भाजपा प्रदेश कार्यालय पर लगा समर्थकों का जमावड़ामध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए अंतिम क्षणों में राकेश सिंह का नाम आते ही इस पद की दौड़ के दावेदारों के अलावा भाजपा नेता भी चकित रह गए. किसी को उम्मीद नहीं थी कि इस तरह से अध्यक्ष के नाम की घोषणा होगी. राकेश सिंह के नाम उनके समर्थक भाजपा कार्यालय पहुंचे और ढोल की थाप पर जमकर थिरके. इस बीच दोपहर बाद उनके नाम की पार्टी द्वारा अधिकृत रुप से घोषणा की गई.
मध्यप्रदेश भाजपा में बदलाव को लेकर मंगलवार से समीकरण बनते बिगड़ते रहे. देर रात तक चली समन्वय समिति की बैठक में मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भूपेन्द्र सिंह और राजेन्द्र शुक्ल के नामों की चर्चा रही, साथ ही राकेश सिंह का नाम भी सामने आया, मगर उनकी दावेदारी में वजन कम रहा. इस बीच सहमति नहीं बनी तो संगठन महामंत्री रामलाल ने दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा की और फिर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से चर्चा कर राकेश सिंह के नाम पर अपनी मोहर लगाई, मगर नाम की घोषणा आज दोपहर को की गई. बताया जाता है कि शिवराजसिंह की पहली पसंद गृह मंत्री भूपेन्द्रसिंह थे, इसके बाद राजेन्द्र शुक्ला. मगर दोनों ही मंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे. इसके बाद मुख्यमंत्री ने यह तय किया कि राकेश सिंह के नाम पर सहमति बनाई जाए. इस पर दिल्ली ने भी मोहर लगा दी. इसके बाद आज दोपहर को जब राकेश सिंह के नाम की घोषणा हुई तो दावेदारों के अलावा अन्य वरिष्ठ नेता भी चौंक गए. किसी को उम्मीद नहीं थी कि राकेश सिंह का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए तय होगा.
वरिष्ठ करते रहे घंटो इंतजार
भाजपा प्रदेश कार्यालय पर आज दोपहर को राकेश सिंह के नाम की घोषणा के साथ ही पदभार ग्रहण कार्यक्रम रखा गया, जिसमें शामिल होने के लिए मंच पर वरिष्ठ नेता कैलाश जोशी और बाबूलाल गौर सबसे पहले पहुंचे. इन दोनों नेताओं को राकेश सिंह सहित अन्य नेताओं का मंच पर घंटों इंतजार करना पड़ा. मंच पर दोपहर बाद ही नेता पहुंचे, जबकि ये नेता करीब 12.30 बजे पहुंच गए थे. गौर ने यहां पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि राकेश सिंह एक सुलझे व्यक्ति हैं. अब संगठन में संगठन से जुड़े लोगों की सुनी जाएगी. सत्ता और संगठन बीच तालमेल भी बना रहेगा और काम भी ठीक से होगा.
महाकौशल के नेता हुए खुश
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की दो पहले दिल्ली यात्रा के दौरान ही महाकौशल क्षेत्र से जुड़े राकेश सिंह का नाम तय हो गया था. मुख्यमंत्री ने दिल्ली में अमित शाह और रामलाल से चर्चा की थी. मंगलवार को रामलाल ने भोपाल आकर कोर कमेटी के सदस्यों से इस नाम पर औपचारिक मुहर लगवा ली. अध्यक्ष बनने के बाद राकेश सिंह आज प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुचे. यहां उन्होंने संगठन महामंत्री सुहास भगत, सह संगठन महामंत्री अतुल राय समेत कई नेताओं से मुलाकात की. महाकौशल को दायित्व देने के लिए पार्टी में लंबे समय से कवायद चल रही थी. महाकौशल के नेताओं का कहना है कि लंबे समय बाद भाजपा में महाकौशल को महत्व मिला है, इसका फायदा विधानसभा के अलावा लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिलेगा.
पिछड़े वर्ग को साधने का किया प्रयास
पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्रीशिवराज सिंह दलित ऐजेंडे को लेकर चल रहे हैं. इसके कारण पिछड़ा वर्ग नाराज हो गया और शिवराज सिंह विरोधी हो गया.प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को भाजपा को वोटबैंक माना जाता है. उमा भारती और बाबूलाल गौर भी पिछड़ा वर्ग से ही थे. दलितों को प्रसन्न करने की कोशिश में सवर्ण वोट हाथ से जाता नजर आ रहा है. हालात वर्ग संघर्ष के बन गए. ऐसे में यदि किसी ठाकुर या ब्राह्मण की ताजपोशी होती तो दलित वोट खिसक जाता और यदि किसी दलित या आदिवासी को प्रदेश अध्यक्ष बनाते तो सवर्ण रूठ जाते. यही एक मात्र बीच का रास्ता था. अब शिवराज से नाराज पिछड़ा वर्ग भी राकेश सिंह में उम्मीद देखते हुए भाजपा के साथ हो जाएगा.
मामा के सहारे मामा को मिला भांजा
राकेश सिंह के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनते ही एक चर्चा और चल पड़ी की मामा गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह के सहारे से मामा शिवराजसिंह चौहान को राकेश सिंह के रुप में भांजा मिल गया है. राकेश सिंह भूपेन्द्र सिंह के भांजे हैं और अध्यक्ष पद के लिए मुख्यमंत्री अपने पक्ष से भूपेन्द्र सिंह का नाम आगे बढ़ा चुके थे, मगर भूपेन्द्र सिंह मंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते थे. इसके चले उन्होंने भांजे जबलपुर के सांसद राकेश सिंह का नाम सुझाया जिस पर मुख्यमंत्री भी तैयार हो गए.
विवादों से रहेगी दूरी
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की माने तो संगठन की जिम्मेदारी जिस तरह से राकेश सिंह को दी है, उससे यह तय है कि चुनावी साल में सत्ता और संगठन के बीच किसी तरह का विवाद नहीं होगा, यही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी चाहते थे. राकेश सिंह की खुद की छवि कुछ ऐसी है कि वे जबलपुर के सांसद तो हैं, मगर कभी भी स्थानीय नेताओं को लेकर वे किसी तरह के विवाद में नहीं रहे हैं. जबलपुर ग्रामीण के जिला अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जो काम किया, उससे उनकी छवि में निखार हुआ था. इस दौरान उनके दौरा निकाली गई गांव चलो, घर चलो अभियान भी काफी चर्चा में रहा. बाद में यह अभियान भाजपा ने अपनाया.
बोर्ड से हटा प्रदेश अध्यक्ष
राजधानी में आज बुधवार की सुबह जब राकेश सिंह के नाम की चर्चा तेज हुई और दोपहर होते-होते उनके नाम पर लगभग मुहर लग गई, तब नंदकुमारसिंह चौहान के निवास पर लगे बोर्ड पर अध्यक्ष पद पर सफेद कागज चिपका दिया गया. ऐसा खुद चौहान के निर्देश पर ही हुआ है. चौहान के निवास पर राकेश सिंह के नाम की घोषणा के पहले अध्यक्ष पद को हटाया जाना भी आज चर्चा का विषय बना रहा.
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