बुधवार, 18 अप्रैल 2018

नर्मदानंद और भय्यू महाराज नहीं बनेंगे मंत्री


नर्मदानंद महाराज और भय्यू महाराज ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए मंत्री पद को लेने से इंकार कर दिया है. दोनों ने समाजसेवा को प्राथमिकता देते हुए यह पद स्वीकार करने से मना किया है.
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संतोंं को राज्यमंत्री का दर्जा देने के बाद उठे विवाद को देखते हुए राज्य के दो संतों नर्मदानंद महाराज और भय्यूजी महाराज ने ये पद स्वीकार करना मना कर दिया है. राजधानी में एक कार्यक्रम में शामिल होने ये संत आए थे. भय्यू महाराज ने कहा कि नर्मदा की सेवा समाज की सेवा है, जब से उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला है, तब से उन्होंने ना तो इस पद का उपयोग किया है और ना ही वे इसका उपभोग करेंगे. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि मुझे यह सम्मान देने की पीछे सरकार की मंशा मेरे समाजसेवा के कार्य को सम्मान देना रही होगी, लेकिन वे इस पद को स्वीकार नहीं करेंगे. वे समाजसेवा का अपना कार्य करते रहेंगे. वहीं नर्मदानंद महाराज ने कहा कि मैं कभी भी इस पद को स्वीकार नहीं करुंगा. इसलिए अभी से ये पद त्यागता हूं. उन्होंने कहा कि मेरा कार्य समाजसेवा का है, जो मैं करता रहूंगा. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने की घोषणा की थी. इन संतों में नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कम्प्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पंडित योगेन्द्र महंत का नाम शामिल है. सरकार द्वारा आदेश जारी कर कहा गया था कि नर्मदा किनारे वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरुकता अभियान चलाने के लिए विशेष समिति बनाई गई है. इस समिति के पांचों सदस्यों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है. इसके बाद से संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने को लेकर विवाद उठा था, मगर इस विवाद के बीच कम्प्यूटर बाबा नर्मदा यात्रा पर निकल गए हैं. उन्होंने यह पद स्वीकार कर लिया है.

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