शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

बर्खास्त विधायक की बहाली पर घमासान, भार्गव मिले अध्यक्ष से

गोपाल भार्गव 
 विधानसभा अध्यक्ष ने कहा मामला सुप्रीम कोर्ट में है, मैं नहीं ले सकता फैसला
भाजपा के बर्खास्त विधायक प्रहलाद लोधी की विधानसभा में बहाली को लेकर मचा घमासान धमने का नाम नहीं ले रहा है. बयानबाजी के बीच आज नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति से मुलाकात कर लोधी की बहाली को लेकर पेशकश की, लेकिन बात नहीं बनी.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आज बर्खास्त विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता को बहाली करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति से मुलाकात की. दोनों के बीच हुई चर्चा के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष को कोई आश्वासन नहीं मिला है. अध्यक्ष से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने बताया कि उनकी आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात हुई. इस दौरान उन्होंने प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाली की मांग भी की. भार्गव ने कहा है कि हमने हाईकोर्ट के स्टे का हवाला दिया तो विधानसभा अध्यक्ष प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया. इस बात से स्पष्ट है कि वे विधायक लोधी की बहाली के पक्ष में नहीं हैं.  उन्होंने कहा कि अब वे पार्टी नेताओं से चर्चा कर रणनीति बनाएंगे. नेता  प्रतिपक्ष ने कहा कि  मेरी मान्यता है संवाद समाप्त नहीं होना चाहिए. मेरी प्राथमिकता विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपील करना थी. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष किसी पार्टी के नहीं होते, ये अपेक्षा करने आया हूं कि आप किसी दल के नहीं हैं.
गौरतलब है कि तहसीलदार से मारपीट के मामले में भोपाल की विशेष अदालत के फैसले को बदलते हुए प्रहलाद लोधी की सजा पर 7 जनवरी तक रोक लगा दी थी. मामले में विशेष आदालत ने विधायक लोधी को दो साल की सजा सुनाई थी. कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा से प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म कर दी थी.
मेरे ऊपर लगाए गए आरोपों से आहत हूं
 इस मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने कहा है कि प्रहलाद  लोधी का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए मैं कोई फैसला नहीं ले सकता, मेरे ऊपर लगाए गए आरोपों से आहत हुआ हूं. उन्होंने कहा कि अदालत से मिली सजा के बाद सुप्रीम कोर्ट के नियम के मुताबिक सदस्यता रद्द हो जाती है. इस मामले में मैंने तीन दिनों बाद फैसला लिया. ये फैसला अब विधानसभा अध्यक्ष का नहीं, बल्कि कोर्ट का है. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में मैं निष्पक्ष हूं.

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