों की जांच करती है. अब ये जांच एसआईटी के पास रहेगी या फिर ईडी करेगी इस पर भी असमंजस है।
गौरतलब है कि हनी ट्रैप मामले में आरोपी हसीनाएं श्वेता विजय जैन और श्वेता स्वप्निल जैन अपना एनजीओ भी चला रहे थे. आईएएस अफसरों के संपर्क में आने के बाद इन्होंने करोड़ों रूपए के कई सरकारी ठेके भी हासिल किए हैं. यही नहीं निगम से भी इनके एनजीओ को करोड़ों रूपए का ठेका दिया गया है. हाल में ये बात सामने आने के बाद विभागीय मंत्री जयवर्धन सिंह ने इसकी जांच कराने के बाद दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. इससे पहले भी हसिनाओं ने आईएएस अफसरों से नजदीकियों के चलते करोड़ों के सरकारी प्रोजेक्ट हथियाएं हैं. ईडी इन केसों को बारीकियों से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी.

केन्द्र की नीतियों के विरोध में कांग्रेस ने दिया धरना


केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और मध्यप्रदेश के साथ भेदभाव के विरोध में आज राजधानी भोपाल में जिला कांग्रेस कमेटी ने रोशनपुरा चौराहे पर एक दिवसीय धरना देकर विरोध जताया. 
धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाए कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते जहां पूरा देश मंदी की कगार पर पहुंच गया है, वहीं बेरोजगारी चरम पर है. दूसरी तरफ अतिवृष्टि से मध्यप्रदेश में भारी नुकसान हुआ है और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्र सरकार से छह हजार करोड़ से ज्यादा मदद की मांग की थी, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने सिर्फ एक हजार करोड़ रुपए की मदद की. जिला कांग्रेस कमेटी ने रोशनपुरा चौराहे पर स्थित जवाहर भवन पर एक दिवसीय धरना देकर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और मध्य प्रदेश से भेदभाव के विरोध में नाराजगी जाहिर की. भोपाल जिला कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष कैलाश मिश्रा का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार सरकार को साढ़े 5 साल हो गए हैं, लेकिन आर्थिक नीतियों के चलते देश दुर्दशा के कगार पर पहुंच गया है. हर क्षेत्र मंदी की चपेट में आ गया है. रोजगार खत्म हो गए है. रियल एस्टेट पूरी तरह से समाप्त हो चुका है.
दरअसल,केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ और मध्यप्रदेश से भेदभाव के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिलेवार 5 से 15 नवंबर तक धरना कर विरोध जताने का फैसला लिया था, लेकिन राम मंदिर के फैसले के कारण आंदोलन अधूरा रह गया और बाकी बचे जिलों में आंदोलन 25 नवंबर को आयोजित किया गया. राजधानी भोपाल में इज्तिमा के आयोजन के कारण यह धरना प्रदर्शन आज 26 नवंबर को आयोजित किया गया. 

त्रिपाठी के बाद अब कौल ने कहा वे भाजपा के हैं सदस्य

शरद कौल

मध्यप्रदेश विधानसभा में  विधेयक पर कांग्रेस का समर्थन कर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाले भाजपा के विधायक शरद कौल ने एक बार फिर कांग्रेस को संकट में डाला है. उन्होंने आज राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी से मुलाकात की. इसके बाद मीडिया से चर्चा करते हुए साफ किया कि वे भाजपा के सदस्य हैं. 
विधानसभा में विधेयक का समर्थन करने वाले भाजपा के दो विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कौल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ मीडिया में साफ कहा था कि वे अब कांग्रेस के साथ हैं, मगर अब जैसे-जैसे शीतकालीन सत्र नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे दोनों ही विधायक पाला भी बदलते नजर आ रहे हैं. कुछ दिन पहले नारायण त्रिपाठी ने यह संकेत दिए थे कि वे भाजपा के हैं और रहेंगे. इसके बाद वे भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ मीडिया से खुलक र बात भी की थी. इसके बाद अब भाजपा विधायक शरद कौल ने भी कांग्रेस को झटका दिया है. आज कौल ने मंत्री जीतू पटवारी से मंत्रालय में मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच लंबी मुलाकात हुई. इसके बाद जब वे मंत्रालय से बाहर निकले और मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने कहा कि मैं मंत्री से अपने क्षेत्र के काम की वजह से मुलाकात करने आया था. उन्होंने भाजपा की सदस्यता को लेकर कहा कि वे भाजपा के हैं. उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं छोड़ी हैं. विधानसभा में विधेयक का समर्थन करने और पक्ष में मतदान करने को लेकर उन्होंने कहा कि वे इसे लेकर समय आने पर ही बताएं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया. 

जब सिंधिया की यह हालत तो आम कार्यकर्ता का क्या होगा

नरोत्तम मिश्रा
 थम नहीं रही सियासत, पूर्व मंत्री ने सिंधिया के स्टेटस बदलने पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा ट्वीटर हैंडल पर बदले गए स्टेटस को लेकर गमाई सियासत थम नहीं रही है. राज्य के पूर्व मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने इसके लेकर कांग्रेस और कमलनाथ सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस में सिंधिया की यह हालत है, तो आम कार्यकर्ता की क्या हालत होगी. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस मामले को लेकर सिंधिया के समर्थन ेमें उतरे हैं.
राज्य के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा टष्ट्वीटर हैंडल पर स्टेटस बदलने को लेकर गर्माई सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है. अब राज्य के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने इसे लेकर कांग्रेस और कमलनाथ सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि सिंधिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, उनकी उपेक्षा हो रही है, जिसके कारण वे खुले मंच से विरोध करते आ रहे  हैं. अगर बार-बर सिंधिया सरकार को पत्र लिख रहे हैं तो यह बहुत चिंता की बात है. मिश्रा ने कहा कि जब कांग्रेस में सिंधिया की यह हालत है, तो आम कांग्रेस कार्यकर्ता की क्या हालत होगी. इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है. मिश्रा न ेकहा कि आज सरकार और उनके मंत्रियों का पूरा समय सरकार को बचाने में चला जाता है. कमलनाथ सरकार पर हमला करते हुए मिश्रा ने कहा कि सरकार को 1 साल होने जा रहा है, किसी भी तरीके से नए विकास के काम शुरुआत नहीं हुए हैं. पूरे प्रदेश में खनन माफिया सक्रिय है. नर्मदा की छाती को चिरा जा रहा है. प्रदेश को अंधेरे की गर्त में ले जाया जा रहा है. अवैध खनन को लेकर भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के मंत्री और नेता भी सवाल खड़े कर चुके हैं, मगर सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है.
उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को टष्ट्वीटर हैंडल पर अपना कांग्रेसी परिचय हटाकर स्वयं को समाजसेवी और क्रिकेट प्रेमी बताया था. इसे लेकर जब राजनीति गर्माई तो उन्होंने स्पष्ट भी कर दिया था कि उन्होंने  ऐसा लोगों के कहने पर किया था. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपना स्टेटस एक माह पूर्व ही बदल चुके हैं. 
क्या समाजसेवी नहीं होते कांग्रेसी
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा स्टेटस बदलने को लेकर सिंधिया का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि प्रोफाइल में गलत क्या लिखा है, सही तो लिखा गया है. मैं भी अपनी प्रोफाइल छोटी करता हूं, इसमेंं गलत क्या है. सिंह ने कहा कि हर व्यक्ति को ट्वीटर हैंडल पर अपने बारे में लिखने का अधिकार है. उन्होंने इस पर सवाल उठाने वालों से यह पूछा कि क्या समाजसेवी कांग्रेस में नहीं होते. वहीं उन्होंने सिंधिया के भाजपा में जाने की अटकलों पर भी विराम लगाया और कहा कि सिंधिया इसे लेकर पहले भी साफ कर चुके हैं कि वह कांग्रेस के हैं, थे और रहेंगे. बेमतलब हर बात में राजनीति नहीं देखनी चाहिए.

