शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

शत्रु देशों की तरह आपस में न टकराएं अधिकारी

 मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा मित्र बनकर करें एक-दूसरे का सहयोग
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने आज अधिकारियों को हिदायत दी कि वे दो शत्रु देशों की तहर आपस में न टकराएं, बल्कि एक दूसरे का सहयोग कर देश सेवा करें.
मुख्यमंत्री चौहान आज सिविल सर्विस डे पर राजधानी में प्रशासन अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. प्रशासन अकादमी में आज कार्यशाला का आयोजन किया गया था. कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को शांतिपूर्वक कार्य करना चाहिए, न कि दो शत्रु देशों की तरह आपस में टकराना चाहिए. उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि अधिकारी आपस में अलग-अलग गुट बना लेते हैं और आपस में शत्रुओं की तरह टकराते हैं.  अधिकारियों का आपस में ऐसा व्यवहार बिल्कुल गलत है. उन्होंने आग्रह किया कि अधिकारियों को एक-दूसरे का मित्र बनकर देश सेवा में एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को सिविल सर्विसेज की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए और इसे धूमिल होने से बचाना चाहिए. अधिकारियों को प्रदेश के विकास के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए. प्रदेश में प्रशासन में सुधार के लिए फिर से सोच-विचार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह ऐशो-आराम की नौकरी नहीं है, यह एक मिशन है, जिसे पूरा करने के लिए आप सभी को ऐशो-आराम छोड़कर अपने काम पर ध्यान देने की जरूरत है. 
जनकल्याण नौकरी नहीं, मिशन है
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मैं सिविल सेवा का अधिकारियों से कहना चाहता हूं कि हम जिस भी विभाग से आते हैं, उस विभाग के लिए अपना सर्वस्व झोंक कर काम करें, क्योंकि जनकल्याण कोई नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन है. मैं जब भी प्रदेशवासियों से मिलता हूँ तो मेरे मन में एक ही विचार होता है कि उनसे बात करके, उनकी समस्याएं सुनकर, समाधान की कोशिश करुं.  यही तड़प प्रदेश के हर एक लोकसेवक में होनी चाहिए. कई बार अचानक चुनौतियां सामने आ खड़ी होती है, तब त्वरित निर्णय लेकर काम करना होता है. 
सकारात्मक सोच रखें अधिकारी
मुख्यमंत्री ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए, जहां भी नकारात्मक सोच की दखल हो जाती हैं वहां सफलता असंभव है. मध्यप्रदेश लगभग सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य कर रहा है. विभिन्न क्षेत्रों में हम लगातार पुरस्कार जीत रहे हैं. नियम व प्रक्रियाएं कई मामलों में आड़े आती हैं ऐसे में सकारात्मक दृष्किोण के साथ संवेदना भी साथ है तो हर कार्य पूर्ण होना ही होना है. आवश्यक नहीं कि हमें सफलता हर बार प्राप्त हो, कभी असफल भी होना पड़ता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उस असफलता से हताश हो कर रह जाएं, हमारा प्रयास महत्व रखता है.

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