रविवार, 22 अप्रैल 2018

पंचर जोड़कर आजीविका चलाने वाला दे रहा नौकरी

  मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के  छापीहेडा के  मुश्ताक खां कभी खुद पंचर जोड़कर अपना जीवन यापन करते थे. जिससे उनकी रोजाना की आय महज 100-200 रुपए ही हुआ करती थी. एक समाचार पत्र में छपे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से संबंधित समाचार ने उन्हें अपना व्यवसाय बढाने और आगे बढने की प्रेरणा दी. और आज वे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर टू व्हीलर आॅटो पार्टस् की दुकान खोलकर 20 से 25 हजार रुपए महीना कमा रहें हैं. उन्होंने अपनी दुकान पर आॅटो पार्टस् बेचने के साथ पंचर जोड़ने के कार्य के लिए एक अन्य व्यक्ति को रोजगार भी दे रखा है. 
मुश्ताक ने बताया की घर की आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण वे 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर सके. स्कूल जाने के साथ-साथ समय मिलने पर वे अपने पिता जी की पंचर जोड़ने की दुकान में भी बैठते थे. और पंचर जोड़ने के काम में अपने अब्बू का हाथ बटाया करते थे. एक दिन उन्हें एक पेपर में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की जानकारी पढ़ने को मिली तो उन्होंने जिले के अल्प संख्यक पिछड़ा वर्ग कल्याण से संपर्क किया और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजनान्तर्गत टू-व्हीलर आॅटो पार्टस् की दुकान खोलने के लिए 3,00,000 रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया. इसके साथ दुकानदारी में आय-व्यय का हिसाब-किताब सीखने के लिए राजगढ में स्टार स्वरोजगार संस्थान से प्रशिक्षण भी लिया.  बैंक द्वारा 3,00,000 रुपए का ऋण स्वीकृत होने पर उन्होंने दो लाख रुपए की पूंजी लगाई . जिसमें उन्हें 90,000 रुपए की सब्सीडी भी मिली. प्राप्त ऋण में उन्होंने अपनी दुकान में सभी दो पहिया वाहनो की एसेसरीज, टायर, ट्यूब आदि रख कर अपने पंचर जोड़ने के व्यवसाय को नई दिशा दी. सभी दो पहिया वाहनो की एसेसरीज, टायर, ट्यूब आदि एक ही दुकान पर उपलब्ध होने एवं  मुश्ताक का व्यवहार कुशल व्यक्तित्व होने से आस पास के ग्रामों में उनकी साख बढ़ी एवं बिक्री भी बढ़ी.
 मुश्ताक ने बताया कि दुकान से उनका मासिक विक्रय लगभग 90,000 रुपए है. इसमें से वे अपने यहां काम पर लगाए एक व्यक्ति का लेबर चार्ज और 7,000 रुपए बैंक की किश्त प्रतिमाह जमा करने के बाद उनकी लगभग हर महीने 20,000 से अधिक की बचत हो जाती है. जो उसके परिवार के खर्च और दो बच्चों को कान्वेन्ट स्कूल में पढ़ाने पर व्यय हो रही है.  मुश्ताक ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना सरकार की बहुत अच्छी योजना है. इससे उन्हें न सिर्फ रोजी रोटी का सहारा मिला है बल्कि समाज में इज्जत भी मिली है. उन्होंने कहा की वह स्वयं तो नहीं पढ़ पाये लेकिन अपने बच्चों की पढाई में कोई कसर नहीं रख रहें है ताकि उन्होंने जो दिन देखें हैं वह उनके बच्चों को नहीं देखना पड़े. 

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