सोमवार, 25 नवंबर 2019

पुलिस आरक्षक भर्ती घोटाले में 30 को सात-सात साल की सजा

विशेष अदालत ने मुख्य दलाल को सुनाया 10 साल का कारावास

व्यापम की पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा-2013 के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी पाए गए 31 आरोपियों में से 30 को 7-7 साल और मुख्य दलाल प्रदीप कुमार त्यागी को 10 साल की सजा सुनाई  है. गत 21 नवबंर  को सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में शामिल सभी 31 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 25 नवंबर के लिए फैसला आरक्षित कर दिया था. 
न्यायाधीश एस बी साहू की विशेष अदालत के द्वारा आज जिन्हें  सजा दी गई है, उसमें 12 परीक्षार्थी, 12 साल्वर  (जिन्होंने मुख्य परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी) और 7 दलाल शामिल हैं. 
30 को सात-सात साल की सजा 
सीबीआई की विशेष अदालत के द्वारा राहुल पांडे, आशीष कुमार पांडे, कुलविजय, अभिषेक कटियार, सुयश सक्सेना, प्रभाकर शर्मा, नीरज उर्फ टिंकू, अनिल यादव, अजय सांकेरवार, धरमेश साहू, फूलकुंवर, देवेंद्र साहू, अजीत चौधरी, भूपेंद्र सिंह तोमर, संतोष शर्मा, चंद्रपाल कश्यप, पंजाब साहू, रविशंकर, नावीस जाटव, मुकेश साहू, अरूण गुर्जर, उदयभान साहू, दानिश धाकड़, अंतनदर साहू, पृथ्वेंद्र साहू, सुदीप शर्मा, अजय प्रताप साहू, कल्यानी साहू सिकरवार, गुलवीर सिंह जाट, राजवीर सिंह  को विशेष अदालत के द्वारा सात-सात साल की सजा दी गई .
मुख्य दलाल को दस साल की सजा 
 इस सारे मामले में मुख्य दलाल के तौर पर उभरे प्रदीप कुमार त्यागी को विशेष न्यायाधीश एसबी साहू के द्बारा 10 साल की सजा सुनाई गई.
सभी को भेजा जेल : विशेष न्यायाधीश एसबी साहू के द्बारा सजा सुनाए जाने के बाद सभी 31 अभियुक्तों को केन्द्रीय जेल भोपाल भेज दिया गया.  दोषी ठहराए गए आरोपियों में से ज्यादातर भिंड, मुरैना और कानपुर के रहने वाले हैं.
बीते गुरुवार पाया गया था दोषी 
 सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश एसबी साहू ने बीते गुरुवार 21 नवंबर को सभी 31 अभियुक्तों को दोषी करार दिया था. इसके साथ ही सजा सुनाए जाने की तारीख 25 नवंबर तय की थी. सभी अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 420, 419 और 120 ते तहत मामले दर्ज किए गए थे.
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक सतीश दिनकर ने संवाददातों को बताया  कि यह परीक्षा 15 सितंबर 2013 को हुई थी. परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की शिकायतों  के बाद राजधानी भोपाल और दतिया के सेंटरों पर कार्रवाई के दौरान 31 आरोपी बनाए गए थे. सर्वोच्च न्यायालय आदेश के बाद  यह मामला एसटीएफ से सीबीआई को सौंपा गया था. विशेष अदालत में 90 गवाहों के बयान और 450 से अधिक अहम दस्तावेजों को साक्ष्य  में लिया गया. 
विशेष लोक अभियोजक सतीश दिनकर ने बताया कि सीबीआई ने व्यापम घोटाले में 170 एफआईआर दर्ज की थीं. इनमें से 143 में चार्जशीट हो चुकी है. इनमें से 20 मामलों में जांच बंद की जा चुकी है. सात प्रकरणों में अभी जांच जारी है. 
गौरतलब है कि 7 जुलाई, 2013 को पहली बार व्यापमं घोटाले का मामला सामने आया. तब  इंदौर की क्राइम ब्रांच ने व्यापम की परीक्षा में गड़बड़ी करने के आरोप में 20 लोगों के खिलाफ मामला दायर किया. तब किसी को इस बात का अंदाज नहीं था कि व्यापम की परीक्षाओं में इतना बड़ा घोटाला सामने आएगा. 

सिंधिया के समाजसेवी और क्रिकेट प्रेमी होने पर मचा घमासान

कांग्रेस ने किया पलटवार, कहा शिवराज ने भी बदला था स्टेटस

मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा ट्वीटर पर स्टेटस बदले जाने के बाद घमासान मच गया है. भाजपा ने इसे लेकर कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में सिंधिया की उपेक्षा हो रही है. वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि हर जनप्रतिनिधि जनसेवक होता है. कांग्रेस ने शिवराज द्वारा बदले स्टेटस की भी भाजपा को याद दिलाई है. मामले ने जब ज्यादा तूल पकड़ा तो दोपहर को सिंधिया ने अपने स्टेटस को लेकर साफ कर दिया कि ऐसा उन्होंने लोगों की सलाह पर किया है. अफवाहों को सिंधिया ने निराधार बताया.
मध्यप्रदेश की राजनीति आज उस वक्त उबाल आ गया, जब पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्वीटर स्टेटस को बदला और समाजसेवी एवं क्रिकेट प्रेमी बताया. उनके यह स्टेटस बदलाव को लेकर तरह-तरह की चर्चा होने लगी.वहीं भाजपा ने सिंधिया को लेकर कांग्रेस पर तंज कसना भी तेज कर दिया. भाजपा नेताओं के लगातार आ रहे बयानों के बाद राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने पलटवार किया और कहा कि इन नेताओं के कहने से कुछ नहीं होता. सिंधिया को लेकर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता. वे बड़े नेता है. वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इस मामले में कहा है कि मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की बाजार क्यूं गरम है, उनके ट्विटर हैंडल बदलने का मैं स्वागत करता हूं. 
सिंधिया की हो रही उपेक्षा
ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपने ट्विटर के स्टेटस से कांग्रेस की जगह समाजसेवी लिखे जाने को लेकर भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से ज्यातिरादित्य सिंधिया की उपेक्षा की हो रही है. जो कि किसी भी पार्टी के नेता के लिए सही नहीं है. इस दौरान उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा ज्वाइन करने की बात को लेकर कहा कि इस बारे में ऐसी कोई जानकारी मुझे नहीं मिली है. हालांकि विजयवर्गीय इस बात को लेकर कुछ भी कहने से इंकार कर रहे हैं, लेकिन स्टेटस बदलने के बाद अटकलें लगाई जा रही है कि वे जल्द कोई नया कदम उठाएंगे. ऐसा पहले भी हो चुका है कि सिंधिया के भाजपा ज्वाइन करने की बात सामने आई थी, लेकिन उन्होंने खुद इस बात से इंकार किया था.
हर जनप्रतिनिधि जनसेवक ही होता है : कांग्रेस
भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्वीटर अकाउंट पर अपना स्टेटस बदलने पर छींटाकशी शुरू की तो कांग्रेस भी हमलावर हो गयी. कांग्रेस ने भाजपा को शिवराज सिंह के स्टेटस की याद दिलाया. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने ट्वीट किया है कि  जनसेवक  लिखे जाने पर सवाल उठाने वाले भाजपाई यह सच भी जान लें कि कुछ दिन पूर्व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीटर प्रोफाइल में बदलाव कर लिखा था कि  ‘द कामन मेन आफ एमपी’. उन्होंने कहा कि हर जनप्रतिनिधि जनसेवक ही होता है.
अफवाहों को बताया निराधार
स्टेटस बदलने को लेकर जब भाजपा और कांग्रेस में घमासान मचने लगा तब दोपहर होते-होते ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान आया और उन्होंने सभी अफवाहों को निराधार बताया. सिंधिया ने कहा कि उन्होंने ऐसा लोगों की सलाह पर किया है. सिंधिया ने अपने बयान में कहा है कि ट्वीटर स्टेटस में कांग्रेस पार्टी का जिक्र नहीं है. एक महीने पहले मैंने अपना स्टेटस बदल दिया था. लोगों की सलाह पर मैंने ऐसा किया था. जो अफवाहें इसे लेकर चल रही है, वे सब निराधार हैं.
भाजपा में आने के खुले हैं रास्ते
केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री व मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया एक राजघराने के व्यक्ति हैं और वे अपने नियम-कायदों के मुताबिक रहते हैं. भाजपा के दरवाजे हमेशा से ही सब के लिए खुले हैं.  कुलस्ते ने कहा कि सामान्य तौर से समाज में कार्य करते हैं, राजघराने के व्यक्ति हैं. उनके बारे में उनके काम करने का अपना अलग तरीका है. मीडिया के उनके भाजपा में जाने के सवाल पर कुलस्ते ने कहा कि भाजपा में आने के लिए रास्ते हमेशा से ही खुले हैं.
मंत्री और समर्थकों ने बदला स्टेटस
 ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना ट्विटर स्टेटस बदला, इसके बाद उनके समर्थक मंत्री इमरती देवी और समर्थकों ने भी अपना स्टेटस बदलने को लेकर सक्रिय हो गए. समर्थकों में जैसे स्टेटस बदलने की होड़ सी लग गई. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट का स्टेटस बदल दिया है. मंत्री इमरतीदेवी ने अपने प्रोफाइल से 'मंत्री' शब्द हटाकर विधायक कर लिया है. वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस के मीडिया पैनललिस्ट राजन ठाकुर ने भी अपना सोशल मीडिया स्टेटस बदल लिया है. उन्होंने ट्विटर पर खुद को सिर्फ श्रीमंत सिंधिया समर्थक बताया है. वहीं सिंधिया समर्थकों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए और मीडिया से दूरी बनाए रखी. 
निरर्थक है बयानबाजी
सिंधिया समर्थक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि सिंधिया कांग्रेस के बड़े नेता हैं, उनकी कोई नाराजगी नहीं है. जो बातें स्टेटस बदलने को लेकर कही जा रही हैं, वे  निराधार और निरर्थक हैं. उन्होंने कहा कि सिंधिया ने अपना स्टेटस एक माह पूर्व ही बदल लिया था. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी न तो कोई मांग है और न ही ऐसी कोई मांग रही है जो पार्टी ने पूरी नहीं की हो. व्यक्ति की नाराजगी तब होती है, जब उसकी कोई मांग हो.
सिंधिया ने कभी नहीं कहा कि वे नेता हैं
मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री और सिंधिया समर्थक महेंद्र सिंह सिसोदिया ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के कदम की तारीफ करते हुए कहा है कि सिंधिया ने ये कभी नहीं कहा है कि वो नेता हैं. उन्होंने हमेशा यही कहा है कि वो जनता के सेवक हैं और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर हैंडल में बदलाव किया तो ये काफी अच्छी बात है.

