गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

सामाजिक सहभागिता से रुके बाल विवाह


 बाल विवाह भी एक सामाजिक अभिशाप है. इसको रोकने के लिए वर्ष 2006 में भी बाल विवाह निषेध अधिनियम लागू किया गया है. इस सामाजिक समस्या का समाधान कानून के साथ ही, सामाजिक जागरूकता से ही संभव हो पायेगा. समाज में कुछ जागरूक नागरिक इस काम को बखुबी निभा रहे हैं.
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम बीजापुर में सुपरवाइजर सुशीला और महिला सशक्तिकरण अधिकारी मंजूषा शर्मा की सक्रियता से दो नन्हें बच्चे बाल विवाह के दावानल में झुलसने से बच गये हैं. इन नन्हें बच्चों के जीवन के साथ बाल विवाह का खिलवाड़ होने वाला था. समाज के एक जिम्मेदार प्रहरी ने इसकी सूचना महिला सशक्तिकरण अधिकारी मंजूषा शर्मा को दी, शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझकर देर किए बिना सुपरवाइजर सुशीला बघेल और पुलिस बल के साथ समन्वय स्थापित कर रात्रि में मौके पर पहुँचकर बाल विवाह रूकवाया और दो मासूमों की जिंदगी को बर्बाद होने से बचा लिया.
 शौर्यादल की सजगता से रूका बाल विवाह
मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में भी कलेक्टर  माल सिंह के मार्गदर्शन में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निगरानी दल गठित किये गये. महिला सशक्तिकरण विभाग द्वारा भी व्यापक जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके सार्थक परिणाम भी सामने आये है. 14 अप्रैल को वार्ड नं. 2 उमरिया में भम्रण के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रीति एंव शौर्या दल के सदस्यों को बाल विवाह तय होने की सूचना प्राप्त हुई. जानकारी प्राप्त हुई कि  सुक्खु कुशवाहा द्वारा अपने बेटे विनोद का विवाह स्लीमनाबाद में तय किया गया है. अभिलेख के अनुसार उनकी जन्म तिथि 5 जून 2001 अंकित पाई गई कक्षा 3 की अंकसूची में जन्म तिथि 1997 की अंकित पाई गई जिसमें ऊपरी लेखन किया गया प्रतीत हुआ. शासकीय हाई स्कूल लालपुर के रिकार्ड में विनोद कुशवाहा की जन्म तिथि 5 जून 2001 अंकित पाई गई. रिकार्डो के अनुसार विनोद की आयु 21 वर्ष से कम थी. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रीति सिंह एवं शौर्या दल के सदस्यों द्वारा वर पक्ष को बाल विवाह अधिनियम की जानकारी देकर उसकी उम्र 21 वर्ष पूर्ण नहीं होने तक विवाह नहीं करने की समझाईश दी गई. फलस्वरूप 16 अप्रैल को होने वाला विवाह का तिलक और 27 अप्रैल 2018 को होने वाला विवाह समारोह स्थगित कर दिया गया. जिले में 'लाडो योजना' के प्रभावी क्रियान्वयन से बाल विवाह होने से रूक गये हैं.

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