शनिवार, 14 अप्रैल 2018

भाजपा को नहीं मिल रहा निर्विवाद चेहरा

भारतीय जनता पार्टी  की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पद पर बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। पार्टी के सामने हालांकि सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिस भी व्यक्ति को कमान सौंपी जाए वह निर्विवाद हो, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान का साथ दे और किसी गुट विशेष से उसका नाता न हो। बता दें, इसी साल के आखिर में राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
पिछले दिनों हुए 4 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में मिली करारी हार और पार्टी में उभरी गुटबाजी को वर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चैहान काबू नहीं कर पा रहे हैं और यही कारण है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी बदलाव का मन बना चुकी है। बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज की नागपुर यात्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारियों से मुलाकात बदलाव की अटकलों को और हवा दे गई।
राज्य में बीजेपी के पास अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की सूची में राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, उपाध्यक्ष प्रभात झा, राज्य के मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, सांसद अनूप मिश्रा, प्रदेश महामंत्री वी.डी. शर्मा सहित कई और नाम भी हैं। इसके अलावा नरोत्तम मिश्रा की मुख्यमंत्री से करीबी है, मगर पेड न्यूज के मामले में चुनाव आयोग उन्हें छह साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा चुका है। दिल्ली उच्च न्यायालय में यह फैसला फिलहाल सुरक्षित है। बीजेपी के जानकार कहते हैं कि शिवराज की मुख्य तौर पर दो पसंद हैं- एक भूपेंद्र सिंह और दूसरे वी.डी. शर्मा। भूपेंद्र सिंह ने ‘सिंहस्थ कुंभ’ का बखूबी संचालन किया था, तो शर्मा ने ‘नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा’ की कमान संभाली थी। शर्मा संघ और अमित शाह की भी पसंद हैं। वे वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी भी रहे हैं। इस वक्त युवाओं से सबसे ज्यादा संपर्क और संवाद उनका है। वहीं भूपेंद्र सिंह सहज और सरल नेताओं में गिने जाते हैं। बीजेपी के भरोसेमंद सूत्रों का दावा है कि भूपेंद्र सिंह और शर्मा में से कोई एक अध्यक्ष होगा, नहीं तो पार्टी एक बार फिर नरेंद्र सिंह तोमर को प्रदेश राजनीति में भेज सकती है। इसकी वजह तोमर का राज्य के हर वर्ग, क्षेत्र से संपर्क है। इतना ही नहीं उनकी शिवराज से अब भी पटरी मेल खाती है।

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