राजनीति के संत को दी अंतिम विदाई


मध्यप्रदेश के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश जोशी का आज प्रदेश भाजपा कार्यालय सें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. राजनीतिक के इस संत के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थिति रहे.
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का पार्थिव शरीर आज उनके 74 बंगले स्थित निवास पर दर्शनार्थ रखा गया. यहां पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि दी. कमल नाथ ने स्वर्गीय  जोशी के पार्थिव शरीर पर पुष्प-चक्र अर्पित किया. उन्होंने जोशी के पुत्र  दीपक एवं अन्य परिजनों को सांत्वना दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के विकास में  कैलाश जोशी के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा.  जोशी के निवास पर मुख्यमंत्री के अलावा भाजपा और कांग्रेस के बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे.  जोशी को श्रद्धांजलि देने के बाद जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा, खेल मंत्री जीतू पटवारी, श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कैलाश जोशी को याद करते हुए कहा कि उनका जाना मध्यप्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है. उनका राजनीतिक जीवन शांत और पूरी तरह से साफ-सुथरा रहा है. ऐसे राजनेता काफी कम ही मिलते हैं. जोशी का पार्थिव शरीर उनके निवास से भाजपा कार्यालय ले जाया गया, जहां पर बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जोशी आज हम सबके बीच नहीं है, यह दुखद वातावरण आज भाजपा परिसर में दिखाई दे रहा है. भाजपा का हर कार्यकर्ता उनके निधन से दुखी है. तोमर ने कहा कि जोशी सार्वजनिक जीवन के आदर्श कार्यकर्ता थे, नेता थे और आदर्श प्रशासक थे. भाजपा कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि  वे आम जन के नायक थे. उनका जाना मध्यप्रदेश के करोड़ों करोड़ लोगों की आंखों को नम कर गया. आपको कभी भुलाया न जा सकेगा. उन्होंने कहा कि उनके कारण ही भाजपा का यह भव्य स्वरूप है. हमारे लिए, हर जनप्रतिनिधि के लिए उनका जीवन और उनकी कार्यप्रणाली आज प्रेरणा का स्रोत है.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज जब वे संसार को छोड़कर गए, हम सभी भारतीय जनता पार्टी परिवार के लिए यह दुख की घड़ी है.  मैं अपनी ओर से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताआेंं की ओर से उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं. उन्होंने कहा कि बेदाग छवि के साथ राजनीति में  उन्होंने प्रवेश किया. लगभग आधी सदी से ज्यादा समय तक हम सभी का मार्गदर्शन किया, बहुत कम प्रमाण ऐसे मिलते हैं जहां कोई व्यक्ति राजनीति में इतनी ऊंचाइयों को छुए.

रविवार, 24 नवंबर 2019

पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का निधन

आज गृह ग्राम हाटपिपल्या में होगा अंतिम संस्कार

मध्यप्रदेश के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश जोशी का आज सुबह राजधानी भोपाल के निजी चिकित्सालय में निधन हो गया. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. जोशी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन सहित भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है. जोशी का अंतिम संस्कार सोमवार को उनके गृह ग्राम हाट पिपल्या में किया जाएगा.
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, राजनीति में सादगी, शुचिता और पारदर्शिता के प्रतीक, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का आज 11:25 पर उपचार के दौरान निधन हो गया. उनके निधन की खबर से समूचे भाजपा परिवार में शोक व्याप्त हो गया है. 91 वर्षीय  पूर्व मुख्यमंत्री जोशी को हाल ही में तबीयत बिगड़ने के चलते भोपाल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया थ, जहां पर  आज सुबह अंतिम सांस ली. आज शाम 5 बजे उनकी पार्थिव देह सोमवार 25 नवंबर को सुबह 9:30 बजे प्रदेश भाजपा कार्यालय दीनदयाल परिसर में अंतिम दर्शनार्थ रखी जाएगी.  इसके बाद 10:30 बजे उन्हें बैरागढ़, सीहोर और आष्टा होते हुए हाटपिपलिया ले जाया जाएगा.  जहां अपरान्ह 3 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
 जोशी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि कैलाश जोशी एक ऐसे निष्ठावान व्यक्ति थे, जिन्होंने मध्य प्रदेश के विकास में एक मजबूत योगदान दिया. उन्होंने मध्य भारत में जनसंघ और भाजपा को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की. उन्होंने एक प्रभावी विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाई. उनके निधन से दुख हुआ है. उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना. वहीं मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है. राज्यपाल ने अपने शोक संदेश में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के विकास में  कैलाश जोशी का योगदान अविस्मरणीय है. प्रदेश की राजनीति में उनका विशिष्ट स्थान था. वे कुशल प्रशासक, समर्पित कार्यकर्ता और सक्रिय जन-प्रतिनिधि थे. राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने  की ईश्वर से प्रार्थना की है.

व्यवहार में कड़क पर थे सीधे और सच्चे

 मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा सादा जीवन उच्च विचार के थे राजनेता, शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने खो दिया अनमोल रत्न

