मेधा पाटकर ने कहा पीड़ितों को राहत मिलने पर ही खत्म होगा आंदोलनआदिवासियों ने जल, जंगल, जमीन और जीवन को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आदिवासी अपनी मांगों को लेकर राजधानी भोपाल में हजारों की संख्या में पहुंचे. वहीं दो दिनों से नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों का प्रदर्शन आज दूसरे दिन भी जारी रहा. नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने आज साफ कर दिया कि जब तक पीड़ितों को राहत नहीं मिल जाती है, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.
प्रदेश भर के आदिवासी संगठनों ने आज भोपाल आदिवासी अधिकार हुंकार यात्रा के माध्यम से आदिवासियों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ वादा निभाओ रैली का आयोजन करके भेल दशहरा मैदान पर सभा का आयोजन किया. इस दौरान अलग-अलग प्रांतों से आए आदिवासी संगठनों ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा कि वनों और जंगलों में सदियों से रहते चले आ रहे आदिवासियों का अधिकार छीना जा रहा है. अब सरकार अपनी मनमानी पर अड़ी है और आदिवासियों को वनों को अतिक्रमणकारी बता रही है. यही कारण है कि उच्चतम न्यायालय ने भी हमारी आवाज को अनसुना कर हमें बेदखली का आदेश दे दिया है, जो हमारे साथ अन्याय है.
इस दौरान कुछ नेताओं ने कहा कि भारतीय संविधान व्यवस्था में आदिवासियों के स्वशासन व संरक्षण के लिए पांचवी अनुसूची और पैसा कानून के तहत अलग-अलग प्रावधान की बात जरूर करता है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसके क्रियांवयन के लिए कोई बात नहीं की जाती. हालांकि आदिवासियों के अन्याय की क्षति पूर्ति के लिए अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वनाधिकार मान्यता कानून) भी बना, इसमें आदिवासियों को उनकी काबिज जमीन का मलिकाना हक देने की बात कही गई पर आज वर्षों से काबिज आदिवासियों को उनके वनो से बेदखली का भय व्याप्त है. मध्यप्रदेश के आदिवासी जल, जंगल, जमीन बचाओ साझा मंच के बैनर तले आयोजित उक्त रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदायों ने सहभागिता की. गौरतलब है कि 26 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का वन अधिकार को लेकर बड़ा फैसला आने वाला है उससे भी जोड़कर भी इस प्रदर्शन को देखा जा रहा है.
अधिकारियों से चर्चा में नहीं निकला निर्णय
नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में सरदार सरोवर बांध के पीड़ित आदिवासी और अन्य लोगों का आज दूसरे दिन भी राजधानी भोपाल में प्रदर्शन जारी रहा. प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही मेधा पाटकर ने आज साफ कर दिया कि जब तक पीड़ितों को राहत नहीं मिलेगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा. पाटकर ने कहा कि राजधानी में पीड़ितों द्वारा सत्याग्रह आंदोलन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कल शनिवार से लेकर आज तक अधिकारियों से करीब 7 मर्तबा बातचीत हो चुकी है, मगर कोई हल नहीं निकला है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ संवाद तो कर रहे हैं, मगर पीड़ितों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार पीड़ितों को मुआवजा, रोजगार और जमीन उपलब्ध नहीं कराएगी, तब तक पीड़ितों का आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि नर्मदा के डूब प्रभावितों के सामने आज रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है, इस स्थिति में प्रदेश और केन्द्र सरकारें कोई उन्हें राहत नहीं दे पा रही हैं. यही वजह है कि मालवा-निमाड़ से चलकर पीड़ितों ने अब अपने अधिकार के लिए राजधानी भोपाल में यह न्याय सत्याग्रह शुरु किया है.

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