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| सचिन यादव |
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार पर आरोप है कि तत्कालीन सरकार ने ऋणात्मक (नकारात्मक) कृषि विकास दर को 20 प्रतिशत बताकर राज्य की जनता और किसानों के साथ विश्वासघात किया है. किसानों के नाम पर खुद की प्रसिद्धि का ढ़ोल पीटा और किसानों को अभाव तथा निराशा के गर्त में धकेल दिया. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने भी हमारे साथ कुठाराघात किया है. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती शिवराजसिंह सरकार ने बीमा कंपनियों को राज्यांश नहीं दिया, जिसके चलते खरीफ 2019 का हिस्सा केन्द्र हमें नहीं दे रहा है.
कृषि मंत्री यादव ने यह आरोप आज अपने विभाग के 11 माह के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए लगाए. उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार ने जो वचन किसानों के साथ किया, वह उसे पूरा करेगी. यादव ने कहा कि बीते दिनों मध्यप्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश के किसानों का हुआ. लगभग 55 लाख किसानों की 60 लाख हेक्टेयर में फसलें खराब हुई. हमने किसानों की फसलों की क्षतिपूर्ति एवं जानमाल और अधोसंरचना के नुकसान के लिए केंद्र सरकार से 6621.28 करोड़ रुपए मांगे, मगर आज तक केंद्र की भाजपा सरकार ने एक भी पैसा हमें नहीं दिया.उन्होंने कहा कि इसके बाद किसान की सबसे बड़ी निर्भरता फसल बीमा से होती है. हमने इस भीषणतम प्राकृतिक आपदा के लिए खरीफ वर्ष 2019 हेतु फसल बीमा का राज्यांश अग्रिम राशि 509.60 करोड़ का भुगतान बीमा कंपनियों को कर दिया है. मगर केंद्र सरकार ने प्रदेश के साथ बड़ा कुठाराघात करते हुए यह कहा है कि चूंकि पूर्ववर्ती शिवराजसिंह सरकार ने बीमा कंपनियों को रबी सीजन 2017-18 में रुपए 165 करोड़, खरीफ 2018 में रुपए 1772 करोड़ तथा रबी सीजन 2018-19 में राशि 424 करोड़ रुपए अर्थात कुल 2301 करोड़ रुपए का राज्यांश राशि का भुगतान नहीं किया गया है, इसलिए इस वर्ष की भीषण त्रासदी के बावजूद हमें फसल बीमा का खरीफ 2019 का केंद्र का हिस्सा केंद्र की भाजपा सरकार नहीं दे रही है. किसानों की विपत्ति के समय केंद्र की भाजपा सरकार का यह कुठाराघात असहनीय है.
कृषि मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के खरीफ 2018 के फ्लेट भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत मक्का फसल हेतु 2.60 लाख किसानों को लगभग 514 करोड़ रुपए का भुगतान किया है. मगर दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने किसानों के नाम पर खुद की प्रसिद्धि का ढ़ोल पीटा, मगर किसानों के साथ छलावा ही किया.
गौशाला का निर्माण जैविक खेती के लिए मील का पत्थर
जैविक खेती के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में पहले नंबर का राज्य है. एपीडा के अनुसार मध्यप्रदेश में 2 लाख 13 हजार हेक्टेयर में जैविक खेती की जा रही है.जिसमें कपास, गेहूं, धान, अरहर, चना, सोयाबीन इत्यादि फसलें शामिल हैं. प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौशालाओं का निर्माण जैविक खेती के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है.जैविक खेती के लिए गोबर खाद का उपयोग तथा गौमूत्र से कीटनाशक जैविक खेती के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

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