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश जोशी के निधन की खबर से राजनीतिक दलों में सन्नाटा पसर गया. किसी ने उन्हें व्यवहार में कड़क और सच्चे मृदुभाषी राजनेता बताकर श्रद्धांजलि दी, तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें सादा जीवन उच्च विचार वाला राजनेता बताया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वर्गीय जोशी के निधन पर कहा कि मध्यप्रदेश में एक अनमोल हीरा खो दिया है. भाजपा ही नहीं बल्कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं में उनकी छवि कड़क  व्यवहार वाले, लेकिन सीधे और सच्चे राजनेता के रुप में थी. 
मध्यप्रदेश में जनसंघ और फिर भाजपा को मजबूत करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के निधन की खबर से आज राजनीतिक हल्कों में सन्नाटा पसरा रहा. सभी दलों के राजनेताओं ने उन्हें स्वच्छ और ईमानदार छवि वाला राजनेता बताते हुए अपनी श्रद्धांजलि दी. राज्य  के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्वर्गीय जोशी सादा जीवन उच्च विचार वाले राजनेता थे. जीवन पर्यंत वे मूल्य और सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहे. उन्होंने कभी समझौता नहीं किया. उनका निधन प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है. 
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने स्वर्गीय जोशी को  मध्यप्रदेश की राजनीति को नई दिशा देने वाला राजनेता बताया. उन्होंने कहा कि वे निर्धन और कमजोर की आवाज, विनम्र व मृदुभाषी राजनेता के अवसान के साथ ही एक युग का अंत हो गया. उन्होंने कहा कि अपनी मधुर वाणी से सहज ही लोगों का हृदय जीत लेने वाले प्रखर वक्ता, राजनीति के अजातशत्रु, स्वर्गीय जोशी के अद्वितीय प्रशासकीय गुणों के सभी प्रशंसक थे. हम सब उनके सपनों के गौरवशाली, वैभवशाली और समर्थ मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं. चौहान ने कहा कि आज मध्यप्रदेश ने अपने एक अनमोल रत्न को खो दिया है.
कैलाश जोशी का राजनीतिक सफर
* कैलाश जोशी का जन्म 14 जुलाई 1929 देवास जिले की हाटपिपल्या तहसील में हुआ था. 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना के बाद से उसके सदस्य बने और 1954 से 1960 तक देवास जिले में जनसंघ के मंत्री रहे. 1955 में वे हाटपीपल्या नगरपालिका के अध्यक्ष बने. 1962 से लगातार 7 विधानसभा चुनाव बागली सीट से जीते. 1980 में भाजपा के गठन के बाद उसके प्रदेश अध्यक्ष बने और 1984 तक इस पद पर रहे.
* जोशी वर्ष 1961 से प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और सन 1972 से अद्यतन भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्य समिति एवं राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य रहे. 
* देश से इमरजेंसी हटने के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह पराजित होना पड़ा था. मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा और जनता पार्टी ने 320 में 231 सीटें जीतीं. इस चुनाव में मिली जीत के बाद सर्वसम्मति से कैलाश जोशी को मुख्यमंत्री बनाया गया. जोशी इस तरह प्रदेश के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने थे. जोशी ने राज्य के दसवें मुख्यमंत्री के रुप में 24 जून 1977 को शपथ ली थी. इसके बाद अस्वस्थ्ता के चलते उन्होंने 17 जनवरी 1978 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इससे पहले जोशी 1972 से 1977 तक नेता प्रतिपक्ष रहे थे. 
* आपातकाल में एक माह भूमिगत रहने के बाद दिनांक 28 जुलाई 1975 को विधानसभा के द्वार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था. वे 19 माह तक मीसा में नजरबंद रहे. 
* 1990 में हुए चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला. सुंदरलाल पटवा मुख्यमंत्री बनाए गए. इससे खफा जोशी पटवा मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुए. हालांकि बाद में करीब छह माह बाद उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए मनाया गया और उन्हें ऊर्जा मंत्री बनाया. हालांकि अयोध्या कांड के बाद दिसंबर 1992 में भाजपा की पटवा सरकार बर्खास्त कर दी गई. जोशी 1993 में भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे.
*  1998 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार मिली. इसके बाद भाजपा ने कैलाश जोशी को राज्यसभा में भेजा. बाद में वर्ष 2002 में भाजपा में अंदरुनी कलह बढ़ती नजर आई तो फिर संगठन ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी जोशी को सौंपी और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया.
* वर्ष 2004 में कैलाश जोशी ने भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद यहां से उनकी ये जीत 2014 तक बरकरार रही. 2014 में जोशी को भोपाल संसदीय क्षेत्र से उम्र का हवाला देकर चुनाव न लड़ाने की बात कही गई. इसे लेकर वे नाराज भी रहे. हालांकि उन्होंने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भोपाल से चुनाव लड़ाए जाने पर सीट खाली करने की बात भी कही थी. बाद में  जोशी को भोपाल से मैदान में नहीं उतारा, लेकिन, भाजपा ने उनकी बात रखते हुए उनके पुत्र दीपक जोशी के मित्र आलोक संजर को भाजपा उम्मीदवार बना दिया, जो अच्छे वोटों से जीते.

विश्रामगृह के पेड़ों की कटाई पर रोक लगाएं, बुलाएं सर्वदलीय बैठक


विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  गोपाल भार्गव ने विधायकों के लिए बनने वाले विश्राम गृह के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष  नर्मदा प्रसाद प्रजापति को पत्र लिखा है. भार्गव ने पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए सर्वदलीय नेताओं की बैठक कर विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय लेने की बात कही है. 
भार्गव ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा त्रयोदश विधानसभा में विधान सभा से लगी भूमि पर 102 बहुमंजिला आवास बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. चतुर्दश विधान सभा में इसे क्रियांवित किए जाने पर विचार किया गया परन्तु हरियाली नष्ट होने एवं पर्यावरण को होने वाली बड़ी क्षति को देखते हुए इस योजना पर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा पुनर्विचार कर योजना को स्थगित कर दिया गया था.   भार्गव ने पत्र में कहा कि विधायकों के बनने विश्राम गृह को उसी स्थान पर बनाने का आपके द्वारा निर्णय लिया गया है. योजना को लेकर हरियाली की चिंता करते हुए लगभग एक माह से अनेक प्रमुख अखबारों मे लगभग प्रतिदिन प्रमुखता से इसके विरूद्ध समाचार प्रकाशित हो रहे हैं, जिससे संस्था की प्रतिष्ठा को भी आघात पहुंच रहा हैं. उन्होंने कहा कि पुराने आवासों के स्थान पर नये आवास बने इसमें कहीं कोई असहमति नहीं हैं, परन्तु एक-एक पेड़ को बचाना एवं पर्यावरण की रक्षा करना हमारी प्रथम प्राथमिकता है और इससे समझौता नही किया जाना चाहिए. 
नेता प्रतिपक्ष  भार्गव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए बीच का कोई रास्ता निकालेंगे जिसमें बड़ी राशि की भी बचत होगी. नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष  प्रजापति से एक उच्च स्तरीय बैठक जिसमे मुख्यमंत्री कमलनाथ, नेता प्रतिपक्ष सहित सर्वदलीय नेताओं की उपस्थिति में आयोजित कर योजना के संबंध में अन्य विकल्पों पर भी विचार विमर्श कर अंतिम निर्णय लिए जाने का अनुरोध किया है. 

भाजपा पारस पत्थर जिसे छूते ही भ्रष्ट हो जाता है ईमानदार


प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने महाराष्ट्र के सियासी संग्राम पर आज फिर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार का सबसे बड़ा ताकतवर हथियार ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स है. भाजपा तो पारस पत्थर है, जिसे छूते ही भ्रष्ट भी ईमानदार हो जाता है.
महाराष्ट्र में चल रहे सियासी संग्राम पर आज फिर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बयान दिया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि अजीत पवार का एनसीपी छोड़ भाजपा का पल्ला पकड़ने का कारण समझे? केन्द्र सरकार के सबसे ताकतवर हथियार ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स और भाजपा पारस पत्थर है उसके छूने से भ्रष्ट भी ईमानदार हो जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री  सिंह ने दूसरे ट्वीट में कहा कि एनसीपी के 54 में से 53 शरद पवार जी के साथ रहेंगे. अजीत पवार अकेले रह जाएंगे. शरद पवार के उत्तराधिकारी की समस्या भी हल हो गई. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फडनवीस को 30 नवंबर तक बहुमत साबित करने को कहा है, लेकिन इस अवधि को कम कराने के लिए विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और उसे भरोसा है कि कनार्टक की तरह यहां भी सफलता मिल सकती है जब सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा को 30 घंटे के भीतर बहुमत साबित करने का निर्देश दिया और वह नाकाम रहे थे.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक उठापटक के नये दांव चलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार बना ली है लेकिन बहुमत के आंकड़े को लेकर हर कोई सशंकित है. देवेंद्र फडनवीस और अजीत पवार ने अभी तक यह नही बता पाये हैं कि उन्हें (एनसीपी) के कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त है. वहीं इस शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आज ही फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है. उनके मुताबिक उनके पास बहुमत है और वो सरकार बना सकते हैं.

