सोमवार, 2 अप्रैल 2018

भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश में चार की मौत

दहल उठा चंबल, बंद के दौरान रोकी ट्रेन, पुलिसकर्मियों से की मारपीट
अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के विरोध में भारत बंद के तहत मध्यप्रदेश का चंबल अंचल दहल गया. अंचल के ग्वालियर, भिंड, मुरैना में गोलियां चली और ग्वालियर में तो बिगड़ी स्थिति को काबू पाने के लिए सेना को बुलाना पड़ा. कई स्थानों पर कर्फ्यू लगाकर हालात पर काबू पाया गया. इस दौरान चार ं की मौत हो गई.हिंसा के चलते ग्वालियर में इंटरनेट की सेवाएं भी बंद करनी पड़ी.
भारत बंद का मध्यप्रदेश के ग्वालियर चंबल अंचल में आज सुबह से ही खासा असर दिखाई दिया. इस अंचल में स्थिति भयावह बनती गई. ग्वालियर के डबरा शहर में प्रदर्शनकारियों ने थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों को बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट तक कार डाली. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश त्रिपाठी को प्रदर्शनकारियों ने घेर कर लाठियों से पीटकर जख्मी कर दिया.  उन्हें डबरा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ग्वालियर शहर में व्यापक तोड़-फोड़, पथराव और आगजनी की खबरें आ रहीं है.  बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा के चलते ग्वालियर के मुरार, थाटीपुर, लहार, गोहद, मेहगांव सहित कई स्थानों पर कर्फ्यू लगा दिया गया है.  ग्वालियर के मुरार और गोले का मंदिर इलाके में स्कूल बस सहित करीब आधा दर्जन वाहनों को आग के हवाले कर दिया. पुलिस ने उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. इसके बाद भी हालात काबू में नहीं आए तो कर्फ्यू लगाना पड़ा है. कलेक्टर राहुल जैन ने बताया कि गोले का मंदिर, मुरार और महाराजपुर थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगाया गया है. उन्होंने बताया कि अब हालात पूरी तरह से नियंत्रण में है. इसके अलावा भिंड में बंद समर्थक और विरोधियों के बीच जमकर टकराव हुआ. फायरिंग और पथराव के बाद पूरे जिले मे हिंसक प्रदर्शन हुए है. इसके बाद जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है.  जानकारी के अनुसार राज्य के ग्वालियर में दो, मुरैना और भिंड में एक-एक युवक की मौत होने की खबर हैं.
मुरैना में फायरिंग
मुरैना जिले में भारत बंद के दौरान भड़की हिंसा में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई. भारत बंद का समर्थन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का आरोप है. जानकारी के अनुसार, बंद समर्थक और विरोधी आमने-सामने हो गए. इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसकी जद में आने से किशनपुर के सरपंच बलदाऊ पाठक के बेटे बेटू पाठक की मौत हो गई. प्रदर्शन के दौरान बंद समर्थकों ने बस स्टैंड, बैरियर चौराहे पर पथराव किया. इस दौरान कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई. प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को बल प्रयोग के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े. पुलिस ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा तो मुरैना रेलवे स्टेशन पर उपद्रव शुरू हो गया. बंद समर्थकों ने यहां पटरियों पर डेरा जमा लिया, जिसके बाद ट्रेनों की आवाजाही थम गई है.
मालवा में भी दिखा असर
राज्य के मालवा अंचल के बड़वानी में भी रैली निकाल कर, नारेबाजी कर अन्य लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है.  इसके अलावा खरगौन  और मंडलेश्वर में भी रैली निकालकर, व्यापारियों से दुकानें बंद कराई गई. खंडवा में भी युवाओं ने दुकानें बंद कराने की कोशिश की, इस दौरान उनका दुकानदारों से विवाद हो गया.  सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया.
सतना में किया चक्काजाम
सतना में पूरा दलित समाज एक साथ सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहा है. इन हालातों में समाज के लोगों ने चक्का जाम कर राष्ट्रीय राजमार्ग पर विरोध प्रदर्शन किया. सतना में मारपीट और विवाद की स्थिती भी सामने आई है.
पुलिस का दावा सोशल मीडिया ने भड़काई हिंसा
मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में भड़की हिंसा के पीछे सोशल मीडिया का हाथ पुलिस मान रही है. पुलिस का दाव है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट के बाद राज्य के अलग-अलग स्थानों पर  हुई फायरिंंग में चार लोगों की मौत हुई है. राजधानी में आईजी  आईजी इंटेलीजेंस मकरंद देउस्कर ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि ग्वालियर में दो, भिंड और मुरैना में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है. उन्होंने बताया कि ग्वालियर, भिंड और मुरैना में कई जगहों पर कर्फ्यू लगाया गया है. वहीं, सागर, दतिया और बालाघाट में भी धारा 144 लागू की गई है. आईजी देउस्कर ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने बताया कि आपत्तिजनक पोस्ट को वायरल करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है. अभी कई जिलों में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है.
इंदौर में भी दिखा बंद का असर
दलित संगठनों के भारत बंद का इंदौर शहर में खासा प्रभाव दिखा. सुबह से ही दलित संगठनों के हजारों कार्यकर्ता शहर के सड़कों पर उतर आए और जय भीम के नारे के साथ खुले दुकानों और बाजारों को बंद करना शुरू कर दिया. शहर के सबसे व्यस्तम व्यापारिक क्षेत्र सराफा बाजार, राजवाडा, बर्तन बाजार, मरोठिया, कपडा बाजार सहित पूरे शहर बंद रहा. वही छोटी छोटी रैली के रुप में आंदोलनकारी शहर के बाजारों का चक्कर लगाते रहे. सरकारी दफ्तरों में भी इस आंदोलन का प्रभाव दिखा. वही शहर में निकलने से पहले दलित संगठनों के लोग राजवाडा पर एकत्रित हुए और जमकर नारे बाजी की. इस दौरान पूरे शहर में तगडी सुरक्षा व्यवस्था का इंताजाम पुलिस विभाग ने किया हुआ था. आंदोलनकारियों के साथ पुलिस विभाग के अधिकारी भी चल रहे थे.  शहर में कही भी आशांति स्थिति निर्मित नहीं हुई.








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