
मध्यप्रदेश सरकार ने आज फैसला लिया है कि राज्य में एमबीबीएस कर रहे डाक्टरों को एक साल गांवों में रहकर डाक्टरी करना होगा.वहीं राज्य योजना आयोग का नाम बदलकर स्टेट प्लानिंग करने का निर्णय लिया है.
राज्य मंत्रिमंडल की आज हुई बैठक में ये फैसले लिए गए. बैठक में मध्यप्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र निवेश प्रोत्साहन नीति 2019 को मंजूरी दी गई है. इस नवीन योजना में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अस्पताल में बिस्तरों की संख्या को न्यूनतम 100 से कम करके 30 किया गया है. प्रति हजार जनसंख्या पर अस्पताल के कुल बिस्तरों की संख्या को आधार मानते हुए जिलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है. ऐसे जिले, जहां अस्पताल बिस्तरों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है, में स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश के लिए अधिक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे छोटे निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके. इसके अलावा राज्य योजना आयोग का नाम बदलकर स्टेट प्लानिंग करने का निर्णय लिया है.
मुख्यमंत्री सुषेण चिकित्सक प्रोत्साहन योजना
बैठक में प्रदेश के आदिवासी विकासखण्डों में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 'मुख्यमंत्री सुषेण चिकित्सक प्रोत्साहन योजना' लागू करने का निर्णय लिया है. इस योजना के तहत डाक्टरों को एक साल तक गांवों में सेवाएं देना होगा. योजना में अति पिछड़े 21 विकासखण्डों में संविदा चिकित्सक को कुल मानदेय 1 लाख से 2 लाख रुपए तक तथा शेष पिछड़े विकासखण्डों में 90 हजार से 1 लाख 85 हजार रुपए तक देय होगा. नियमित चिकित्सकों को इस योजना में कुल वेतन अति पिछड़े 21 विकासखण्डों में 96 हजार 100 रुपए से 1 लाख 42 हजार 700 रुपए तक तथा शेष पिछड़े विकासखण्डों में 86 हजार 100 रुपए से 1 लाख 27 हजार 700 रुपए तक देय होगा. इसके अलावा, पदस्थ किए जाने वाले चिकित्सकों को विकासखंड स्तर पर आवास समूह और विकासखण्ड आवास समूह से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में कर्तव्य स्थल पर उपस्थित होने के लिए विभागीय पूल वाहन के माध्यम से परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी.
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