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

चुनाव जीतने के लिए किसानों से किया झूठा वादा: शिवराज

शिवराज सिंह चौहान 

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज फिर राज्य की कमलनाथ सरकार पर हमला बोला और कहा कि चुनाव जीतने के लिए इन्होंने किसानों से झूठा वादा किया और अब कर्ज माफी किसानों के साथ धोखा कर रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बात आज ट्वीट के जरिए कही है. दरअसल उन्होंने राज्य के सहकारिता मंत्री डा. गोविंंद सिंह किसानों को बोनस दिए जाने को लेकर आए बयान को लेकर कही है. डा. सिंह ने किसानों को बोनस दिए जाने को लेकर कहा था कि हमारे पास कोई बैर का पेड़ नहीं है, जो हिलाने से रुपए गिर जाएं. 15 साल के कार्यकाल में भाजपा ने खजाना खाली कर दिया था. उन्होंने कहा था कि सरकार वचन को निभाने के लिए वचनबद्ध है और वह अपना वचन पूरा करेगी. 
डा. सिंह के इस बयान पर आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि तो अब कांग्रेस के मंत्रियों ने यह भी कहना प्रारम्भ कर दिया है कि हमारे पास बेर का पेड़ है जिसमें से पैसे निकाल कर दे दें.  उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि जब वचनपत्र में आपने मध्यप्रदेश की जनता से तरह-तरह के वादे किये थे, क्या तब आपके पास बेर का पेड़ या कल्पवृक्ष था ? केवल चुनाव जीतने के लिए आपने प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी फसलों पर बोनस देने का झूठा वादा किया.
उन्होंने कहा कि केवल चुनाव जीतने के लिए आपने प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी फसलों पर बोनस देने का झूठा वादा किया.  किसान अतिवृष्टि से तबाह हो गए और आप ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आपने यह कहकर न सिर्फ जनता के साथ धोखाधड़ी व बेईमानी की है, बल्कि उनकी पीठ पर छुरा भी घोंपा है.

शिवराज सरकार ने किसानों के साथ किया छल

सचिन यादव 

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार पर आरोप है कि तत्कालीन सरकार ने ऋणात्मक (नकारात्मक) कृषि विकास दर को 20 प्रतिशत बताकर राज्य की जनता और किसानों के साथ विश्वासघात किया है. किसानों के नाम पर खुद की प्रसिद्धि का ढ़ोल पीटा और किसानों को अभाव तथा निराशा के गर्त में धकेल दिया. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने भी हमारे साथ कुठाराघात किया है. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती शिवराजसिंह सरकार ने बीमा कंपनियों को राज्यांश नहीं दिया, जिसके चलते खरीफ 2019 का हिस्सा केन्द्र हमें नहीं दे रहा है. 
कृषि मंत्री यादव ने यह आरोप आज अपने विभाग के 11 माह के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए लगाए. उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार ने जो वचन किसानों के साथ किया, वह उसे पूरा करेगी. यादव ने कहा कि बीते दिनों मध्यप्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश के किसानों का हुआ. लगभग 55 लाख किसानों की 60 लाख हेक्टेयर में फसलें खराब हुई. हमने किसानों की फसलों की क्षतिपूर्ति एवं जानमाल और अधोसंरचना के नुकसान के लिए केंद्र सरकार से 6621.28 करोड़ रुपए मांगे, मगर आज तक केंद्र की भाजपा सरकार ने एक भी पैसा हमें नहीं दिया.उन्होंने कहा कि इसके बाद किसान की सबसे बड़ी निर्भरता फसल बीमा से होती है. हमने इस भीषणतम प्राकृतिक आपदा के लिए खरीफ वर्ष 2019 हेतु फसल बीमा का राज्यांश अग्रिम राशि 509.60 करोड़ का भुगतान बीमा कंपनियों को कर दिया है. मगर केंद्र सरकार ने प्रदेश के साथ बड़ा कुठाराघात करते हुए यह कहा है कि चूंकि पूर्ववर्ती शिवराजसिंह सरकार ने बीमा कंपनियों को रबी सीजन 2017-18 में रुपए 165 करोड़, खरीफ 2018 में रुपए 1772 करोड़ तथा रबी सीजन 2018-19 में राशि 424 करोड़ रुपए अर्थात कुल 2301 करोड़ रुपए का राज्यांश राशि का भुगतान नहीं किया गया है, इसलिए इस वर्ष की भीषण त्रासदी के बावजूद हमें फसल बीमा का खरीफ 2019 का केंद्र का हिस्सा केंद्र की भाजपा सरकार नहीं दे रही है. किसानों की विपत्ति के समय केंद्र की भाजपा सरकार का यह कुठाराघात असहनीय है.
कृषि मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के खरीफ 2018 के फ्लेट भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत मक्का फसल हेतु 2.60 लाख     किसानों को लगभग 514 करोड़ रुपए का भुगतान किया है. मगर दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने किसानों के नाम पर खुद की प्रसिद्धि का ढ़ोल पीटा, मगर किसानों के साथ छलावा ही किया. 
गौशाला का निर्माण जैविक खेती के लिए मील का पत्थर
जैविक खेती के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में पहले नंबर का राज्य है. एपीडा के अनुसार मध्यप्रदेश में 2 लाख 13 हजार हेक्टेयर में जैविक खेती की जा रही है.जिसमें कपास, गेहूं, धान, अरहर, चना, सोयाबीन इत्यादि फसलें शामिल हैं.  प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौशालाओं का निर्माण जैविक खेती के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है.जैविक खेती के लिए गोबर खाद का उपयोग तथा गौमूत्र से कीटनाशक जैविक खेती के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

प्रज्ञा के दिमाग से पाकिस्तान का सफाया करना चाहती है मोदी

डा. गोविंद सिंह 

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के मंत्री ने मोदी सरकार पर हमला बोला है. मंत्री ने सांसद प्रज्ञा को रक्षा समिति में शामिल किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि प्रज्ञा के दिमाग का उपयोग कर मोदी सरकार पाकिस्तान का सफाया करना चाहती है.
प्रदेश के सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह ने आज रक्षा मामलों से संबंधित संसदीय कमेटी में भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को शामिल किए जाने का विरोध किया है. उन्होंने विरोध करते हुए सीधा हमला मोदी सरकार पर बोला है. डा. सिंह ने कहा कि यह सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संरक्षण के तहत हो रहा है. मोदी न होते तो प्रज्ञा आज सड़क पर होती. भाजपा के दो मुंह हैं, एक से आलोचना करती है और दूसरे से वह तारीफ करती है. उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है. डा. सिंह ने कहा कि प्रज्ञा सिंह मालेगांव धमकों की आरोपी है. प्रज्ञा को रक्षा समिति में शामिल किए जाने को लेकर डा. सिंह ने कहा कि इस सबके पीछे हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रज्ञा के दिमाग का उपयोग कर पाकिस्तान का सफाया करना चाह रहे हों.
भिंड जिले की लहार विधानसभा क्षेत्र के विधायक और राज्य के सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह ने ्र कहा कि लहार का नाम सभी जगह किसी न किसी रूप में नाम चलता है. किसी का फौज में तो किसी का विधानसभा में तो किसी का आतंकवाद में भी चलता है. लहार बहादुरों की जमीन है,सब अपने-अपने क्षेत्रों में बहादुरी दिखाते हैं. गौरतलब है कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी भिंड जिले की लहार की ही निवासी हैं.

बस स्टाप के डिस्प्ले पर चली पोर्न फिल्म, मचा हड़कंप


मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित विद्या नगर बस स्टाप पर लगी फेयर कलेक्शन (टिकट वेंडिंग) मशीन पर अश्लील वीडियो (पोर्न मूवी) चलने का मामला सामने आया है. वहां मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. इसके बाद हड़कंप मच गया. अब बीसीसीएल ने मामले की शिकायत मिसरोद थाने और साइबर सेल को की है.
राजधानी के होशंगाबाद रोड स्थित विद्यानगर बस स्टाप पर लगी आटोमेटिक फेयर कलेक्शन मशीन की स्क्रीन पर अचानक पोर्न फिल्म चलने लगी. इसे वहां मौजूद लोगों ने देखा और चकित रह गए. कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. इस घटना की खबर जैसे ही भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीसीएल) के अधिकारियों को लगी, मामले को लेकर वे गंभीर हुए. अधिकारियों में इसे लेकर हड़कंप मच गया. बाद में बीसीसीएल, नगर निगम और मशीन आपरेट करने वाले मेसर्स हरमन इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों ने मिसरोद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. अधिकारियों ने पुलिस से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. साथ ही बस स्टाप डिस्प्ले बोर्ड को हैग करने की आशंका भी जताई है.  बताया जा रहा है कि यह मामला 28 अक्तूबर का है. किसी अज्ञात व्यक्ति ने मशीन से छेड़छाड़ कर पोर्न मूवी का वीडियो अपलोड किया है, इसका किसी को पता भी नहीं चला. 
उल्लेखनीय है कि जिस बस स्टाप पर ये ब्लू फिल्म चली वहां आसपास हजारों की संख्या में कालेज जाने वाले छात्र-छात्राएं भी रहते हैं. ज्यादातर छात्राएं इन्ही बस स्टॉप से बस पकड़ती हैं.  बीसीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार बस स्टाप की फेयर कलेक्शन मशीन पर चली ब्लू फिल्म साफ्टवेयर में 28 अक्तूबर को अपलोड किया जाना सामने आया है.  बीसीएलएल के अधिकारियों ने इसकी शिकायत बागसेवनिया पुलिस थाने के अलावा साइबर सेल को भी की है. भोपाल नगर निगम के महापौर आलोक शर्मा ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने निगम अधिकारियों से इस मामले में बात कर पुलिस में शिकायत कराई है.

