बुधवार, 6 नवंबर 2019

कन्यादान राशि नहीं दी जा रही कन्याओं को: नरोत्तम

नरोत्तम मिश्रा 

मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि राज्य की कमलनाथ सरकार ने कन्यादान योजना की राशि तो बढ़ा दी, मगर अब तक कन्याओं को राशि नहीं दी है. उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार पहले दिन से ही झूठ बोल रही है. किसानों को कर्ज माफ करने की बात कहती है, मगर वास्तविकता सबके सामने हैं. इसी तरह कन्याओं के विवाह को 6-7 माह बीते गए, मगर उन्हें कन्यादान राशि के लिए भटकना पड़ रहा है.
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई कन्यादान योजना की राशि कमलनाथ सरकार ने बढ़ाकर पिछले साल 51 हजार रुपए कर दी थी, लेकिन ये राशि लोगों को नहीं दी जा रही. पूर्व मंत्री मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस सरकार पहले दिन से ही झूठ बोल रही है. उन्होंने कहा कि सत्ता में आते ही सबसे पहले वल्लभ भवन में कागजों पर सरकार ने किसानों के दो लाख के कर्ज माफ कर दिए, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिला. आज भी कई किसान ऐसे हैं, जिनकी कर्ज की राशि माफ नहीं की गई है. 
उन्होंने कहा कि बेटियों के विवाह के लिए मिलने वाले 25 हजार रुपए को बढ़ाकर 51 हजार रुपए कर दिया गया, लेकिन आज तक एक भी बेटी को ये सहायता राशि नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि जब सरकार गौमाता पर टैक्स लगा रही है, तो फिर बेटियों के साथ ऐसा क्यों नहीं होगा. पूर्व मंत्री का आरोप है कि सरकार सिर्फ औपचारिकताएं पूरी कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है, न तो सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया है और न ही कन्यादान योजना के तहत बेटियों को मिलने वाली राशि अभी तक उनके खातों में गई है.
बेटियों, बुजुर्गों के हक तो न छीनों
शिवराज सिंह चौहान 

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट के जरिए कन्यादान योजना की राशि न दिए जाने को लेकर सरकार पर हमला किया है. उन्होंने  ट्वीट कर लिखा है कि मुख्यमंत्री और कन्यादान योजना में पिछले साल हुई शादियों के 19 हजार से ज्यादा जोड़ों को 7  महिने बाद भी राशि नहीं मिलने पर सरकार का घेराव किया है. शिवराज ने ट्वीट कर लिखा है मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर कमलनाथ सरकार कर क्या रही है? विभागों ने हाथ खड़े कर दिए हैं, तो क्या मुख्यमंत्री कमलनाथ  भी हाथ खड़े करेंगे? ऐसी नकारा और निकम्मी सरकार आज तक मैंने नहीं देखी, जिससे कुछ होता ही नहीं. उन्होंने कहा कि कम से कम बेटियों, बुजुर्गों और किसानों का हक तो न छीनों.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें