मंगलवार, 17 अप्रैल 2018

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा होगी जल्द!

 ब्राह्मण मतदाता को साधने का हो रहा प्रयास
मध्यप्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बदलना तय है. इसके नाम की घोषणा कल बुधवार को की जा सकती है. भोपाल से लेकर दिल्ली तक इसको लेकर कवायद जारी है. इधर अपने को पद से हटाए जाने के संकेत मिलने के साथ ही आज मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इस बात का खुलासा किया है कि प्रदेश अध्यक्ष  नंदकुमार सिंह चौहान ने खुद उनसे मुलाकात कर पद से हटने की इच्छा जताई है.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के पद से हटाए जाने की कयासों को अब जल्द ही विराम लगने जा रहा है. उनके स्थान पर नये नाम की घोषणा संभवत: बुधवार को की जा सकती है. भाजपा के उपचुनाव में लगातार हुई हार के बाद से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि चौहान को पद से हटाया जाएगा, मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के विश्वस्त होने के चलते मामले में विलंब हुआ. हाल ही में नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत और फिर दिल्ली में भाजपा हाईकमान अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को इस बात के संकेत दे दिए थे कि नंदकुमार सिंह चौहान को पद से हटाया जाएगा. इसके बाद से नये नाम पर मंथन चल रहा था. बताया जाता है कि डा. नरोत्तम मिश्रा का नाम अब तक सबसे आगे हैं. इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय भी इस दौड़ में हैं. हालांकि भाजपा के संगठन मंत्री रामालाल इन दिनों भोपाल में डेरा जमाए हुए हैं. वे समन्वय समिति की बैठक के बाद दिल्ली जाकर किसी एक नाम पर अपनी सहमति देंगे उसके बाद ही नये नाम की घोषणा होगी. 
ब्राह्मण मतदाता को लुभा सकती है भाजपा
भाजपा इस बार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ब्राह्मण मतदाता को लुभाने का प्रयास कर सकती है. ब्राह्मण वर्ग की लगातार भाजपा से नाराजगी को देख भाजपा अब इस वर्ग को अपने से छिटकने नहीं देना चाहती है. पहले यह माना जा रहा था कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के व्यक्ति के नाम की घोषणा होगी, इसके चलते लाल सिंह आर्य का नाम प्रमुखता से उभरा था. मगर वर्तमान में बिगड़े समीकरण बिगड़  रहे हैं. सोमवार को परशुराम जयंती के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के सामने ब्राह्मण वर्ग के युवाओं ने आरक्षण विरोधी बैनर लहरा दिए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. इसे देखते हुए अब खुद मुख्यमंत्री भी इस वर्ग की उपेक्षा नहीं होने देना चाहते हैं.  अब यह माना जा रहा है कि ब्राह्मण के पक्ष में अध्यक्ष पद दिया जाए

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