बर्खास्त विधायक की बहाली पर घमासान, भार्गव मिले अध्यक्ष से

गोपाल भार्गव 
 विधानसभा अध्यक्ष ने कहा मामला सुप्रीम कोर्ट में है, मैं नहीं ले सकता फैसला
भाजपा के बर्खास्त विधायक प्रहलाद लोधी की विधानसभा में बहाली को लेकर मचा घमासान धमने का नाम नहीं ले रहा है. बयानबाजी के बीच आज नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति से मुलाकात कर लोधी की बहाली को लेकर पेशकश की, लेकिन बात नहीं बनी.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आज बर्खास्त विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता को बहाली करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति से मुलाकात की. दोनों के बीच हुई चर्चा के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष को कोई आश्वासन नहीं मिला है. अध्यक्ष से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने बताया कि उनकी आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात हुई. इस दौरान उन्होंने प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाली की मांग भी की. भार्गव ने कहा है कि हमने हाईकोर्ट के स्टे का हवाला दिया तो विधानसभा अध्यक्ष प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया. इस बात से स्पष्ट है कि वे विधायक लोधी की बहाली के पक्ष में नहीं हैं.  उन्होंने कहा कि अब वे पार्टी नेताओं से चर्चा कर रणनीति बनाएंगे. नेता  प्रतिपक्ष ने कहा कि  मेरी मान्यता है संवाद समाप्त नहीं होना चाहिए. मेरी प्राथमिकता विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपील करना थी. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष किसी पार्टी के नहीं होते, ये अपेक्षा करने आया हूं कि आप किसी दल के नहीं हैं.
गौरतलब है कि तहसीलदार से मारपीट के मामले में भोपाल की विशेष अदालत के फैसले को बदलते हुए प्रहलाद लोधी की सजा पर 7 जनवरी तक रोक लगा दी थी. मामले में विशेष आदालत ने विधायक लोधी को दो साल की सजा सुनाई थी. कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा से प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म कर दी थी.
मेरे ऊपर लगाए गए आरोपों से आहत हूं
 इस मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने कहा है कि प्रहलाद  लोधी का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए मैं कोई फैसला नहीं ले सकता, मेरे ऊपर लगाए गए आरोपों से आहत हुआ हूं. उन्होंने कहा कि अदालत से मिली सजा के बाद सुप्रीम कोर्ट के नियम के मुताबिक सदस्यता रद्द हो जाती है. इस मामले में मैंने तीन दिनों बाद फैसला लिया. ये फैसला अब विधानसभा अध्यक्ष का नहीं, बल्कि कोर्ट का है. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में मैं निष्पक्ष हूं.

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

इज्तिमा में पहली बार वियतनाम की जमात होगी शामिल



राजधानी में आयोजित किए जा रहे चार दिवसीय इज्तिमा में पहली बार वियतनाम की जमान शामिल हो रही है. इज्तिमा में करीब 40 देशों की जमातें शामिल होंगी, जिनके आने की सूचना मिल गई है. पहली बार इज्तिमा में होने वाली तकरीरों को 7 से 8 देशों की भाषाओं में ट्रांसलेट करके भी बोला जाएगा उसके लिए अलग से ट्रांसलेटर भी उपलब्ध रहेंगे, जो से तकरीरों का अपनी भाषाओं में ट्रांसलेट करेंगे. 
राजधानी में चार दिवसीय इज्तिमा कल 22 नवंबर से शुरु होगा. 25 नवंबर तक चलने वाले इज्तिमा में शामिल होने वाली जमातों के आने का सिलसिला जारी है. इज्तिमा कमेटी की ओर से बताया गया कि इस बार इज्तिमा मे पहली बार वियतनाम की जमात भी शामिल हो रही है. लगभग 40 देशों से जमातों के आने की सूचना मिल चुकी है और कई जमाते आ भी चुकी है. इज्तिमा में होने वाली तकरीरों को 7 से 8 देशों की भाषाओं में ट्रांसलेट करके भी बोला जाएगा उसके लिए अलग से ट्रांसलेटर भी उपलब्ध रहेंगे, जो से तकरीरों का अपनी भाषाओं में ट्रांसलेट करेंगे. इज्तिमा में होने वाली इन ट्रांसलेट तकरीरों को हैड़फोन के द्वारा सुनी जा सकेंगी. इज्तिमा कमेटी की ओर से बताया गया कि इंतजाम लगभग पूरे हो चुके है जिला प्रशासन की मदद से सभी इंतजाम अभूतपूर्व हो रहे है. सभी अधिकारी लगातार भ्रमण कर व्यवस्थाओ का जायजा ले रहे है. इज्तिमा में सेवा देने वाले वालिंटियर भी लगातार काम कर रहे है.
कलेक्टर  तरुण पिथोड़े और डीआईजी  ईरशाद वली ने इज्तिमा स्थल का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने लाइट, पानी, टॉयलेट, पार्किंग स्थलों के संबंध में निर्देश दिए. इसके साथ ही पार्किंग और रास्तों की लाइट को आज पूरी तरह से चालू कर परीक्षण  करने को कहा है. कलेक्टर और डीआईजी ने  पार्किंग स्थलों का निरीक्षण कर लाइट की माकूल व्यवस्था करने के निर्देश दिए है. भ्रमण के दौरान एसडीएम राजेश श्रीवास्तव और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे. निरीक्षण के बाद कलेक्टर और डीआईजी ने डयूटी पर तैनात होने वाले पुलिस बल को भी संबोधित कर दिशा निर्देश दिए कि इज्तिमा आने वाले जायरीनों से बेहतर व्यवहार किया जाएं. यह समागम अंर्तराष्ट्रीय स्तर का है. देश ही नहीं पूरे विश्व में हमारे आचार-व्यवहार की खबरें पहुंचेंगी. मध्यप्रदेश और भोपाल की गंगा-जमुनी विरासत के अनुसार रिस्पांस करें. यदि कोई समस्या आ रही है तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करें.

प्रज्ञा को रक्षा मंत्रालय की समिति में शामिल करने का विरोध

प्रज्ञा ठाकुर  

भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर  को रक्षा मंत्रालय की  संसदीय सलाहकार समिति में शामिल किए जाने का कांग्रेस ने विरोध किया है. कांग्रेस ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
भोपाल से भाजपा की सांसद प्रज्ञा ठाकुर को रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति में शामिल किए जाने का कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया है. प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने इसकी निंदा की है. उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में फर्क है. उन्होंने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर को इस तरह सदस्य बनाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है, मैं इसकी निंदा करता हूं. उन्होंने कहा कि समिति में एक अपराधी को शामिल करना दुर्भाग्यपूर्ण है. शर्मा ने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के वक्त प्रज्ञा द्वारा दिए गए बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि मैं उन पर कार्रवाई करुंगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वहीं लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि जिन पर बम ब्लास्ट में शामिल होने के आरोप लगे हों, जिनके ऊपर सुनील जोशी की हत्या का मुकदमा चला था, वो क्या देश की रक्षा करेंगी. वर्मा ने कहा कि देखते हैं प्रज्ञा ठाकुर कितनी रक्षा करती हैं. उन्होंने कहा कि इस सबके बाद भी रक्षा मंत्रालय की समिति में शामिल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के.मिश्रा ने कहा कि इसे आजाद भारत की घोर विडंबना ही कहा जाएगा कि एक बम विस्फोट की आरोपी रक्षा समिति में शामिल किया गया. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि अब तो ऐसा लगता है कि शायद इस मुल्क की रक्षा भगवान राम भी नहीं कर पाएंगे.
उल्लेखनीय है कि साध्वी प्रज्ञा अपने बयानों की वजह से विवादों में रही हैं. लोकसभा चुनाव और उसके बाद भी उनका नाम विवादों में रहा है. शहीद हेमंत करकरे और गोडसे को लेकर दिए उनके बयान पर पार्टी से उनको फटकार भी लगी थी.

