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| रामनिवास रावत |
मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बयाबाजी का सिलसिला शुरु हो गया है. इस बार सिंधिया खेमे के पूर्व मंत्री और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामनिवास रावत ने मांग उठाई है कि वर्तमान में कांग्रेस को ‘फुलटाइम’ प्रदेश अध्यक्ष चाहिए. रावत के इस बयान के आने के बाद प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में जुटे दावेदारों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है.
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर बयानबाजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस पद के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं. साथ ही दावेदारों भी सक्रिय हैं. अब इस पद के लिए प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने बयान देकर कांग्रेस में फिर से प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दौड़ तेज करा दी है. रावत ने कहा कि मध्यप्रदेश कांग्रेस को ‘फुलटाइम’ अध्यक्ष चाहिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ हर संभव संगठन को समय दे रहे हैं, मगर पार्टी को अब ‘फुलटाइम’ अध्यक्ष चाहिए.
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के बाद कमलनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने की बात कही थी. उसके बाद से आज तक आलाकमान नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम नहीं तलाश पाई है. इस बीच प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कई नाम सामने आए, जिसमें पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, आदिवासी नेता बाला बच्चन, कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का नाम भी शामिल है, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है.
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ समर्थक मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और दिग्विजय सिंह समर्थक मंत्री डा. गोविंद सिंह भी समय-समय पर अपने खेमे के नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए बयानबाजी करते आ रहे हैं. कमलनाथ खेमा चाहता है कि बाला बच्चन को और दिग्विजय समर्थक चाहते हैं कि अजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए. वहीं आदिवासी नेता के रुप में कांतिलाल भूरिया का नाम भी इस पद के लिए सामने आया, मगर अब तक हाईकमान ने किसी भी नाम पर अपनी मोहर नहीं लगाई है.
सिंधिया के पक्ष में लगातार समर्थक उठा रहे हैं मांग
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रमुख दावेदार हैं. सिंधिया समर्थक भी लंबे समय से उनके नाम को लेकर बयानबाजी करते आए हैं और हाईकमान तक भी यह बात पहुंचा चुके हैं कि सिंधिया के हाथ में प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जाए. रावत के पहले मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, इमरती देवी, गोविंद सिंह राजपूत, महेन्द्र सिसोदिया भी यह मांग उठा चुके हैं. मगर अब तक इस पद के लिए फैसला नहीं हुआ है. हाल ही में झारखंड के लिए घोषित किए गए स्टार प्रचारकों की सूची में सिंधिया के नाम आने के बाद फिर से उनके समर्थक उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठाते नजर आ रहे हैं.

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