क्षत्रपों को दी जा सकती है अपने-अपने क्षेत्रों की जिम्मेदारीभारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने के बाद अब मध्यप्रदेश कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए बदलाव की तैयारी तेज हो गई है. कांग्रेस गुजरात की तर्ज पर पांच कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर क्षेत्रीय आधार पर क्षत्रपों को जिम्मेदारी सौंप सकती है.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के बदले जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष पद के बदलाव की चर्चा तेज हो गई है. कांगे्रस में बदलाव को लेकर दिल्ली में मंथन भी शुरु हो गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की इस संबंध में चर्चा भी हुई है. चर्चा के बाद गुजरात फार्मुला मध्यप्रदेश में भी अपनाए जाने की बात कही जा रही है. सूत्रों की माने तो राज्य में पांच कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर क्षत्रपों या फिर उनके समर्थकों को क्षेत्रवार जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ, सुरेश पचौरी, दिग्विजयसिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरुण यादव को क्षेत्रवार जिम्मेदारी दी जा सकती है. हालांकि कुछ का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह को भी जिम्मेदारी मिल सकती है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस बुंदेलखंड, महाकौशल, ग्वालियर-चंबल, मध्यप्रदेश मध्य, मालवा निमाड़ और विंध्य अंचलों में कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. इस लिहाज से अगर कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाते हैं तो छह अंचलों के लिए छह नेताओं को जिम्मेदारी सौंपनी पड़ेगी.
मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होगा घोषित
राहुल गांधी ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा. कांगे्रस एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरेगी. अगर कांग्रेस में ऐसा होता है तो कई नेताओं के लिए यह अच्छी खबर भी मानी जा रही है. पूर्व में जब भी चेहरा घोषित करने की बातें उठी, उसके साथ विवाद भी हुए हैं. इसे देखते हुए राहुल गांधी ने इस मुद्दे को समाप्त कर ने का फैसला लिया है. हालांकि उपचुनाव के दौरान शिवपुरी में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बावरिया ने खुद इस बात के संकेत दे चुके थे कि पार्टी किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करेगी.
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