मंत्री बनने दावेदारी की विधायक ने, सरकार की बढ़ी मुसीबत

हरदीप सिंह डंग 
हरदीप सिंह डंग ने कहा  जनता चाहती है मैं बनूं मंत्री
मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के लिए आज विधायक हरदीप सिंह डंग द्वारा मंत्री बनने के लिए की गई दावेदारी संकट खड़ा कर रही है. डंग ने कहा कि वे जिस क्षेत्र से विधायक हैं, वहां की जनता चाहती है कि मैं मंत्री बनूं.
राजधानी भोपाल में आज गुरुवार को आयोजित जिला पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होने आए मंदसौर जिले की सुवासरा विधानसभा सीट से विधायक हरदीप सिंह डंग ने मांग की कि उन्हें मंत्री बनाया जाए. उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र की जनता चाहती है कि मुझे मंत्री बनाया जाए और मंत्रिमंडल में मंदसौर जिले का प्रतिनिधित्व मिले.  हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिर पार्टी जो भी निर्णय लेगी यह उन्हें स्वीकार है. 
गौरतलब है कि डंग मंदसौर जिले से कांग्रेस के इकलौते विधायक हैं. उन्हें मीनाक्षी नटराजन के निकट का माना जाता है. राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही डंग को मंत्री बनाए जाने की मांग की जा रही है. वे खुद भी इसके पहले मंत्री पद के लिए दावेदारी कर चुके हैं. अब जबकि सरकार के एक साल पूरा होने को हैं और फिर से मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हुई है, इसे देखते हुए डंग ने एक बार फिर अपना दावा किया है कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. 
यहां उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले विधायक डंग के इस्तीफे को लेकर चर्चा जोरों पर थी. कहा जा रहा था कि हरदीप सिंह कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शमिल हो सकते हैं. हालांकि चर्चाओं का बाजार गरमाने के बाद हरदीप ने मीडिया में सफाई देते हुए कहा था कि मेरे बारे में बात हो रही और मुझे ही पता नहीं है.
कांतिलाल भूरिया 
विस में भूरिया के स्थान को लेकर संशय
झाबुआ से उपचुनाव जीतकर आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के विधानसभा में बैठक स्थान को लेकर संशय बना हुआ है. अभी तक विधानसभा सचिवालय यह तय नहीं कर पाया है कि भूरिया को किस स्थान पर बैठाया जाए. भूरिया को लेकर यह कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा, लेकिन अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं किया गया, जिसके चलते यह स्थिति निर्मित हुई है. बताया जाता है  भूरिया को मंत्रियों के साथ बैठाए जाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी यह तय नहीं हो सका है कि उन्हें कहां बैठाया जाए. अगर भूरिया शीतकालीन सत्र के पहले मंत्री नहीं बनते हैं तो सचिवालय उन्हें वरिष्ठता के क्रम में उनके लिए बैठक व्यवस्था करेगा.
सज्जन बोले प्रहलाद लोदी अवांछित विधायक
प्रहलाद लोधी 

अयोग्य ठहराए गए भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता को विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति द्वारा समाप्त किए जाने के फैसले के बाद अब उनका विधानसभा में बैठना सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर टिका हुआ है. वहीं लोधी को लेकर बयानबाजी का दौर अब भी जारी है. प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने लोधी को लेकर कहा कि अब लोधी अवांछित विधायक हैं, उनका विधानसभा में आना और बैठकों में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता है. वर्मा ने कहा कि अगर वे फिर भी विधानसभा पहुंचते हैं तो नियमों के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति मार्शलों की मदद ले सकते हैं.

पासपोर्ट मामले में जानकारी पूरी तरह से गलत: मेधा


मेधा पाटकर 
नर्मदा आंदोलन की मेधा पाटकर ने कहा कि मुंंबई पासपोर्ट कार्यालय द्वारा दिए नोटिस में मुझे अपराधी बताया जा रहा है, वह जानकारी पूरी तरह से गलत है. मैं अपने सभी प्रकरणों की जानकारी पासपोर्ट कार्यालय को दे चुकी हूं और दस्तावेज भी जल्द भेज दिए जाएंगे.
मेधा पाटकर ने आज राजधानी में चल रहे अनिश्चितकालीन धरना स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा कि मुंबई पासपोर्ट कार्यालय द्वारा एक नोटिस देकर पासपोर्ट बनने के दौरान प्रकरण की जानकारी न देने का आरोप लगाया गया है, जो पूरी तरह से गलत है. उन्होंने कहा कि जो नोटिस मुझे दिया गया है, उसमें प्रकरण क्रमांक का उल्लेख नहीं है. मैं अपने सभी मामलों की जानकारी पासपोर्ट कार्यालय को दे चुंकी हूं और जल्द ही दस्तावेज भी भेज दिए जाएंगे. 
यहां उल्लेखनीय है कि राजधानी में नर्मदा भवन के सामने मेधा पाटकर सरदार सरोवर बांध के प्रभावितों के साथ मुआवजा देने सहित अन्य मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं. मेधा पाटकर की लगातार अधिकारियों से चर्चा भी हो रही है, मगर अब तक इस मामले को लेकर उन्हें ठोस जवाब नहीं मिला है. इसके चलते उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक पीड़ितों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक वे धरने पर बैठी रहेंगी.

बुधवार, 20 नवंबर 2019

जानकारी नहीं देने पर लोकायुक्त पुलिस पर 25 हजार का जुर्माना


लोकायुक्त पुलिस द्वारा युवक को चाही गई जानकारी नहीं दी तो सूचना आयुक्त ने मामले को लेकर लोकायुक्त पुलिस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना करते हुए विभागीय कार्रवाई करने का नोटिस दिया है.
अनूपपुर निवासी नौशाद खान ने 22 दिसंबर 2018 को पुलिस अधीक्षक विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त रीवा से कोतमा वनपरिक्षेत्र में दर्ज प्रकरण की जानकारी मांगी थी. लोकायुक्त पुलिस ने जानकारी देने से मना कर दिया था. बाद में लोकायुक्त प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी जानकारी देने से मना करते हुए अपीलकर्ता नौशाद खान की अपील को खारिज कर दिया था.  इस मामले को लेकर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए लोकायुक्त कार्यालय द्वारा जानकारी नहीं देने को विधि विरुद्ध ठहराया. अपने आदेश में राहुल सिंह ने कहा कि इस प्रकरण में लोकायुक्त पुलिस की वैश्वासिक नातेदारी स्वयं अपीलकर्ता के साथ बनी हुई है क्योंकि अपीलकर्ता द्वारा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही लोकायुक्त ने अपराध पंजीबद्ध किया था. अपीलकर्ता को हक है यह जानने का कि उसकी शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने क्या कार्रवाई की है.
सूचना आयुक्त सिंह ने आदेश में कहा कि लोकायुक्त पुलिस ने धारा 81 ए को संपूर्णता में नहीं लिया क्योंकि इसी धारा में लोकहित होने पर जानकारी देने का भी प्रावधान है. सूचना आयोग का इस प्रकरण में मत है कि जानकारी देने से भ्रष्टाचारी विरोधी व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित होगी. सिंह ने इस मामले में लोकायुक्त पुलिस को सचेत करते हुए कहा कि जानकारी नहीं देने के लिए धारा 8 का प्रयोग लोक सूचना अधिकारी को सोच समझ कर करना चाहिए. धारा 8 की व्याख्या ऐसी नहीं करनी चाहिए कि जिस प्रयोजन के लिए सूचना के अधिकार कानून का जन्म हुआ उस पर सवालिया निशान लग जाए.
आयुक्त सिंह ने अपीलकर्ता को नि:शुल्क जानकारी उपलब्ध कराने के आदेश लोकायुक्त पुलिस को दिए है. सूचना आयुक्त ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने लोक सूचना अधिकारी लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक रीवा के विरुद्ध 25 हजार जुर्माने एवं विभागीय कार्रवाई के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

विधायकों की सूची से लोधी का हटाया नाम, सुविधाएं रोकी

विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले मुसीबत में भाजपा

मध्यप्रदेश में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले भाजपा को एक और झटका लगा है. भाजपा के लिए यह मुसीबत बन गई है कि अदालत की शरण में जाने के बाद भी वह प्रहलाद लोधी की विधायक की सदस्यता को बरकरार नहीं रख पा रही है. विधानसभा सचिवालय ने लोधी को न तो सत्र की सूचना भेजी है और न ही उन्हें विधानसभा में सवाल पूछने की अनुमति ही दी है. लोधी को विधायक के रुप में मिलने वाली सभी सुविधाएं विधानसभा सचिवालय ने रोक दी है.
 हाईकोर्ट ने प्रहलाद लोधी की सजा पर भले ही रोक लगा दी है, लेकिन उन्हें राहत मिलती नजर नहीं आ रही. विधानसभा के शीतकालीन सत्र की सूची से विधानसभा सचिवालय ने प्रहलाद लोधी का नाम हटा दिया है.  इसके अलावा सचिवालय ने उन्हें शीतकालीन सत्र की अधिसूचना भी नहीं भेजी है. अब उनके वेतन भत्ते अन्य सुविधाएं बंद किए जाने की तैयारी है. लोधी का अकाउंट ब्लाक कर दिया है.अब वो आनलाइन सवाल भी नहीं पूछ सकेंगे, उनके लिखित सवाल भी मान्य नहीं होंगे. इसके अलावा सभी सुविधाएं भी प्रहलाद लोधी से छीनी जाएंगी. वेतन भत्ते पर रोक लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं. विधानसभा सचिवालय ने इनका वेतन जारी नहीं करने के निर्देश संंबंधितों को दिए हैं. 
यहां उल्लेखनीय है कि राजधानी की विशेष अदालत ने पवई से विधायक रहे प्रहलाद लोधी को दो साल की सजा सुनाई थी, इसके बाद से विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी थी और इसकी सूचना भी चुनाव आयोग को दे दी थी. लोधी की सदस्यता को लेकर भाजपा ने दो बार राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर विधानसभा अध्यक्ष से लोधी की सदस्यता पर विचार करने को कहा, साथ ही हाईकोर्ट से मिले स्टे की जानकारी भी दी. इसके बाद राज्यपाल ने चुनाव आयोग से सलाह भी मांगी, मगर अब तक मामला खत्म नहीं हुआ, बल्कि अब और गर्मा गया है. एक ओर प्रहलाद लोधी सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं, वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लोधी ने केविएट दायर की है, तो सरकार ने लोधी को दिए स्टे के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका लगाई है.
वहीं इस मामले को लेकर भाजपा के विरष्ठ नेता और पूर्व संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि प्रहलाद लोधी अब भी विधायक हैं और कैविएट इसलिए दायर किया गया है कि कोर्ट में उनका भी पक्ष सुना जाए. दूसरी तरफ कांग्रेस मीडिया सेल के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता की मानें तो भाजपा को डरने की जरूरत नहीं है सुप्रीम कोर्ट जो फैसला करेगा उस पर आगे काम होगा.
कांग्रेस ने विधायकों को किया सतर्क
शीतकालीन सत्र में भाजपा द्वारा सरकार को घेरने की जिस तरह से तैयारी की जा रही है, उसे देखते हुए कांग्रेस अने भी अपने विधायकों को सतर्क कर दिया है. कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को सतर्क किया है कि वे सदन की कार्यवाही के दौरान पूरे समय उपस्थित रहें. इसके अलावा भाजपा के पिछले कार्यकाल की गड़बड़ियों और घोटालों को लेकर भाजपा को घेरने का पूरा प्रयास करें. विधायकों को कहा गया है कि सरकार द्वारा एक साल में जो कार्य किए गए, उन कार्यों की जानकारी उन्हें होनी चाहिए.सरकार द्वारा जनहित में एक साल के दौरान लिए गए फैसले भी मुंहजवानी याद होने चाहिए.

जिला भाजपा अध्यक्षों के चुनाव 30 को



मध्यप्रदेश भाजपा के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया के तहत अब जिला अध्यक्षों के चुनाव 30 नवंबर को होंगे. इसकी जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने दी है.
प्रदेश भाजपा में बड़ा बदलाव होता नजर आ रहा है. इन दिनों संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. विवादों के बीच मंडल अध्यक्षों के चुनाव हुए. अब जिला अध्यक्षों के चुनाव होने शेष हैं. आज प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने इसकी तारीख की घोषणा कर दी है. उन्होंने ट्वीट कर यह जानकारी दी है कि 30 नवंबर को जिला अध्यक्षकों के चुनाव कराए जाएंगे. राकेश सिंह ने ट्वीट कर कहा कि संगठन पर्व के तहत आगामी 30 नवंबर को मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के सभी संगठनात्मक जिलों में जिला अध्यक्षों का निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा.  सिंह द्वारा जिला अध्यक्षों के चुनाव  की घोषणा किए जाने के बाद से मध्यप्रदेश भाजपा में खलबली बढ़ गई है. दावेदारों ने अब चुनावी तैयारियां भी शुरु कर दी है.  इस बार भाजपा जिला अध्यक्षों के चुनाव संगठन द्वारा तय नई गाइड लाईन के आधार पर होना है, इस कारण इस चुनाव को लेकर भी नाराजगी उभर रही है.
उल्लेखनीय है कि इस बार भाजपा ने जिलाध्यक्षों के लिए उम्र की सीमा तय की है. 50 वर्ष पार वाले जिलाध्यक्ष पद के दावेदार नहीं होंगे. पार्टी संगठन चुनाव में इस बार युवाओं को ही तरजीह दे रही है. उम्र वाले फार्मूले को लेकर शुरूआत में पार्टी नेताओं ने विरोध भी किया था, लेकिन नेतृत्व ने इसे वापस लेने को तैयार नहीं हुई. प्रदेश में सगंठन चुनाव की तैयारी बहुत पहले से चल रही है. मंडल अध्यक्षों का चुनाव संपन्न हो गया है.
नगरीय निकाय से पहले संगठन मजबूत करना चाह रही भाजपा
राज्य में नगरीय निकाय चुनाव होने है. इस दृष्टि से संगठनात्मक चुनाव को भाजपा ने गंभीरता से लिया. नई गाइड लाईन के आधार पर मंडल अध्यक्ष और फिर अब जिला अध्यक्ष के चुनाव संपन्न कराए जा रहे हैं. भाजपा की यह कोशिश हे कि निकाय चुनावों की घोषणा से पहले संगठन को पूरी तरह से मजबूत कर लिया है. युवाओं को इसलिए मौका दिया जा रहा है. इसके पीछे संगठन का तर्क है कि युवाओं को संगठन आगे लाना  चाह रहा है. इसके चलते दिग्गज नेताओं का जो स्थानीय स्तर पर विरोध होता रहा है, वह भी कम होगा. साथ ही संगठन से ज्यादा से ज्यादा युवा वर्ग के लोगों को जोड़ सकें. 

आजाद की प्रतिमा लेकर गहराया विवाद, पोते ने कहा देंगे धरना

कैप्शन जोड़ें

राजधानी में शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को हटाकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की प्रतिमा स्थापित किए जाने के मामले ने और तूल पकड़ लिया है. आज आजाद के पोते अमित आजाद ने राजधानी पहुंचकर सरकार को चेतावनी दी है कि वह 2 दिसंबर तक आजाद की प्रतिमा को वहीं पर स्थापित करे, जहां पर पहले थी, नहीं तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे.
राजधानी के नानके पेट्रोल पंप तिराहे पर शहीद आजाद चंद्रशेखर की प्रतिमा को हटाकर यहां पर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुनसिंंह की प्रतिमा को स्थापित किया जा रहा है. इसे लेकर विवाद भी उठा, जो थमने का नाम नहीं ले रहा है. शहीद चंद्रशेखर आजाद के पोते अमित आजाद ने आजाद ने आज राजधानी पहुंचकर इस मामले को और गर्मा दिया है. उन्होंने आज कहा है कि शहीद की मूर्ती हटाकर किसी दूसरे की मूर्ती लगाना शहीद का अपमान है. शहर को व्यवस्थित करने का फैसला स्वीकार है, लेकिन शहीद का अपमान बर्दास्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने आज साफ कह दिया कि अगर प्रशासन ने 2 दिसंबर तक आजाद की प्रतिमा को वहीं स्थापित नहीं किया तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे. 
उल्लेखनीय है कि नगर निगम प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर नानके पेट्रोल पंप तिराहे पर लगाए गए शहीद चंद्रशेख आजाद की प्रतिमा 3 साल पहले हटा दी गई थी, लेकिन अब उस जगह पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की प्रतिमा लगा दी गई है. हालांकि अभी प्रतिमा का लोकार्पण नहीं हुआ है. विवाद के चलते मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया है.